नारनौल: बिमला मर्डर केस में गैंगस्टर पपला गुर्जर को उम्रकैद, छह साल बाद मिला परिवार को इंसाफ
नारनौल के बहुचर्चित खैरोली निवासी बिमला हत्याकांड में मंगलवार को फैसला आ गया। कोर्ट ने दोषी पपला गुर्जर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उसे सोमवार को दोषी करार दिया गया था। हत्यारा गुर्जर महिला सहित उसके परिवार के चार लोगों की जान ले चुका है। इतना ही नहीं, उसके साथी उसे दो बार पुलिस की हिरासत से छुड़वा चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा एवं राजस्थान का मोस्ट वाटेंड गैंगेस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को कोर्ट ने बिमला मर्डर केस में उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पपला को सुबह 11.15 पूरी सुरक्षा में कोर्ट में लाया गया था। लगभग 12 बजे उसको जज के सामने पेश किया गया।
इस दौरान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अजय चौधरी ने न्यायाधीश सुधीर जीवन के समक्ष फांसी की दलील दी। उन्होंने इस पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसले का हवाला भी देते हुए विरलत से विरल केस बताया लेकिन न्यायाधीश ने इस सामान्य केस मानते हुए विक्रम उर्फ पपला को उम्र कैद की सजा सुनाई है। वहीं पपला गुर्जर के अधिवक्ता कुलदीप भरगड़ ने कहा कि वो हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इससे पहले इसी मामले के छह आरोपी बरी हो चुके हैं। कोर्ट ने उसे भौंडसी जेल के आदेश दिए थे लेकिन नारनौल पुलिस ने एक मामले में भगोड़ा होने पर प्रोडक्शन वारंट पर लिया है।
ये भी पढ़ें-हिसार: पिता ने ज्योति को बॉक्सर बनाना चाहा तो पड़ोसी मारने लगे ताने, आज जीत रहीं मेडल, पति भी मिला कोच-खुद दे रहा ट्रेनिंग
बता दें कि गांव खैरोली निवासी बिमला मर्डर केस में एडिशनल सेशन जज सुधीर जीवन ने आरोपी विक्रम उर्फ पपला को दोषी करार दिया था। मंगलवार को उसको सजा सुनानी थी। पपला को सुबह 11.15 बजे कोर्ट के मुख्य गेट से पूरी पुलिस सुरक्षा के अंदर पुलिस वैन में लाया गया। कोर्ट में भी चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात था। कोर्ट नंबर 3 में न्यायाधीश बैठ गए थे और 12 बजे विक्रम उर्फ पपला को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान लगभग आधे घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच सजा के लिए बहस चली। बाद में दोनों अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई।
फांसी की दी थी दलील
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय चौधरी ने न्यायाधीश के समक्ष दोषी विक्रम उर्फ पपला की सजा के लिए फांसी की सजा की दलील दी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या भी इसी तरह हुई थी। उन पर 30 गोलियां चलाई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उस केस को विरलतम से विरल केस माना था और दोषियान को फांसी की सजा सुनाई थी। उसी प्रकार विमला भी अपने घर सो रही थी जिस पर दोषी विक्रम ने उस पर 23 गोलियां चलाई थीं। कुल छह गोलियां लगी थी जिसमें चार गोलियां उसके प्राइवेट पार्ट के आसपास मारी थी। वहीं विपक्षी अधिवक्ता कुलदीप भरगड़ ने दलील का इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विरलतम से विरल केस न होकर सामान्य केस है। न्यायाधीश ने सामान्य केस मानकर सजा सुनाई।
सजा के बाद पपला के चेहरे पर नहीं दिखी सिकन
कोर्ट द्वारा विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद उसके चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं थी। सजा सुनाने के बाद उसने एक बार न्यायाधीश से कहा कि मेरे बूढ़े मां-बाप हैं। परिवार का अकेला कमाने वाला हूं। मेरे ऊपर रहम किया जाया। इसके अलावा उसने न्यायाधीश के समक्ष कुछ नहीं कहा। जब पुलिस उसको ले जा रही थी तब भी चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी। उसके चेहरे पर सजा को कोई प्रभाव नहीं दिखा।
ये भी पढ़ें-हरियाणा: अधिक बारिश से गिरी धान की फसल, बासमती चावल के काला पड़ने की आशंका, निर्यात होगा प्रभावित
राजीनामा नहीं करना चाहती थी बिमला
बिमला राजीनामे के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। बाद में विक्रम उर्फ पपला ने बिमला को खत्म करने का ही फैसला लिया। 21 अगस्त 2015 की रात बिमला अपने घर पर सो रही थी। उस रात विक्रम उर्फ पपला गुर्जर एवं उसके साथियों ने बिमला पर अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी थी। बिमला को 23 गोलियां लगी थी। बाद में विक्रम उर्फ पपला ने नवंबर 2015 में बिमला के पिता श्रीराम निवासी बिहारीपुर नांगल चौधरी की भी हत्या कर दी।
आजकी बिमला मर्डर केस में न्यायाधीश ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। हमने फांसी की दलील की थी लेकिन न्यायाधीश ने सामान्य केस मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दस हजार रुपये का जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा होगी।-अजय चौधरी, अधिवक्ता, पीड़ित पक्ष
कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन इस मामले में साढ़े तीन वर्ष पहले कोर्ट ने छह आरोपियों को बरी कर दिया था। इसलिए हम आगे हाईकोर्ट में अपील करेंगे। -कुलदीप भरगड़, अधिवक्ता, विक्रम उर्फ पपला पक्ष।
भगवान के घर देर हैं अंधेर नहीं। छह वर्ष बाद हमें न्याय मिला है। हम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं लेकिन हम फांसी चाहते थे। कोर्ट के फैसले का हम अध्ययन करेंगे। अगर हमें कहीं कुछ कमी मिली तो उसके बाद फांसी के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे।-राकेश कुमार, मृतक बिमला का बेटा।