{"_id":"631cbda65e1f3d43ca67ea2d","slug":"permission-granted-to-catch-monkey-is-over-waiting-for-approval-again-charkhidadri-news-hsr641560832","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदर पकड़ने के लिए मिली अनुमति की मियाद खत्म, दोबारा मंजूरी का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदर पकड़ने के लिए मिली अनुमति की मियाद खत्म, दोबारा मंजूरी का इंतजार
विज्ञापन
चरखी दादरी। शहर में दोबारा बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए नगर परिषद अधिकारियों को वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अनुमति मिलने का इंतजार है। गत अगस्त माह में एक साल के अभियान के लिए पत्र वन्य प्राणी एवं जीव विभाग को भेजा गया था, लेकिन अब तक इसे अनुमति नहीं मिली है। नगर परिषद की अभियान शुरू कर एक साल में 1000 बंदर पकड़ने की योजना है।
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार एक साल पहले वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से शहर में 1500 बंदर पकड़े की अनुमति मांगी गई थी। विभाग ने इसके लिए एक साल तक अभियान चलाने को मंजूरी दी थी। इसकी समय अवधि पूरी हो चुकी है और एक साल के अंदर एजेंसी 400 ही बंदर पकड़ गई। गत वर्ष इन बंदरों को पकड़वाने पर 3.20 लाख रुपये खर्च आया था जबकि शहर में एक हजार बंदर पकड़े जाने अभी शेष है।
एजेंसी से दोबारा अभियान शुरू कराने से पहले नगर परिषद को वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अब दोबारा अनुमति लेनी पड़ेगी, क्योंकि एक साल पहले ली गई अनुमति का समय पूरा हो चुका है। बिना अनुमति के नगर परिषद अधिकारी दोबारा बंदर पकड़ो अभियान शुरू नहीं कर सकते हैं। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि करीब 20 दिन पहले औपचारिकता पूरी करने की प्रक्रिया उनके स्तर पर पूरी की जा चुकी है और अगले सप्ताह तक अभियान शुरू करने के लिए मंजूरी मिलने की संभावना है। वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अनुमति मिलते ही शहर में दोबारा से अभियान शुरू करवा दिया जाएगा।
विज्ञापन
800 रुपये आएगा एक बंदर पकड़ने पर खर्च
इस बार एक साल में एक हजार बंदर पकड़ने की अनुमति मांगी गई है। इस लिहाज से अगर एजेंसी सभी बंदरों को पकड़ती है तो नगर परिषद को इसके लिए आठ लाख का भुगतान करना पड़ेगा। प्रति बंदर करीब 800 रुपये खर्च आएगा और इसमें बंदरों को पकड़ने से लेकर खाना देने व फिर कालेसर जंगल में छोड़ने की जिम्मेदारी एजेंसी की ही है।
थानों से लेकर कोर्ट परिसर में घूमते हैं बंदरों के झुंड
इस समय बंदरों से केवल 21 वार्डों के लोग ही परेशान नहीं हैं, बल्कि बंदरों के झुंड शहर स्थित पुलिस थानों और कोर्ट परिसर में भी घूमते हैं। ये बंदर हमला करने से भी गुरेज नहीं करते। पहले भी शहर में बंदरों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं।
प्रतिदिन आ रही सात से आठ शिकायतें
नगर परिषद अधिकारियों के पास बंदरों की प्रतिदिन सात से आठ शिकायतें पहुंच रही हैं। इसके अलावा वार्डवासी अपने पार्षद के समक्ष लगातार समस्याएं बता रहे हैं। लोगों की मांग है कि शहर में बंदर पकड़ो अभियान चलाया जाए और सभी बंदरों को पकड़ा जाए।
शहर में हम जल्द ही बंदर पकड़ो अभियान शुरू करा देंगे। इसके लिए वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अनुमति मिलने का इंतजार है। अभियान शुरू कराने की तैयारियां पूरी हैं।
बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद
विज्ञापन
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार एक साल पहले वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से शहर में 1500 बंदर पकड़े की अनुमति मांगी गई थी। विभाग ने इसके लिए एक साल तक अभियान चलाने को मंजूरी दी थी। इसकी समय अवधि पूरी हो चुकी है और एक साल के अंदर एजेंसी 400 ही बंदर पकड़ गई। गत वर्ष इन बंदरों को पकड़वाने पर 3.20 लाख रुपये खर्च आया था जबकि शहर में एक हजार बंदर पकड़े जाने अभी शेष है।
विज्ञापन
एजेंसी से दोबारा अभियान शुरू कराने से पहले नगर परिषद को वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अब दोबारा अनुमति लेनी पड़ेगी, क्योंकि एक साल पहले ली गई अनुमति का समय पूरा हो चुका है। बिना अनुमति के नगर परिषद अधिकारी दोबारा बंदर पकड़ो अभियान शुरू नहीं कर सकते हैं। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि करीब 20 दिन पहले औपचारिकता पूरी करने की प्रक्रिया उनके स्तर पर पूरी की जा चुकी है और अगले सप्ताह तक अभियान शुरू करने के लिए मंजूरी मिलने की संभावना है। वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अनुमति मिलते ही शहर में दोबारा से अभियान शुरू करवा दिया जाएगा।
विज्ञापन
800 रुपये आएगा एक बंदर पकड़ने पर खर्च
इस बार एक साल में एक हजार बंदर पकड़ने की अनुमति मांगी गई है। इस लिहाज से अगर एजेंसी सभी बंदरों को पकड़ती है तो नगर परिषद को इसके लिए आठ लाख का भुगतान करना पड़ेगा। प्रति बंदर करीब 800 रुपये खर्च आएगा और इसमें बंदरों को पकड़ने से लेकर खाना देने व फिर कालेसर जंगल में छोड़ने की जिम्मेदारी एजेंसी की ही है।
थानों से लेकर कोर्ट परिसर में घूमते हैं बंदरों के झुंड
इस समय बंदरों से केवल 21 वार्डों के लोग ही परेशान नहीं हैं, बल्कि बंदरों के झुंड शहर स्थित पुलिस थानों और कोर्ट परिसर में भी घूमते हैं। ये बंदर हमला करने से भी गुरेज नहीं करते। पहले भी शहर में बंदरों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं।
प्रतिदिन आ रही सात से आठ शिकायतें
नगर परिषद अधिकारियों के पास बंदरों की प्रतिदिन सात से आठ शिकायतें पहुंच रही हैं। इसके अलावा वार्डवासी अपने पार्षद के समक्ष लगातार समस्याएं बता रहे हैं। लोगों की मांग है कि शहर में बंदर पकड़ो अभियान चलाया जाए और सभी बंदरों को पकड़ा जाए।
शहर में हम जल्द ही बंदर पकड़ो अभियान शुरू करा देंगे। इसके लिए वन्य प्राणी एवं जीव विभाग से अनुमति मिलने का इंतजार है। अभियान शुरू कराने की तैयारियां पूरी हैं।
बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद