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टॉपर्स ने सेल्फ स्टडी से भरी सफलता की उड़ान
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492 अकं प्राप्त करने पर नेहा का मुंह मीठा करवाते परिजन।
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर घोषित सीनियर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम में जिले के कुछ बच्चों ने अंकों का आसमान छुआ है। जिले की टॉप टेन की सूची में 12 बच्चों ने जगह बनाई है। यहां भी बेटियां अव्वल रहीं और 12 में से 10 बेटियां टॉप टेन में है। मगर जिला टॉपर का खिताब बेटे अमित के नाम है। अंकों का आसमां छूने वाले ये बच्चे अब सपनों के आसमां को छूने की तैयारी में है। कोई आईएएस ऑफिसर बनना चाहता है तो कोई जज और वकील बन लोगों को न्याय दिलाना चाहते है। कुछ ऐसे भी है जो डिफेंस में जाकर देश सेवा करना चाहते है तो कुछ सीए कर अपने कॅरियर को नई ऊंचाईयां देने के सपने संजो रहे है।
थैंक्स अमर उजाला, मुझे आपके माध्यम से ही पता चला है कि मेरे 474 फीसदी अंक आए हैं। मुझे परीक्षा परिणाम को लेकर काफी टेंशन थी, क्योंकि मेरे तीन पेपर अकाउंटेंसी, बिजनेंस स्ट्डीज, कंप्यूटर का पेपर कोविड-19 की वजह से नहीं हुआ था। फिर भी बेहतर परिणाम रहा है। मैने जिला टॉपर्स में दूसरा स्थान प्राप्त किया है, यह सुनकर ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। मैं सिवानीमंडी के नव भारत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बारहवीं की छात्रा हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरा परिणाम इतना अच्छा आएगा। मैं सिवानी में अपने नाना जी गोपीराम गोयल के पास रहती हूं जिनकी दुकान है। मैने परीक्षा के दौरान सेल्फ स्टडी पर फोकस रखा। स्कूल में जो भी पढ़ाया जाता, घर आने के बाद उसे अच्छे से रिविजन किया। हर रोज आठ घंटे तक पढ़ाई की। करिश्मा का सपना आईएएस ऑफिसर बनने का है। - करिश्मा छात्रा।
493 अंक हासिल करने वाली शिव सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा निधि का सपना सीए बनने का है। बड़ी बहन भी सीए की पढ़ाई कर रही है। निधि का कहना है कि इस बार उसने काफी मेहनत की थी और परिणाम अच्छा आने की उम्मीद थी। मैने पढ़ाई के लिए कोई विशेष तैयारी तो नहीं कि मगर स्कूल की पढ़ाई पर फोकस रखा। घर आने के बाद अच्छे से रिविजन की। हर रोज औसतन आठसे नौ घंटे तक पढ़ाई की। स्कूल टीचर्स ने काफी सहयोग किया। अब सीए बनना चाहती है। निधि के पिता मनोज कुमार की ढिगावा मंडी में ही हार्डवेयर की शॉप है।
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कलां संकाय में 493 फीसदी अंक हासिल करने वाली ऐम कॉन्वेंट स्कूल पोहकरवास की छात्रा दीक्षा का सपना कानून की पढ़ाई करने का है। वह लोगों को न्याय दिलाना चाहती है। इसके लिए फिलहाल एलएलबी की तैयारी है। दीक्षा ने भी न कोई ट्यूशन लगवाई और न ही कोचिंग ली। सबसे अहम टाइफाइड जैसी बीमारी ने भी उसे काफी परेशान किया और इन सबके अलावा घरेलू कार्य भी वह करती। इस कारण पढ़ाई के लिए चार से पांच घंटे ही निकाल पाती। बावजूद इसके उसने 493 अंक हासिल किए। दीक्षा बताती है कि उसने स्कूल में पढ़ाए हरेक प्वाइंट को गहराई से पढ़ा और रिविजन पर फोकस रखा। किसी भी विषय को लूज नहीं छोड़ा। स्कूल टीचर्स का भी सफलता में बड़ा योगदान है, जिन्होंने अच्छे से समझाया। आसलवास दूबिया की रहने वाली छात्रा दीक्षा के पिता धर्मबीर गुरुग्राम में ट्रांसपोर्ट का कार्य करते है।
