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बैकडोर सैटिंग पर डीसी की नजर, दो साल में फाइल हुए मामलों की अपील के आदेश जारी
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:22 AM IST
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अमित रूखाया
फतेहाबाद। एसडीएम कोर्ट के मार्फत फाइल करने के नाम पर होने वाली बैकडोर सैटिंग पर डीसी डा. हरदीप सिंह की टेढ़ी नजर पड़ गई है। डीसी डा. हरदीप सिंह ने फतेहाबाद जिले में पिछले दो सालों में उन सभी फाइल हो चुके मामलों की कमिश्नर कोर्ट में अपील करने के निर्देश जारी कर दिए हैं जिनमें 10 हजार से अधिक राजस्व के नुक्सान की आशंका है। डीसी के इन आदेशों के बाद जिले की सभी तहसीलों में हड़कंप की स्थिति है और अधिकारियों से ना तो कुछ कहते बन रहा है और ना ही निगलते। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज और डीसी हरदीप सिंह ने इस बात की तो पुष्टि की है कि जिन मामलों के फाइल होने से राजस्व के नुकसान की आशंका हो, उन मामलों को अपील करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उन्होंने इस बात को संज्ञान में होने से इंकार किया कि इस मामले में किसी प्रकार की कोई फिक्स राशि को बेस बनाया गया है।
दरअसल ये सारा मामला बैकडोर सेटिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। तहसील कार्यालय के सूत्रों की मानें तो पिछले दो सालों में तकरीबन 137 से अधिक ऐसे मामले हैं जिनमें रजिस्ट्री या मामले में ऑडिट ऑब्जेक्शन आने के बाद एसडीएम कोर्ट में मामले को फाइल कर दिया गया। जबकि उन मामलों में अपील करने पर राजस्व को बढ़ाना ना सही तो बचाया जरुर जा सकता था। मसलन रजिस्ट्री नंबर 1969, 2404, 3284, 5876, 366 , 454 में मामले एसडीएम कोर्ट ने फाइल कर दिए हैं। जबकि इनके राजस्व राशि लाखों में थी। लेकिन इनकी अपील ही नहीं की गई। ऐसे अनेकों और मामले हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीसी की ओर से जारी आदेशों में ये कहा गया है कि दस हजार से अधिक मामलों में अगर जरूरत हो तो अपील अवश्य की जाए। लेकिन जिन 137 फाइल किए मामलों की बात यहां की जा रही है, उसमें तकरीबन 29 के करीब ऐसे मामले थे जिसमें राजस्व राशि लाखों में थी। कुल 9 मामलों में तो राजस्व अमाऊंट पांच लाख भी था। ऐसे में फाइल करने के बावजूद उन मामलों को अपील में नहीं डालना अपने आप में बड़े सवाल खड़े करता है।
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तहसील मामलों पर एसडीएम कोर्ट में होती है सुनवाई, इसके बाद कमिश्नर कोर्ट में अपील
जिले की सभी तहसीलों में होने वाली रजिस्ट्रियों पर अगर ऑडिट विभाग कोई ऐतराज जताता है तो ऐसे मामलों की सुनवाई एसडीएम कोर्ट के मार्फत होती है। एसडीएम कोर्ट में लोगों एवं विभाग की सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट अपना फैसला सुना देती है। अगर फैसला विभाग के पक्ष में आता है तो फैसले की एक प्रति रिकार्ड के लिए और दूसरी प्रति तहसीलदार कार्यालय में भेजी जाती है कि वो राजस्व की रिकवरी करवाकर कोर्ट को सूचित करें। इसके अलावा जिन मामलों को फाइल कर दिया जाता है, उसके आदेश की भी एक प्रति तहसीलदार कार्यालय को भेजी जाती है। तहसील विभाग ऐसे फैसलों की प्रति को रजिस्ट्री के रिकार्ड के साथ लगा देता है ताकि भविष्य में इस फैसले के आधार पर अपनी गर्दन बचा सकें। जबकि होना ये चाहिए कि तहसील या राजस्व विभाग इन फाइल हो चुके मामलों को दोबारा से जांचे और अगर जरूरी लगे तो जिला मुख्यालय पर प्रतिमाह लगने वाली कमिश्रर कोर्ट में एसडीएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। लेकिन यहीं पर असल झोल है। एसडीएम कोर्ट से फाइल होने के बाद मामलों को कमिश्रर कोर्ट में अपील के लिए भेजा ही नहीं जाता। यहां पर अक्सर अधिकारियों पर कथित रुप से मिलीभगत के आरोप लगते हैं।
न्यायिक केसों की तरह राजस्व केसों में भी रिव्यू किया जाना चाहिए कि अगर संबंधित कोर्ट ने फैसला सही नहीं दिया है और इससे सरकार को राजस्व का नुक्सान हो रहा है तो इस फैसलों के खिलाफ अपील अवश्य करनी चाहिए। ऐसे केसों की रिव्यू कर अपील करने के आदेश जारी किए थे , लेकिन वैसे मुझे ये ध्यान नहीं है कि मैने इस संदर्भ में कोई न्यूनतम अमाऊंट भी तय की थी।
हरदीप सिंह, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद ।
इस संदर्भ में सभी तहसीलदारों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे उन केसों की अपील जरूर करें जिसमें उन्हें लगता हो कि सरकार को राजस्व मिल सकता है या राजस्व बचाया जा सकता है।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद ।
