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Charkhi Dadri News: नई कृषि विपणन नीति रद्द करने की उठाई मांग
Mon, 25 Aug 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 25 Aug 2025 01:33 AM IST
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बाढड़ा। खरीफ फसल सीजन 2023 में कपास बीमा क्लेम में घोटाले की जांच करवाने व मुआवजा की मांग के लिए संयुक्त किसान मोर्चा का अनाज मंडी में धरना 39 वें दिन भी जारी रहा। धरने की अध्यक्षता राजेश भांडवा व धर्मपाल हडौदा ने की। धरने का संचालन सत्यवीर भांडवा ने किया।
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता राजकुमार हडौदी ने कहा कि किसानों का मुआवजा बकाया है। बीमा कंपनियों की ओर से गोलमाल किया गया है।
किसान नेता ने कहा कि खेती को डब्लूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) से बाहर लाया जाए। नई कृषि विपणन नीति रद्द हो और मुक्त व्यापार समझौता रद्द किया जाए। एमएसपी की गारंटी का कानून बने। किसानों का कर्ज माफ हो। किसानों व मजदूरों को बिजली बिल से राहत मिले।
इस मौके धन सिंह, नसीब मोद, हवा सिंह, प्रताप सिंह, रमेश कुमार भांभू, राजेश कुमार भांडवा, ओमप्रकाश खोरड़ा, महीपाल कारी, नरेश कुमार, नरेश कुमार मौजूद रहे।
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अन्नदाता की उपेक्षा करना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करना है :
किसानों के धरने पर वक्ताओं ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को अनदेखा करना सहीं नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिले और नीतियां उनके हित में बनाई जाएं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि अन्नदाता की उपेक्षा करना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करना है। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
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धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता राजकुमार हडौदी ने कहा कि किसानों का मुआवजा बकाया है। बीमा कंपनियों की ओर से गोलमाल किया गया है।
किसान नेता ने कहा कि खेती को डब्लूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) से बाहर लाया जाए। नई कृषि विपणन नीति रद्द हो और मुक्त व्यापार समझौता रद्द किया जाए। एमएसपी की गारंटी का कानून बने। किसानों का कर्ज माफ हो। किसानों व मजदूरों को बिजली बिल से राहत मिले।
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इस मौके धन सिंह, नसीब मोद, हवा सिंह, प्रताप सिंह, रमेश कुमार भांभू, राजेश कुमार भांडवा, ओमप्रकाश खोरड़ा, महीपाल कारी, नरेश कुमार, नरेश कुमार मौजूद रहे।
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अन्नदाता की उपेक्षा करना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करना है :
किसानों के धरने पर वक्ताओं ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को अनदेखा करना सहीं नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिले और नीतियां उनके हित में बनाई जाएं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि अन्नदाता की उपेक्षा करना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करना है। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।