फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Women empowered themselves with self help groups in Bhiwani of Haryana

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं ने थामी जागृति की मशाल, खुद और परिवार को किया सशक्त

Tue, 08 Mar 2022 01:37 AM IST
भूपेंद्र सिंह संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 08 Mar 2022 01:37 AM IST
सार

स्वयं सहायता समूह में नारी शक्ति की झलक दिखी। पंजाब में भी खूब वाहवाही लूटी। किसी ने पति को दिलाया रोजीरोटी कमाने के लिए ऑटो रिक्शा तो किसी ने पट्टे पर जमीन ले दी।

विज्ञापन
Women empowered themselves with self help groups in Bhiwani of Haryana
स्वयं सहायता समूह की बचत का रजिस्टर दिखाती सुनीता बलियाली। स्वयं सहायता समूह की बैठक में मौजूद महिलाएं अपनी बचत का हिसाब किताब आपस में सांझा करते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अगर महिला कुछ करने की ठान ले तो वह कुछ भी कर सकती है। इसी तरह का माद्दा रखने वाली कुछ महिलाओं ने अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर की। इन महिलाओं ने खुद को और अपने परिवार को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

विज्ञापन


इन महिलाओं के कदम यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने परिवार को और अधिक मजबूत बनाने में रोजी रोटी कमाने के लिए पति को ऑटो रिक्शा दिलाया तो किसी ने पट्टे पर ही जमीन ले दी। स्वयं सहायता समूह में साहसिक कदम उठाने वाली नारी शक्ति ने पंजाब तक खूब वाहवाही भी लूटी। 
विज्ञापन


 20 वर्ष से ससुर थे बैंक के डिफाल्टर, बहू सुनीता ने खुद 100 रुपये की बचत से पैसे इकट्ठे कर चुकाया कर्ज
हम यहां बात कर रहे हैं बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव बलियाली निवासी 35 वर्षीय सुनीता की। सुनीता शादी के बाद जिस घर में आई, उसमें ससुर ने बैंक से भैंस का लोन लिया था, जो कभी चुका ही नहीं पाया था। सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं थी, उसने बैंक से कर्ज लेकर कुछ करने की सोची, लेकिन बैंक पहुंचने के बाद कर्मचारियों ने बताया कि उसे लोन नहीं मिलेगा, क्योंकि पहले ससुर का लोन चुकता करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर वह काफी दुखी भी हुई, मगर हिम्मत नहीं हारी। उसने 30 मई 2013 को गांव की ऐसी दस महिलाओं का समूह बनाया, जिन्होंने खुद की परेशानियां खुद ही दूर करने की ठानी। इन महिलाओं ने शुरुआत में हर माह 100-100 रुपये की बचत करना शुरू किया। इसके बाद 200-200 रुपये बचाने लगी, फिर ये बजत 300 तक बढ़ गई।

इस तरह से इन महिलाओं ने एकत्रित हुए पैसों का एक दूसरे की मदद के लिए एक रुपया सैंकड़ा ब्याज पर खुद ही एक दूसरे को देना शुरू कर दिया। जिससे उन गरीब परिवारों के पास किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि सुनीता ने तो 20 साल से चले आ रहे अपने ससुर के बैंक का बकाया चुकता कर परिवार को कर्ज मुक्त कर दिया। फिलहाल सुनीता के समूह में शामिल महिलाओं के पास खुद के पैसों से कमाए गए 90 हजार की ब्याज राशि भी सुरक्षित है। उनके छोटे मोटे काम भी आसानी से हो जाते हैं। सुनीता बताती हैं कि उसने अपने परिवार की रोजी रोटी चलाने के लिए दो एकड़ जमीन भी पट्टे पर ली है, जिसमें एक एकड़ भूमि का उसे 23 हजार चुकता करना पड़ा है।

मीना ने घर में किया उजाला
इसी तरह उसके समूह की महिला मीना की भी यही कहानी थी। मीना के घर कई सालों से बिजली नहीं थी, क्योंकि उसके परिवार पर भी बिजली निगम का करीब 60 हजार बकाया था। समूह की महिलाओं ने मीना की परेशानी दूर करने की भी ठानी। बिजली निगम अधिकारियों से ब्याज माफी के बाद 35 हजार रुपये का भुगतान करा नया बिजली कनेक्शन दिला उसके घर भी उजाला किया।

संघर्ष से दिलाया पूरे गांव को स्वच्छ पीने का पानी
सुनीता के गांव बलियाली में कई सालों से गंदा पानी सप्लाई में आ रहा था। महिलाओं ने काफी बार शिकायतें भी कीं, मगर कोई समाधान नहीं हुआ। महिलाओं ने इससे समस्या से निजात पाने की ठानी। महिलाओं ने गांव के जलघर पर ताला जड़ रोड जाम कर दिया। सुबह से दोपहर हो गई और फिर शाम। कोई नहीं आया। महिलाएं भी टस से मस नहीं हुईं। देर शाम तक पब्लिक हेल्थ अधिकारी मौके पर पहुंचे। महिलाओं ने कांच की बोतल से एक गिलास गंदे पानी का भरकर जेई को पीने के लिए बोला। जेई ने साफ इनकार कर दिया। इस पर महिलाओं ने कहा कि यही गंदा पानी उनका पूरा परिवार और गांव पी रहा है। इसके बाद अधिकारी गंभीर हुए और हमेशा के लिए गंदे पानी की समस्या से निजात मिल गई। इस संघर्ष में समूह की महिलाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर स्वच्छ पानी के हक की लड़ाई लड़ी।

खुद पैरों पर खड़ी हुई तो की स्नातक तक पढ़ाई 
बलियाली निवासी सुनीता ने बताया कि जब उसने स्वयं सहायता समूह बनाया, उस समय वह दसवीं पास थी। उसने कई महिलाओं के साथ जुड़कर खुद का कारोबार बढ़ाया तो पढ़ाई की ललक भी जगी। उसने स्नातक तक पढ़ाई की। घर में उसकी सास चमेली, ससुर गोविंदराम, पति दलीप सिंह के अलावा तीन बच्चे बड़ी बेटी 15 वर्षीय प्रियंत, छोटा बेटा 13 साल का ईशांत और सबसे छोटा 11 साल का बेटा हेमंत है। पति प्राइवेट जॉब करते हैं। (संवाद)


अंदर नहीं होनी चाहिए हीन भावना 

महिलाओं को खुद के अंदर हीन भावना कभी भी नहीं आने देनी चाहिए, क्योंकि वे किसी से भी कम नहीं हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ऐसी महिलाओं को न केवल खुद के पैरों पर खड़ा होना सिखाता है, बल्कि उन महिलाओं को अपने परिवार की आर्थिक उन्नति के साथ देश की प्रगति में भी सीधा योगदान का हकदार बनाता है। ऐसी महिलाएं दूसरों के लिए भी प्रेरणादायी बन जाती हैं। -सीखा राणा, परियोजना अधिकारी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन भिवानी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed