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हिसार: पिता ने ज्योति को बॉक्सर बनाना चाहा तो पड़ोसी मारने लगे ताने, आज जीत रहीं मेडल, पति भी मिला कोच-खुद दे रहा ट्रेनिंग

Tue, 26 Oct 2021 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अश्वनी कुमार, अमर उजाला, हिसार
अश्वनी कुमार, अमर उजाला, हिसार Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 26 Oct 2021 01:15 AM IST
सार

भिवानी की बेटी की भी अजब कहानी है। सेवानिवृत्त फौजी ने उसे बॉक्सर बनाने की ठानी, तो आसपास के लोग ताने देने लगे। शादी तक कर डालने की सलाह दे दी। लेकिन पिता के हौसले ने उसे बॉक्सर बना दिया। भिवानी के गांव बामला की रहने वाली ज्योति को पति भी बॉक्सिंग कोच मिल गया। अब वे कई प्रतियोगिताओं में दम दिखा चुकी हैं।

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Bhiwanis Bamla villages daughter Jyoti showing strength in boxing competition in Hisar
हिसार पहुंचीं बॉक्सर ज्योति ग्रेवाल को प्रैक्टिस करवाते कोच। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सात साल पहले भिवानी के बामला गांव की रहने वाली ज्योति ग्रेवाल को पिता ने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देनी शुरू की। इस पर पड़ासियों ने ताने मारने शुरू कर दिए। पिता ने खूब ताने सहने के बावजूद बेटी को बॉक्सर बनाने का संघर्ष जारी रखा और किसी की नहीं सुनी। खास बात है कि अब शादी के बाद ज्योति को पति भी बॉक्सिंग कोच मिल गए। अब पति नवीन उर्फ फ्रूटी बलहारा खुद ज्योति को ट्रेनिंग दे रहे हैं। ज्योति हिसार में चल रही राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता के 66 किलो भार वर्ग में हिस्सा लेने के लिए पहुंची हैं।

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पति साथ में प्रैक्टिस करवा रहे हैं
साथ में उनके पति व कोच नवीन भी आए हुए हैं और यहां पर भी अभ्यास करवा रहे हैं। ज्योति दिल्ली रेलवे में तीन साल से सीनियर क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, पति अजीत बॉक्सिंग क्लब में उनको अभ्यास करवाते हैं। बॉक्सर ज्योति बताती हैं कि जब पिता शेर सिंह ने उन्हें गांव में ट्रेनिंग देनी शुरू की, तो पड़ोसियों व कुछ सदस्यों ने ताने मारने शुरू कर दिए। वे कहने लगे कि बॉक्सिंग में क्या रखा है। इससे अच्छा बेटी की शादी कर दो।
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परिवार ने दिया सहयोग, रिंग में उतर गईं ज्योति
मगर ज्योति को जब परिवार का सहयोग मिला, तो उनका हौसला और भी बढ़ गया और रिंग में उतर गईं। आज ज्योति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीत रही हैं। ज्योति के पिता शेर सिंह फौज से हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हैं। पहले वे खुद भी कुश्ती खेलते थे। मगर धीरे-धीरे बेटी को गांव में ही बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। जब बेटी रिंग में उतरकर पंच का दम दिखाने लगी, तो परिवार के सदस्यों ने ज्योति को खेल में ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।  

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ज्योति की प्रमुख उपलब्धियां

  • 2017 में आयरलैंड में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल।
  • 2016 में बुल्गारिया में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
  • 2016 में हरिद्वार में हुई सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक।




 

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