ट्रैक्टर मैकेनिक लीलाधर की बेटी नेहा ने कॉमर्स में 492 अंक प्राप्त किए है। सिवानी मंडी में रहने वाली नेहा का सपना बैंकिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाने का है। नेहा का मानना है कि तीन विषयों अकाउंट, कंप्यूटर, बिजनेस स्ट्डीज की परीक्षा नहीं हुई थी। इस कारण परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति थी। सिवानी मंडी के नवभारत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढने वाली नेहा ने बताया कि उसने नियमित पढ़ाई की। स्कूल में पढ़ाए सभी सिलेबस को घर आकर रिविजन किया। जिस कारण उसकी तैयारी पुख्ता हुई।
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थैंक्स अमर उजाला, मुझे आपके माध्यम से ही पता चला है कि मेरे 474 फीसदी अंक आए हैं। मुझे परीक्षा परिणाम को लेकर काफी टेंशन थी, क्योंकि मेरे तीन पेपर अकाउंटेंसी, बिजनेंस स्ट्डीज, कंप्यूटर का पेपर कोविड-19 की वजह से नहीं हुआ था। फिर भी बेहतर परिणाम रहा है। मैने जिला टॉपर्स में दूसरा स्थान प्राप्त किया है, यह सुनकर ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। मैं सिवानीमंडी के नव भारत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बारहवीं की छात्रा हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरा परिणाम इतना अच्छा आएगा। मैं सिवानी में अपने नाना जी गोपीराम गोयल के पास रहती हूं जिनकी दुकान है। मैने परीक्षा के दौरान सेल्फ स्टडी पर फोकस रखा। स्कूल में जो भी पढ़ाया जाता, घर आने के बाद उसे अच्छे से रिविजन किया। हर रोज आठ घंटे तक पढ़ाई की। करिश्मा का सपना आईएएस ऑफिसर बनने का है। - करिश्मा छात्रा।
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493 अंक हासिल करने वाली शिव सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा निधि का सपना सीए बनने का है। बड़ी बहन भी सीए की पढ़ाई कर रही है। निधि का कहना है कि इस बार उसने काफी मेहनत की थी और परिणाम अच्छा आने की उम्मीद थी। मैने पढ़ाई के लिए कोई विशेष तैयारी तो नहीं कि मगर स्कूल की पढ़ाई पर फोकस रखा। घर आने के बाद अच्छे से रिविजन की। हर रोज औसतन आठसे नौ घंटे तक पढ़ाई की। स्कूल टीचर्स ने काफी सहयोग किया। अब सीए बनना चाहती है। निधि के पिता मनोज कुमार की ढिगावा मंडी में ही हार्डवेयर की शॉप है।
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कलां संकाय में 493 फीसदी अंक हासिल करने वाली ऐम कॉन्वेंट स्कूल पोहकरवास की छात्रा दीक्षा का सपना कानून की पढ़ाई करने का है। वह लोगों को न्याय दिलाना चाहती है। इसके लिए फिलहाल एलएलबी की तैयारी है। दीक्षा ने भी न कोई ट्यूशन लगवाई और न ही कोचिंग ली। सबसे अहम टाइफाइड जैसी बीमारी ने भी उसे काफी परेशान किया और इन सबके अलावा घरेलू कार्य भी वह करती। इस कारण पढ़ाई के लिए चार से पांच घंटे ही निकाल पाती। बावजूद इसके उसने 493 अंक हासिल किए। दीक्षा बताती है कि उसने स्कूल में पढ़ाए हरेक प्वाइंट को गहराई से पढ़ा और रिविजन पर फोकस रखा। किसी भी विषय को लूज नहीं छोड़ा। स्कूल टीचर्स का भी सफलता में बड़ा योगदान है, जिन्होंने अच्छे से समझाया। आसलवास दूबिया की रहने वाली छात्रा दीक्षा के पिता धर्मबीर गुरुग्राम में ट्रांसपोर्ट का कार्य करते है।
ट्रैक्टर मैकेनिक लीलाधर की बेटी नेहा ने कॉमर्स में 492 अंक प्राप्त किए है। सिवानी मंडी में रहने वाली नेहा का सपना बैंकिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाने का है। नेहा का मानना है कि तीन विषयों अकाउंट, कंप्यूटर, बिजनेस स्ट्डीज की परीक्षा नहीं हुई थी। इस कारण परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति थी। सिवानी मंडी के नवभारत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढने वाली नेहा ने बताया कि उसने नियमित पढ़ाई की। स्कूल में पढ़ाए सभी सिलेबस को घर आकर रिविजन किया। जिस कारण उसकी तैयारी पुख्ता हुई।

493 अकं आने पर दीक्षा का मुंह मीठा करवाते परिजन।- फोटो : Bhiwani

करिश्मा- फोटो : Bhiwani