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Charkhi Dadri News: जिले में मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर 1.35 एकड़ फसल का डाटा मिलान लंबित
Mon, 28 Sep 2026 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 28 Sep 2026 01:44 AM IST
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खेत में तिल की फसल।
चरखी दादरी। जिले में मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर एक लाख 35 हजार एकड़ फसल के डाटा का मिलान अभी तक नहीं हुआ है। विभाग ने अब तक 48 हजार 524 एकड़ फसल का मिलान पूरा कर लिया है। विभाग दो दिन में यह डाटा मिलान कार्य पूरा करने का दावा कर रहा है। इस काम में 130 पटवारी और 26 कृषि विभाग के एडीओ सहित अन्य कर्मचारी लगे हुए हैं।
मौके से फसल की जीपीएस फोटो पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इस प्रक्रिया में सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी और पटवारी की रिपोर्ट का मिलान किया जा रहा है। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। वहीं, खरीफ सीजन में बिजाई का आंकड़ा दो लाख 61 हजार एकड़ है।
सरकार यह जानना चाहती है कि खेत में वास्तव में फसल की बिजाई हुई है। या फिर खेत खाली पड़ा है अथवा जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य कार्य के लिए किया जा रहा है। इसके तहत खेत-खेत जाकर फसल की स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है। सर्वे के दौरान पोर्टल पर दर्ज फसल और मौके पर खड़ी फसल का मिलान किया जाता है। इससे फसल पंजीकरण में किसी गड़बड़ी या अंतर को ठीक किया जाता है।
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फसल का सही पंजीकरण करवाना बहुत जरूरी
जिले में अब तक खरीफ सीजन के दौरान दो लाख पांच हजार 18 एकड़ क्षेत्र में फसलों का पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज किया जा चुका है। मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न फसलों की सरकारी खरीद की व्यवस्था करती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल का सही पंजीकरण करवाना बहुत जरूरी है। पंजीकरण में फसल का गलत विवरण दर्ज होने पर परेशानी आती है। मौके पर फसल नहीं होने की स्थिति में भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में समस्या आती है।
धान का रकबा 19 हजार एकड़
जिले में खरीफ सीजन के दौरान बाजरा, धान, ज्वार, ग्वार, मूंग, कपास और तिलहन जैसी कई फसलों की खेती की जाती है। इनमें बाजरा प्रमुख फसल है, जो करीब एक लाख 51 हजार एकड़ क्षेत्र में बोई गई है। धान का रकबा 19 हजार एकड़ है। कपास की फसल का रकबा भी 19 हजार एकड़ है। किसानों ने ग्वार, मूंग, ज्वार और तिलहन की भी खेती कर रखी है। इन फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विभाग पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
सरकारी खरीद के लिए सही डाटा जरूरी
मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल सरकार के लिए किसानों और उनकी फसलों का रिकॉर्ड तैयार करने का एक माध्यम है। इसी डाटा के आधार पर सरकारी खरीद की जाती है। इसलिए विभाग का प्रयास है कि पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक किसान की फसल का सत्यापन हो। साथ ही, क्षेत्रफल का भी मौके पर सत्यापन किया जाए। यह सुनिश्चित करता है कि केवल वास्तविक किसानों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
फसल के डाटा का मिलान जारी है। अगले दो दिनों में डाटा का सत्यापन कर दिया जाएगा। पटवारी व कृषि विभाग के कर्मचारी इस काम में जुटे हैं।
- विनय कुमार, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग
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मौके से फसल की जीपीएस फोटो पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इस प्रक्रिया में सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी और पटवारी की रिपोर्ट का मिलान किया जा रहा है। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। वहीं, खरीफ सीजन में बिजाई का आंकड़ा दो लाख 61 हजार एकड़ है।
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सरकार यह जानना चाहती है कि खेत में वास्तव में फसल की बिजाई हुई है। या फिर खेत खाली पड़ा है अथवा जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य कार्य के लिए किया जा रहा है। इसके तहत खेत-खेत जाकर फसल की स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है। सर्वे के दौरान पोर्टल पर दर्ज फसल और मौके पर खड़ी फसल का मिलान किया जाता है। इससे फसल पंजीकरण में किसी गड़बड़ी या अंतर को ठीक किया जाता है।
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फसल का सही पंजीकरण करवाना बहुत जरूरी
जिले में अब तक खरीफ सीजन के दौरान दो लाख पांच हजार 18 एकड़ क्षेत्र में फसलों का पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज किया जा चुका है। मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न फसलों की सरकारी खरीद की व्यवस्था करती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल का सही पंजीकरण करवाना बहुत जरूरी है। पंजीकरण में फसल का गलत विवरण दर्ज होने पर परेशानी आती है। मौके पर फसल नहीं होने की स्थिति में भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में समस्या आती है।
धान का रकबा 19 हजार एकड़
जिले में खरीफ सीजन के दौरान बाजरा, धान, ज्वार, ग्वार, मूंग, कपास और तिलहन जैसी कई फसलों की खेती की जाती है। इनमें बाजरा प्रमुख फसल है, जो करीब एक लाख 51 हजार एकड़ क्षेत्र में बोई गई है। धान का रकबा 19 हजार एकड़ है। कपास की फसल का रकबा भी 19 हजार एकड़ है। किसानों ने ग्वार, मूंग, ज्वार और तिलहन की भी खेती कर रखी है। इन फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विभाग पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
सरकारी खरीद के लिए सही डाटा जरूरी
मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल सरकार के लिए किसानों और उनकी फसलों का रिकॉर्ड तैयार करने का एक माध्यम है। इसी डाटा के आधार पर सरकारी खरीद की जाती है। इसलिए विभाग का प्रयास है कि पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक किसान की फसल का सत्यापन हो। साथ ही, क्षेत्रफल का भी मौके पर सत्यापन किया जाए। यह सुनिश्चित करता है कि केवल वास्तविक किसानों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
फसल के डाटा का मिलान जारी है। अगले दो दिनों में डाटा का सत्यापन कर दिया जाएगा। पटवारी व कृषि विभाग के कर्मचारी इस काम में जुटे हैं।
- विनय कुमार, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग