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नप बजट बैठक : साढ़े 12 करोड़ की होगी आय, सवा 9 करोड़ जाएंगे अफसरों-कर्मियों की सैलरी में
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नप बजट बैठक : साढ़े 12 करोड़ की होगी आय, सवा 9 करोड़ जाएंगे अफसरों-कर्मियों की सैलरी में
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पांच माह बाद हुई नगर परिषद की बजट बैठक में आचार संहिता के चलते कोई बड़ा ऐलान तो नहीं हो सका, लेकिन इसके बावजूद पार्षदों की समस्याओं के चलते ये बैठक पूरी तरह हंगामेदार रही। जैसी आशंका थी कि आचार संहिता लगी तो नप प्रशासन या पार्षद किसी नए प्रस्ताव या टेंडर पास नहीं करवा सकेंगे, कमोबेश हुआ भी कुछ ऐसा ही। आचार संहिता के चलते नप प्रशासन ने बैठक के एजेंडे में सिर्फ बजट को ही रखा गया। इस बैठक में कई बार अधिकारियों व पार्षदों के बीच जमकर बहसबाजी भी हुई।
साल भर का बजट पेश : 12.69 करोड़ की आएगी इनकम, 12.23 करोड़ नगर परिषद करेगी खर्च
इसी बैठक के दौरान नगर परिषद का साल 2019-20 के लिए बजट भी पेश किया गया। नगर परिषद ईओ जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि नगर परिषद प्रशासन को इस साल 12 करोड़ 69 लाख की आय की उम्मीद है जबकि इस साल उनका प्रस्तावित खर्च लगभग 12 करोड़ 23 लाख रुपये होगा। इसके अलावा नप प्रशासन के पास पिछले साल के 2 करोड़ 64 लाख रुपये का ओपनिंग बैलेंस भी हैं। आय का मुख्य स्रोतों में हाउस टैक्स, दुकानों का किराया, स्टैंप ड्यूटी, विकास शुल्क, बैंकों में पड़ी रकम का ब्याज आदि प्रमुख होंगी जबकि खर्च में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, दमकल विभाग, लाइब्रेरी, सफाई व्यवस्था, सैलरी आदि प्रमुख है।
बैंक म्यूटेशन से ईओ के इंकार पर भड़के पार्षद, टुटेजा, गर्ग ने सुनाई खरी-खरी
नगर परिषद बैठक के दौरान पार्षद प्रतिनिधि दीपू टुटेजा ने बैंक म्यूटेशन पर नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर ना करने का मसला उठाया। जिस पर ईओ जितेंद्र सिंह ने साफ इनकार कर दिया। इस पर पार्षद प्रतिनिधि दीपू टुटेजा एवं अनिल गर्ग भड़क उठे। उन्होंने कहा कि पहले भी नगर परिषद में बैंक म्यूटेशन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर होते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। जिसके कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके बाद ईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुबह सभी बैंकों को पत्र लिखकर निर्देश दे दें कि जिस बैंक का हाउस टैक्स बकाया है, उन बैंकों का कोई म्यूटेशन साइन नहीं किया जाएगा। इसी तरह पार्षद राजेश जांगड़ा ने वार्ड नंबर 25 में असेसमेंट ना होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों पर टेबल के नीचे से असेसमेंट पास करने का भी आरोप लगाया।
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मिसलेन्यिस खर्च में शामिल दो करोड़ का वजीर जाखड़ ने मांगा हिसाब, हुई बहस
नगर परिषद अधिकारियों ने बजट बैठक के दौरान मिसलेन्यिस रुपये डाले। इस दो करोड़ के खर्च पर पार्षद वजीर जाखड़ ने सवाल उठाए। उन्होंने इसके चलते नप अधिकारियों को बजट तक पूरा नहीं पढ़ने दिया जिसके कारण नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल व अधिकारियों की पार्षद वजीर जाखड़ से तीखी बहसबाजी भी हुई। बाद में कुछ और पार्षदों की मध्यस्थता के बाद ये मामला ठंडा हुआ।
नगर परिषद की आय के मुख्य स्रोत
स्रोत संभावित आय
प्रोपर्टी टैक्स 1.50 करोड़
किराया 1.10 करोड़
स्टांप ड्यूटी 3 करोड़
डेवलेपमेंट 1.20 करोड़
एक्साइज ड्यूटी 2.80 करोड़
डिपोजिट 1.50 करोड़
यहां सबसे अधिक संभावित खर्च
मद संभावित खर्च रकम
कर्मचारियों की सैलरी 9.24 करोड़
विभिन्न खर्च (सभी मद) 2 करोड़
मेंटिनेंस 76.50 लाख
रिपेयरिंग-नया 23 लाख
ये कैसा महिला सशक्तीकरण
