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गेहूं ढुलाई में घोटाले की आशंका, अब होगी जांच
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बवानीखेड़ा मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद में ढुलाई को लेकर सामने आए गड़बड़झाले में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने संज्ञान लेते हुए डीसी को पत्र भेजकर मामले की जांच कराए जाने के निर्देश दिए। भंडारण क्षमता होने के बावजूद बवानीखेड़ा मंडी में खरीदे गेहूं को भिवानी व बरवाला भेजकर ढुलाई ठेकेदार व अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को लाखों का चूना लगाने का आरोप था।
अमर उजाला ने 16 मई को गेहूं की ढुलाई में लाखों के घोटाले की आशंका शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। वहीं मामले में शिकायतकर्ता हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल प्रधान विजय बंसल टैनी ने डीजीपी विजिलेंस को शिकायत भेजकर जांच की मांग उठाई थी। वहीं संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया था। जिसके बाद इस मामले में डीजीपी विजिलेंस के हस्क्षेप से करीब डेढ़ माह बाद अब मुख्यालय ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल प्रधान विजय कुमार बंसल टैनी ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अधिकारियों व ढुलाई ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर सरकार को लाखों का चूना लगाया है। उसने बताया कि बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई के पास गेहूं भंडारण के पर्याप्त इंतजाम हैं लेकिन इसके बावजूद वहां पर भंडारण का स्टॉक पूरा दर्शाकर बवानीखेड़ा में खरीदा गेहूं भिवानी व बरवाला भेजा गया जबकि बवानीखेड़ा में ही धनाना व जुई खरीद केंद्र में खरीदा गेहूं स्टॉक में लगा दिया। आरोप यह भी लगा कि अधिकारियों ने ढुलाई ठेकेदार से मिलीभगत कर ऊंचे रेट पर ट्रांसपोटेशन का ठेका दिया था।
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बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई का गेहूं भंडारण किया गया। जबकि बवानीखेड़ा में तीन दिन हैफेड और तीन दिन एफसीआई की खरीद निर्धारित की थी। एफसीआई ने ढुलाई का कोई ठेका नहीं कराया, जबकि हैफेड ने अकेले ही बवानीखेड़ा मंडी मे गेहूं की खरीद की और खरीदा गेहूं ढुलाई भी कराया था। बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई के काफी गोदाम हैं। जिनमें अकेले एफसीआई के गोदामों में करीब चार लाख कट्टों के भंडारण की क्षमता है। हैफेड का बवानीखेड़ा में ही ओपन में भी काफी गेहूं लगा है।
बवानीखेड़ा में ही वेयर हाउस के भी गोदाम हैं मगर यहां पर सभी गोदामों में गेहूं का भंडारण दर्शाया और जगह खाली नहीं होने का हवाला देकर बवानीखेड़ा में खरीदा गेहूं भिवानी की चारामंडी व हिसार के बरवाला तक भेजा गया। बवानीखेड़ा में धनाना केंद्र व जुई केंद्र पर खरीदा गेहूं भी भंडारित किया था। बवानीखेड़ा में खरीदे गेहूं को बाहर ढुलाई कर 25 से 47 किलोमीटर दूर तक भेजा था।
मैंने ढुलाई ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत कर बवानीखेड़ा मंडी में खरीद हुए गेहूं को भिवानी व बरवाला भेजकर सरकार को मोटा चूना लगाने की शिकायत दी थी। डीजीपी के रीडर अजीत सिंह ने मामले की भिवानी पहुंचकर भी जांच की थी। जिसके बाद डीजीपी कार्यालय से इस मामले में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के समक्ष पत्र जांच कराने के लिए भेजा। वहां से अब उपायुक्त के समक्ष जांच के लिए पत्र भेजा है। इस मामले में जांच हुई तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
-विजय बंसल टैनी, प्रधान, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल भिवानी।
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अमर उजाला ने 16 मई को गेहूं की ढुलाई में लाखों के घोटाले की आशंका शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। वहीं मामले में शिकायतकर्ता हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल प्रधान विजय बंसल टैनी ने डीजीपी विजिलेंस को शिकायत भेजकर जांच की मांग उठाई थी। वहीं संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया था। जिसके बाद इस मामले में डीजीपी विजिलेंस के हस्क्षेप से करीब डेढ़ माह बाद अब मुख्यालय ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
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हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल प्रधान विजय कुमार बंसल टैनी ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अधिकारियों व ढुलाई ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर सरकार को लाखों का चूना लगाया है। उसने बताया कि बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई के पास गेहूं भंडारण के पर्याप्त इंतजाम हैं लेकिन इसके बावजूद वहां पर भंडारण का स्टॉक पूरा दर्शाकर बवानीखेड़ा में खरीदा गेहूं भिवानी व बरवाला भेजा गया जबकि बवानीखेड़ा में ही धनाना व जुई खरीद केंद्र में खरीदा गेहूं स्टॉक में लगा दिया। आरोप यह भी लगा कि अधिकारियों ने ढुलाई ठेकेदार से मिलीभगत कर ऊंचे रेट पर ट्रांसपोटेशन का ठेका दिया था।
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बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई का गेहूं भंडारण किया गया। जबकि बवानीखेड़ा में तीन दिन हैफेड और तीन दिन एफसीआई की खरीद निर्धारित की थी। एफसीआई ने ढुलाई का कोई ठेका नहीं कराया, जबकि हैफेड ने अकेले ही बवानीखेड़ा मंडी मे गेहूं की खरीद की और खरीदा गेहूं ढुलाई भी कराया था। बवानीखेड़ा में हैफेड और एफसीआई के काफी गोदाम हैं। जिनमें अकेले एफसीआई के गोदामों में करीब चार लाख कट्टों के भंडारण की क्षमता है। हैफेड का बवानीखेड़ा में ही ओपन में भी काफी गेहूं लगा है।
बवानीखेड़ा में ही वेयर हाउस के भी गोदाम हैं मगर यहां पर सभी गोदामों में गेहूं का भंडारण दर्शाया और जगह खाली नहीं होने का हवाला देकर बवानीखेड़ा में खरीदा गेहूं भिवानी की चारामंडी व हिसार के बरवाला तक भेजा गया। बवानीखेड़ा में धनाना केंद्र व जुई केंद्र पर खरीदा गेहूं भी भंडारित किया था। बवानीखेड़ा में खरीदे गेहूं को बाहर ढुलाई कर 25 से 47 किलोमीटर दूर तक भेजा था।
मैंने ढुलाई ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत कर बवानीखेड़ा मंडी में खरीद हुए गेहूं को भिवानी व बरवाला भेजकर सरकार को मोटा चूना लगाने की शिकायत दी थी। डीजीपी के रीडर अजीत सिंह ने मामले की भिवानी पहुंचकर भी जांच की थी। जिसके बाद डीजीपी कार्यालय से इस मामले में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के समक्ष पत्र जांच कराने के लिए भेजा। वहां से अब उपायुक्त के समक्ष जांच के लिए पत्र भेजा है। इस मामले में जांच हुई तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
-विजय बंसल टैनी, प्रधान, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल भिवानी।