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महामारी में तीज की रौनक रही फीकी, महिलाओं ने घरों में बनाए झूले
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हांसी रोड स्थित घर के बाहर झूला झूलती महिला।
- फोटो : Bhiwani
लोहारू। मेले, स्वांग और उत्सव हरियाणवी संस्कृति की पहचान हैं, जो त्योहारों की छंटा को चार चांद लगाते हैं। किंतु कोरोना महामारी ने त्योहारों की छंटा को भी ग्रहण लगा दिया है। लोहारू शहर के ऐतिहासिक किराणा तालाब पर सैकड़ों वर्षाें से तीज के मौके पर लगने वाले मेले की रौनक इस बार नहीं रही। लोगों का कहना है कि देश की आजादी के बाद से लग रहे इस तीज मेले मेें इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि ऐतिहासिक किराणा तालाब पर तीज पर मेला नहीं लगा और तालाब परिसर सूना दिखाई दिया।
लोगों ने बताया कि सन 1915 में भारी अकाल पड़ा था। उस समय लोगों और मवेशियों को राहत देने के लिए पिलानी रोड पर इस तालाब का निर्माण किया गया था। सोहांसड़ा के बाबा सुल्ताननाथ के प्रयासों से निकटवर्ती राजस्थान राज्य के काजड़ा के सेठों ने इस तालाब का निर्माण करवाया। वहीं तत्कालीन लोहारू के नवाब अमीरूद्दीन ने यहां तालाब बनवाने के लिए कथित रूप से करीब ग्यारह सौ बीघा गोचर भूमि प्रदान की थी। नगरपालिका के प्रधान बुजुर्ग दौलतराम सौलंकी ने बताया कि वे सुनते आ रहे हैं कि आजादी के बाद से किराणा तालाब पर तीज का मेला लगता आ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले के दौरान नगरपालिका प्रशासन द्वारा लोगों की सुविधा के लिए सफाई भी करवाई जाती थी। किंतु इस बार कोरोना संक्रमण काल के चलते मेले का आयोजन स्थगित कर दिया गया है।
महामारी के कारण तीज की रौनक रही फीकी, घरों में डले झूले
भिवानी। तीज का उत्साह और उमंग कोरोना के बावजूद महिलाओं में कम नहीं हुआ। वीरवार को तीज पर्व जिले भर में परंपरागत रूप से मनाया। हालांकि तीज पर कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ और महिलाएं आस पड़ोस में ही एकत्रित हुई और तीज उत्सव मनाया। शहर में कई जगह महिलाओं ने पेड़ों पर झूले लगाए और महिलाओं व बच्चों ने झूला झूलकर खूब मस्ती की। वहीं बुजुर्ग महिलाओं ने भी तीज के परंपरागत गीतों को गुनगुनाया। महिला सुमन राघव, अंजली राघव, लताशा, उन्नति, रेखा ने बताया कि इस बार तीज का पर्व बड़े स्तर पर नहीं बनाया गया। घरों के अंदर ही झूले लगाए और मस्ती की। हालांकि बाजार में भी त्योहार की रौनक फीकी ही रही।
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लोगों ने बताया कि सन 1915 में भारी अकाल पड़ा था। उस समय लोगों और मवेशियों को राहत देने के लिए पिलानी रोड पर इस तालाब का निर्माण किया गया था। सोहांसड़ा के बाबा सुल्ताननाथ के प्रयासों से निकटवर्ती राजस्थान राज्य के काजड़ा के सेठों ने इस तालाब का निर्माण करवाया। वहीं तत्कालीन लोहारू के नवाब अमीरूद्दीन ने यहां तालाब बनवाने के लिए कथित रूप से करीब ग्यारह सौ बीघा गोचर भूमि प्रदान की थी। नगरपालिका के प्रधान बुजुर्ग दौलतराम सौलंकी ने बताया कि वे सुनते आ रहे हैं कि आजादी के बाद से किराणा तालाब पर तीज का मेला लगता आ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले के दौरान नगरपालिका प्रशासन द्वारा लोगों की सुविधा के लिए सफाई भी करवाई जाती थी। किंतु इस बार कोरोना संक्रमण काल के चलते मेले का आयोजन स्थगित कर दिया गया है।
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महामारी के कारण तीज की रौनक रही फीकी, घरों में डले झूले
भिवानी। तीज का उत्साह और उमंग कोरोना के बावजूद महिलाओं में कम नहीं हुआ। वीरवार को तीज पर्व जिले भर में परंपरागत रूप से मनाया। हालांकि तीज पर कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ और महिलाएं आस पड़ोस में ही एकत्रित हुई और तीज उत्सव मनाया। शहर में कई जगह महिलाओं ने पेड़ों पर झूले लगाए और महिलाओं व बच्चों ने झूला झूलकर खूब मस्ती की। वहीं बुजुर्ग महिलाओं ने भी तीज के परंपरागत गीतों को गुनगुनाया। महिला सुमन राघव, अंजली राघव, लताशा, उन्नति, रेखा ने बताया कि इस बार तीज का पर्व बड़े स्तर पर नहीं बनाया गया। घरों के अंदर ही झूले लगाए और मस्ती की। हालांकि बाजार में भी त्योहार की रौनक फीकी ही रही।

तीज पर पहली बार सुनसान दिखाई दिया लोहारू का एतिहासिक किराणा तालाब। - फोटो : Bhiwani
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