प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम के तहत जनप्रतिनिधि के तौर पर महिलाओं को आगे लाने के प्रयास कर रही है। इसके तहत नगर परिषद में बकायदा महिला आरक्षित सीटें तय की गई थी जिनपर महिला पार्षद चुनकर भी आ गई। लेकिन मंगलवार को नगर परिषद की बैठक में केंद्र व प्रदेश सरकार के महिला सशक्तीकरण के दावे हवा में उड़ते दिखाई दिए जब एक-दो नहीं बल्कि चार-पांच महिला पार्षदों के पति ना केवल बैठक में मौजूद रहे बल्कि पूरे जोर-शोर से वार्ड के मुद्दे भी उठाए जबकि उनकी पार्षद पत्नियां बैठक में चुपचाप बैठी रही।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पांच माह बाद हुई नगर परिषद की बजट बैठक में आचार संहिता के चलते कोई बड़ा ऐलान तो नहीं हो सका, लेकिन इसके बावजूद पार्षदों की समस्याओं के चलते ये बैठक पूरी तरह हंगामेदार रही। जैसी आशंका थी कि आचार संहिता लगी तो नप प्रशासन या पार्षद किसी नए प्रस्ताव या टेंडर पास नहीं करवा सकेंगे, कमोबेश हुआ भी कुछ ऐसा ही। आचार संहिता के चलते नप प्रशासन ने बैठक के एजेंडे में सिर्फ बजट को ही रखा गया। इस बैठक में कई बार अधिकारियों व पार्षदों के बीच जमकर बहसबाजी भी हुई।
साल भर का बजट पेश : 12.69 करोड़ की आएगी इनकम, 12.23 करोड़ नगर परिषद करेगी खर्च
इसी बैठक के दौरान नगर परिषद का साल 2019-20 के लिए बजट भी पेश किया गया। नगर परिषद ईओ जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि नगर परिषद प्रशासन को इस साल 12 करोड़ 69 लाख की आय की उम्मीद है जबकि इस साल उनका प्रस्तावित खर्च लगभग 12 करोड़ 23 लाख रुपये होगा। इसके अलावा नप प्रशासन के पास पिछले साल के 2 करोड़ 64 लाख रुपये का ओपनिंग बैलेंस भी हैं। आय का मुख्य स्रोतों में हाउस टैक्स, दुकानों का किराया, स्टैंप ड्यूटी, विकास शुल्क, बैंकों में पड़ी रकम का ब्याज आदि प्रमुख होंगी जबकि खर्च में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, दमकल विभाग, लाइब्रेरी, सफाई व्यवस्था, सैलरी आदि प्रमुख है।
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बैंक म्यूटेशन से ईओ के इंकार पर भड़के पार्षद, टुटेजा, गर्ग ने सुनाई खरी-खरी
नगर परिषद बैठक के दौरान पार्षद प्रतिनिधि दीपू टुटेजा ने बैंक म्यूटेशन पर नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर ना करने का मसला उठाया। जिस पर ईओ जितेंद्र सिंह ने साफ इनकार कर दिया। इस पर पार्षद प्रतिनिधि दीपू टुटेजा एवं अनिल गर्ग भड़क उठे। उन्होंने कहा कि पहले भी नगर परिषद में बैंक म्यूटेशन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर होते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। जिसके कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके बाद ईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुबह सभी बैंकों को पत्र लिखकर निर्देश दे दें कि जिस बैंक का हाउस टैक्स बकाया है, उन बैंकों का कोई म्यूटेशन साइन नहीं किया जाएगा। इसी तरह पार्षद राजेश जांगड़ा ने वार्ड नंबर 25 में असेसमेंट ना होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों पर टेबल के नीचे से असेसमेंट पास करने का भी आरोप लगाया।
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मिसलेन्यिस खर्च में शामिल दो करोड़ का वजीर जाखड़ ने मांगा हिसाब, हुई बहस
नगर परिषद अधिकारियों ने बजट बैठक के दौरान मिसलेन्यिस रुपये डाले। इस दो करोड़ के खर्च पर पार्षद वजीर जाखड़ ने सवाल उठाए। उन्होंने इसके चलते नप अधिकारियों को बजट तक पूरा नहीं पढ़ने दिया जिसके कारण नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल व अधिकारियों की पार्षद वजीर जाखड़ से तीखी बहसबाजी भी हुई। बाद में कुछ और पार्षदों की मध्यस्थता के बाद ये मामला ठंडा हुआ।
नगर परिषद की आय के मुख्य स्रोत
स्रोत संभावित आय
प्रोपर्टी टैक्स 1.50 करोड़
किराया 1.10 करोड़
स्टांप ड्यूटी 3 करोड़
डेवलेपमेंट 1.20 करोड़
एक्साइज ड्यूटी 2.80 करोड़
डिपोजिट 1.50 करोड़
यहां सबसे अधिक संभावित खर्च
मद संभावित खर्च रकम
कर्मचारियों की सैलरी 9.24 करोड़
विभिन्न खर्च (सभी मद) 2 करोड़
मेंटिनेंस 76.50 लाख
रिपेयरिंग-नया 23 लाख
ये कैसा महिला सशक्तीकरण
प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम के तहत जनप्रतिनिधि के तौर पर महिलाओं को आगे लाने के प्रयास कर रही है। इसके तहत नगर परिषद में बकायदा महिला आरक्षित सीटें तय की गई थी जिनपर महिला पार्षद चुनकर भी आ गई। लेकिन मंगलवार को नगर परिषद की बैठक में केंद्र व प्रदेश सरकार के महिला सशक्तीकरण के दावे हवा में उड़ते दिखाई दिए जब एक-दो नहीं बल्कि चार-पांच महिला पार्षदों के पति ना केवल बैठक में मौजूद रहे बल्कि पूरे जोर-शोर से वार्ड के मुद्दे भी उठाए जबकि उनकी पार्षद पत्नियां बैठक में चुपचाप बैठी रही।