{"_id":"5a2ad7154f1c1b8d698c07ef","slug":"181512757013-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक साल में दो जवान बेटों को गवां चुकी मां तीन घंटे बैठी रही सीएम के दरवाजे पर लेकिन नहीं मिला समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक साल में दो जवान बेटों को गवां चुकी मां तीन घंटे बैठी रही सीएम के दरवाजे पर लेकिन नहीं मिला समय
Updated Fri, 08 Dec 2017 11:46 PM IST
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अमित रूखाया
फतेहाबाद।
सीएम मनोहर लाल का खुला दरबार शुक्रवार को कइयों के चेहरे पर खुशी देकर गया तो अनेक लोगों के चेहरे पर अपनी बात ना रख पाने की उदासी भी दे गया। शाम 3 बजे से पांच बजे तक जनता दरबार में रखी गई 478 शिकायतों में से मुख्यमंत्री महज 80 के करीब ही शिकायतें सुन सके। बाकी बचे 398 लोगों में अनेक ऐसे थे जो बड़ी उम्मीद के साथ सीएम से मिलने पहुंचे थे ।
एक साल में दो जवान बेटों को गवां चुकी मां भी बैठी रही सीएम के बुलावे के इंतजार में
उकलाना के गांव हांसेवाला निवासी केलादेवी तकरीबन पौने दो घंटे का सफर तय कर और तकरीबन चार घंटे के इंतजार के बावजूद सीएम मनोहर लाल के सामने अपने दो जवान बेटों की हत्या का दर्द बयां नहीं कर सकी। केला देवी ने 'अमर उजाला' से अपने दिल का दर्द बयां करते हुए बताया कि उसके एक बेटे सतीश को मार्च माह में किसी ने मार डाला था और दूसरे बेटे प्यारे लाल का भी 15 अगस्त 2017 को मर्डर कर दिया गया है। लेकिन दोनों बेटों की मौत मामले में पुलिस अभी तक ना तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर रही है और ना ही सीधे मुंह जवाब देती है। केला देवी के अनुसार वो इस मामले में खुद सीएम को भी चार बार पत्र लिख चुकी है लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
सीएम विंडो में डेढ़ सौ शिकायतें देने वाले गाजूवाला के दलबीर भी चूके सीएम से मुलाकात
गाजूवाला के रहने वाले दलबीर सिहाग को टोहाना सीएम विंडो कार्यालय में सभी पहचानते हैं। वजह है सीएम विंडो में दलबीर अब तक डेढ़ सौ के करीब शिकायतें दे चुके हैं। सीएम विंडो पर कुछ शिकायतों को बिना उन्हें बताये फाइल करने के विरोध में दलबीर शुक्रवार को सीएम से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन तीन घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें समय नहीं मिल सका। दलबीर को टोकन नंबर 390 अलाट हुआ था। लेकिन सीएम ने 80 नंबर के आगे सुनवाई ही नहीं की। दलबीर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संदर्भ में पत्र लिखेंगे।
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सेना के पूर्व कैप्टन अपने साथ हुए अपमान को पहुंचाना चाहते थे सीएम तक, नहीं हुए सफल
भूना निवासी सेना के पूर्व कैप्टन बालम सिंह भी सीएम से मिलने वालों की कतार में शामिल थे, लेकिन उन लोगों में शुमार नहीं हो सके जिन्हें सीएम के सामने अपनी समस्या रखने का मौका मिला था। बालम सिंह की शिकायत रोडवेज अधिकारियों से थी जिन्हें वो सीएम के सामने रखना चाहते थे। दरअसल पिछले दिनों रोडवेज अधिकारियों ने उनके साथ बदतमीजी की थी। उनकी मानें तो बालम सिंह ने उन्हें बताया था कि वो सेना का पूर्व अधिकारी है, लेकिन ये सुनने के बाद भी रोडवेज अधिकारियों की बदतमीजी रुकी नहीं।
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फतेहाबाद।
सीएम मनोहर लाल का खुला दरबार शुक्रवार को कइयों के चेहरे पर खुशी देकर गया तो अनेक लोगों के चेहरे पर अपनी बात ना रख पाने की उदासी भी दे गया। शाम 3 बजे से पांच बजे तक जनता दरबार में रखी गई 478 शिकायतों में से मुख्यमंत्री महज 80 के करीब ही शिकायतें सुन सके। बाकी बचे 398 लोगों में अनेक ऐसे थे जो बड़ी उम्मीद के साथ सीएम से मिलने पहुंचे थे ।
एक साल में दो जवान बेटों को गवां चुकी मां भी बैठी रही सीएम के बुलावे के इंतजार में
उकलाना के गांव हांसेवाला निवासी केलादेवी तकरीबन पौने दो घंटे का सफर तय कर और तकरीबन चार घंटे के इंतजार के बावजूद सीएम मनोहर लाल के सामने अपने दो जवान बेटों की हत्या का दर्द बयां नहीं कर सकी। केला देवी ने 'अमर उजाला' से अपने दिल का दर्द बयां करते हुए बताया कि उसके एक बेटे सतीश को मार्च माह में किसी ने मार डाला था और दूसरे बेटे प्यारे लाल का भी 15 अगस्त 2017 को मर्डर कर दिया गया है। लेकिन दोनों बेटों की मौत मामले में पुलिस अभी तक ना तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर रही है और ना ही सीधे मुंह जवाब देती है। केला देवी के अनुसार वो इस मामले में खुद सीएम को भी चार बार पत्र लिख चुकी है लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
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सीएम विंडो में डेढ़ सौ शिकायतें देने वाले गाजूवाला के दलबीर भी चूके सीएम से मुलाकात
गाजूवाला के रहने वाले दलबीर सिहाग को टोहाना सीएम विंडो कार्यालय में सभी पहचानते हैं। वजह है सीएम विंडो में दलबीर अब तक डेढ़ सौ के करीब शिकायतें दे चुके हैं। सीएम विंडो पर कुछ शिकायतों को बिना उन्हें बताये फाइल करने के विरोध में दलबीर शुक्रवार को सीएम से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन तीन घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें समय नहीं मिल सका। दलबीर को टोकन नंबर 390 अलाट हुआ था। लेकिन सीएम ने 80 नंबर के आगे सुनवाई ही नहीं की। दलबीर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संदर्भ में पत्र लिखेंगे।
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सेना के पूर्व कैप्टन अपने साथ हुए अपमान को पहुंचाना चाहते थे सीएम तक, नहीं हुए सफल
भूना निवासी सेना के पूर्व कैप्टन बालम सिंह भी सीएम से मिलने वालों की कतार में शामिल थे, लेकिन उन लोगों में शुमार नहीं हो सके जिन्हें सीएम के सामने अपनी समस्या रखने का मौका मिला था। बालम सिंह की शिकायत रोडवेज अधिकारियों से थी जिन्हें वो सीएम के सामने रखना चाहते थे। दरअसल पिछले दिनों रोडवेज अधिकारियों ने उनके साथ बदतमीजी की थी। उनकी मानें तो बालम सिंह ने उन्हें बताया था कि वो सेना का पूर्व अधिकारी है, लेकिन ये सुनने के बाद भी रोडवेज अधिकारियों की बदतमीजी रुकी नहीं।