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सत्संग श्रवण और पूजा पाठ जीवन को निर्दोष बनाने के लिए है: दिव्यानंद जी महाराज
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। यह जन्म और जीवन सुधर जाए तो समझ लो सबकुछ प्राप्त हो गया। मरने के बाद क्या मिलेगा, क्या नहीं मिलेगा, यह आगे भविष्य की बातें हैं। यह बातें श्री कृष्ण सेवा समिति फतेहाबाद में वार्षिकोत्सव में आयोजित श्री रामकथा के दूसरे दिन गीता ज्ञानेश्वर डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कही।
शिव भक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गीता जी में श्री कृष्ण अर्जुन को सत्संग के परम लाभ के रूप में उस अवस्था प्राप्ति की चर्चा कर रहे हैं, जिस अवस्था को प्राप्त कर फिर किसी भी अनुकूल प्रतिकूल परिस्थिति में मानव मन बुद्धि विक्षिप्त नहीं होती। उन्होंने कहा की आज धर्म जगत में इसे दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिए कि पूजा पाठ, उपासना, आराधना को लोगों ने केवल एक पूजा की थाली तक या फिर देव भूमि तक समेट कर रख दिया है। कारण एक स्पष्ट दिखाई देता है कि हम लोगों ने मूल वैदिक ग्रंथ पढ़े नहीं और अधिकांश उन्होंने भी नहीं पढ़े, जो हमें अध्यात्म का उपदेश दे रहे हैं। जिन विद्वान महापुरुषों ने भली प्रकार से इनका स्वाध्याय किया है, समाज उनको कम महत्व देता है। कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष टेकचंद मिढ़ा, शीलावंती टुटेजा, भीमसेन आनंद, अजय मेहता, नरेश सरदाना, सुभाष आहुजा, पं. चरणजीत शर्मा, मदन लाल ने भी भाग लिया और अभिषेक किया।
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फतेहाबाद। यह जन्म और जीवन सुधर जाए तो समझ लो सबकुछ प्राप्त हो गया। मरने के बाद क्या मिलेगा, क्या नहीं मिलेगा, यह आगे भविष्य की बातें हैं। यह बातें श्री कृष्ण सेवा समिति फतेहाबाद में वार्षिकोत्सव में आयोजित श्री रामकथा के दूसरे दिन गीता ज्ञानेश्वर डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कही।
शिव भक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गीता जी में श्री कृष्ण अर्जुन को सत्संग के परम लाभ के रूप में उस अवस्था प्राप्ति की चर्चा कर रहे हैं, जिस अवस्था को प्राप्त कर फिर किसी भी अनुकूल प्रतिकूल परिस्थिति में मानव मन बुद्धि विक्षिप्त नहीं होती। उन्होंने कहा की आज धर्म जगत में इसे दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिए कि पूजा पाठ, उपासना, आराधना को लोगों ने केवल एक पूजा की थाली तक या फिर देव भूमि तक समेट कर रख दिया है। कारण एक स्पष्ट दिखाई देता है कि हम लोगों ने मूल वैदिक ग्रंथ पढ़े नहीं और अधिकांश उन्होंने भी नहीं पढ़े, जो हमें अध्यात्म का उपदेश दे रहे हैं। जिन विद्वान महापुरुषों ने भली प्रकार से इनका स्वाध्याय किया है, समाज उनको कम महत्व देता है। कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष टेकचंद मिढ़ा, शीलावंती टुटेजा, भीमसेन आनंद, अजय मेहता, नरेश सरदाना, सुभाष आहुजा, पं. चरणजीत शर्मा, मदन लाल ने भी भाग लिया और अभिषेक किया।
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