{"_id":"59c404344f1c1bb0688b5b9b","slug":"41506018356-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेटेलाइट से होगी फसल अवशेष जलाने वालों की पहचान : डीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेटेलाइट से होगी फसल अवशेष जलाने वालों की पहचान : डीसी
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
प्रदेश में जल्द ही बॉयोमास नीति को लागू किया जाएगा। इस नीति के क्रियान्वयन के बाद भूसे व पराली जैसे कृषि अवशेषों से ऊर्जा का तो उत्पादन होगा ही साथ ही किसानों की ओर से इन्हें जलाने के कारण से पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान से भी निजात मिलेगी। प्रदेश के सभी उपायुक्तों, कृषि व किसान कल्याण विभाग, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में हरियाणा के मुख्य सचिव डी एस ढेसी ने यह जानकारी दी। उन्होंने सख्त हिदायत जारी करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी खरीफ मौसम के दौरान यह सुनिश्चित करें कि किसान फसलों के अवशेषों को न जलाएं ताकि पिछले वर्ष हरियाणा व दिल्ली एनसीआर में फैले स्मॉग जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी विशेष अभियान चलाकर किसानों अवशेषों न जलाने के लिए प्रेरित करें।
मुख्य सचिव की ओर से सिरसा व फतेहाबाद जिलों में ज्यादा एहतियात बरतने के निर्देशों पर डीसी डॉ हरदीप सिंह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जुटाई गई जानकारी के अनुसार ज्यादा कृषि अवशेष जलाने वाले गांवों की पहचान की गई है और लगभग 200 किसानों को नोटिस भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने अवगत करवाया की जो ग्राम पंचायतें कृषि अवशेष न जलाने में सहयोग करेंगी उन्हें प्रशासन सम्मानित करेगा। इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के लिए ग्राम पंचायतों को उत्तरदायी भी बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों से पराली व धान के अवशेषों को जलाने के मामलों में असफल रहने वाले एडीओ, पटवारियों और ग्राम सचिवों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी।
विज्ञापन
फतेहाबाद।
प्रदेश में जल्द ही बॉयोमास नीति को लागू किया जाएगा। इस नीति के क्रियान्वयन के बाद भूसे व पराली जैसे कृषि अवशेषों से ऊर्जा का तो उत्पादन होगा ही साथ ही किसानों की ओर से इन्हें जलाने के कारण से पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान से भी निजात मिलेगी। प्रदेश के सभी उपायुक्तों, कृषि व किसान कल्याण विभाग, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में हरियाणा के मुख्य सचिव डी एस ढेसी ने यह जानकारी दी। उन्होंने सख्त हिदायत जारी करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी खरीफ मौसम के दौरान यह सुनिश्चित करें कि किसान फसलों के अवशेषों को न जलाएं ताकि पिछले वर्ष हरियाणा व दिल्ली एनसीआर में फैले स्मॉग जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी विशेष अभियान चलाकर किसानों अवशेषों न जलाने के लिए प्रेरित करें।
मुख्य सचिव की ओर से सिरसा व फतेहाबाद जिलों में ज्यादा एहतियात बरतने के निर्देशों पर डीसी डॉ हरदीप सिंह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जुटाई गई जानकारी के अनुसार ज्यादा कृषि अवशेष जलाने वाले गांवों की पहचान की गई है और लगभग 200 किसानों को नोटिस भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने अवगत करवाया की जो ग्राम पंचायतें कृषि अवशेष न जलाने में सहयोग करेंगी उन्हें प्रशासन सम्मानित करेगा। इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के लिए ग्राम पंचायतों को उत्तरदायी भी बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों से पराली व धान के अवशेषों को जलाने के मामलों में असफल रहने वाले एडीओ, पटवारियों और ग्राम सचिवों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी।
विज्ञापन