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फतेहाबाद। एसडीएम कोर्ट के मार्फत फाइल करने के नाम पर होने वाली बैकडोर सैटिंग पर डीसी डा. हरदीप सिंह की टेढ़ी नजर पड़ गई है। डीसी डा. हरदीप सिंह ने फतेहाबाद जिले में पिछले दो सालों में उन सभी फाइल हो चुके मामलों की कमिश्नर कोर्ट में अपील करने के निर्देश जारी कर दिए हैं जिनमें 10 हजार से अधिक राजस्व के नुक्सान की आशंका है। डीसी के इन आदेशों के बाद जिले की सभी तहसीलों में हड़कंप की स्थिति है और अधिकारियों से ना तो कुछ कहते बन रहा है और ना ही निगलते। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज और डीसी हरदीप सिंह ने इस बात की तो पुष्टि की है कि जिन मामलों के फाइल होने से राजस्व के नुकसान की आशंका हो, उन मामलों को अपील करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उन्होंने इस बात को संज्ञान में होने से इंकार किया कि इस मामले में किसी प्रकार की कोई फिक्स राशि को बेस बनाया गया है।
दरअसल ये सारा मामला बैकडोर सेटिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। तहसील कार्यालय के सूत्रों की मानें तो पिछले दो सालों में तकरीबन 137 से अधिक ऐसे मामले हैं जिनमें रजिस्ट्री या मामले में ऑडिट ऑब्जेक्शन आने के बाद एसडीएम कोर्ट में मामले को फाइल कर दिया गया। जबकि उन मामलों में अपील करने पर राजस्व को बढ़ाना ना सही तो बचाया जरुर जा सकता था। मसलन रजिस्ट्री नंबर 1969, 2404, 3284, 5876, 366 , 454 में मामले एसडीएम कोर्ट ने फाइल कर दिए हैं। जबकि इनके राजस्व राशि लाखों में थी। लेकिन इनकी अपील ही नहीं की गई। ऐसे अनेकों और मामले हैं।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीसी की ओर से जारी आदेशों में ये कहा गया है कि दस हजार से अधिक मामलों में अगर जरूरत हो तो अपील अवश्य की जाए। लेकिन जिन 137 फाइल किए मामलों की बात यहां की जा रही है, उसमें तकरीबन 29 के करीब ऐसे मामले थे जिसमें राजस्व राशि लाखों में थी। कुल 9 मामलों में तो राजस्व अमाऊंट पांच लाख भी था। ऐसे में फाइल करने के बावजूद उन मामलों को अपील में नहीं डालना अपने आप में बड़े सवाल खड़े करता है।
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तहसील मामलों पर एसडीएम कोर्ट में होती है सुनवाई, इसके बाद कमिश्नर कोर्ट में अपील
जिले की सभी तहसीलों में होने वाली रजिस्ट्रियों पर अगर ऑडिट विभाग कोई ऐतराज जताता है तो ऐसे मामलों की सुनवाई एसडीएम कोर्ट के मार्फत होती है। एसडीएम कोर्ट में लोगों एवं विभाग की सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट अपना फैसला सुना देती है। अगर फैसला विभाग के पक्ष में आता है तो फैसले की एक प्रति रिकार्ड के लिए और दूसरी प्रति तहसीलदार कार्यालय में भेजी जाती है कि वो राजस्व की रिकवरी करवाकर कोर्ट को सूचित करें। इसके अलावा जिन मामलों को फाइल कर दिया जाता है, उसके आदेश की भी एक प्रति तहसीलदार कार्यालय को भेजी जाती है। तहसील विभाग ऐसे फैसलों की प्रति को रजिस्ट्री के रिकार्ड के साथ लगा देता है ताकि भविष्य में इस फैसले के आधार पर अपनी गर्दन बचा सकें। जबकि होना ये चाहिए कि तहसील या राजस्व विभाग इन फाइल हो चुके मामलों को दोबारा से जांचे और अगर जरूरी लगे तो जिला मुख्यालय पर प्रतिमाह लगने वाली कमिश्रर कोर्ट में एसडीएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। लेकिन यहीं पर असल झोल है। एसडीएम कोर्ट से फाइल होने के बाद मामलों को कमिश्रर कोर्ट में अपील के लिए भेजा ही नहीं जाता। यहां पर अक्सर अधिकारियों पर कथित रुप से मिलीभगत के आरोप लगते हैं।
न्यायिक केसों की तरह राजस्व केसों में भी रिव्यू किया जाना चाहिए कि अगर संबंधित कोर्ट ने फैसला सही नहीं दिया है और इससे सरकार को राजस्व का नुक्सान हो रहा है तो इस फैसलों के खिलाफ अपील अवश्य करनी चाहिए। ऐसे केसों की रिव्यू कर अपील करने के आदेश जारी किए थे , लेकिन वैसे मुझे ये ध्यान नहीं है कि मैने इस संदर्भ में कोई न्यूनतम अमाऊंट भी तय की थी।
हरदीप सिंह, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद ।
इस संदर्भ में सभी तहसीलदारों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे उन केसों की अपील जरूर करें जिसमें उन्हें लगता हो कि सरकार को राजस्व मिल सकता है या राजस्व बचाया जा सकता है।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद ।