{"_id":"6aa306cfca1941257a06b476","slug":"247-cattle-in-the-district-affected-by-lumpy-disease-108-recovered-one-cow-died-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-156827-2026-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: जिले में 247 गोवंश लंपी से प्रभावित, 108 हुए स्वस्थ, एक गाय की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: जिले में 247 गोवंश लंपी से प्रभावित, 108 हुए स्वस्थ, एक गाय की मौत
विज्ञापन
तिगड़ाना मोड पर वार्ड में दाखिल लंपी से पीड़ित गोवंश।
भिवानी। जिले में 247 गोवंश लंपी त्वचा रोग से प्रभावित हुए हैं जिनमें 108 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं और एक गाय की मौत हुई है। पशुपालन विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालकों को जागरूक करते हुए गोवंश की आवाजाही रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
गोवंश में फैल रही लंपी त्वचा रोग से बचाव और रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने पशुपालकों को जागरूक करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशालय की ओर से जारी पत्र के तहत प्रशासन के साथ मिलकर गोवंश की एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवाजाही रोकने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बीमारी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पशुपालन विभाग की ओर से जारी हिदायत के अनुसार लंपी त्वचा रोग मुख्य रूप से मक्खी और मच्छरों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। ऐसे में पशुपालकों को पशुओं को मक्खी-मच्छरों से बचाने के लिए जाली का उपयोग करने की हिदायत दी गई है। गोशालाओं और डेयरियों में नियमित फॉगिंग करवाने तथा पशुओं के बैठने के स्थान पर एक प्रतिशत फॉर्मेलिन का छिड़काव करने को कहा गया है। प्रभावित पशुओं को तालाब या अन्य सार्वजनिक जल स्रोतों के पास न ले जाने की हिदायत दी गई है।
विज्ञापन
किसी नए पशु को लाने पर उसे कम से कम 15 दिनों तक अन्य पशुओं से अलग रखने की हिदायत दी गई है। किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग करें और उसका खाना-पीना भी अलग रखें। बीमार पशु का तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से इलाज कराने के निर्देश दिए गए हैं। बीमारी के कारण किसी पशु की मौत होने पर संक्रमण फैलने से रोकने के लिए उसे गहरा गड्ढा खोदकर ही दबाने की हिदायत दी गई है।
विभाग लंपी बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क : डॉ. रविंद्र सहरावत
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने बताया कि विभाग लंपी बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जिले के सभी पशु चिकित्सालयों से प्रतिदिन रिपोर्ट मांगी जा रही है और इसे सीधे निदेशालय को भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में 247 गोवंश इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 108 पशु पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। वहीं केवल एक गाय की मृत्यु दर्ज हुई है।
उन्होंने बताया कि यह एक वायरल बीमारी है जिसमें पशु की अपनी प्रतिरोधक क्षमता ही उसे ठीक करने में मदद करती है। जिन पशुओं को यह बीमारी हुई है, वे कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो रहे हैं।
राजस्थान सीमा से सटा है जिला, गोवंश की बढ़ाई निगरानी
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने कहा कि भिवानी जिला राजस्थान सीमा से सटा हुआ है। इसलिए बाहर से आने वाले गोवंश पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोगों को दूसरे क्षेत्रों से गाय नहीं लाने की हिदायत दी गई है। बाहर से लाए गए पशु पहले से संक्रमित हो सकते हैं और बीमारी के लक्षण दिखाई देने में समय लगता है। जिले में इस बीमारी का टीकाकरण भी किया जा चुका है।
तिगड़ाना मोड का आइसोलेशन अवैध, होगी कार्रवाई
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि शहर के तिगड़ाना मोड पर कुछ गायों को गैरकानूनी तरीके से अन्य जिलों से लाया गया है। ये गायें लंपी बीमारी से प्रभावित हैं तथा वहां लंपी से मरने वाले पशुओं की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। प्रशासन इस मामले में कार्रवाई कर रहा है। संबंधित लोगों को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।
विज्ञापन
गोवंश में फैल रही लंपी त्वचा रोग से बचाव और रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने पशुपालकों को जागरूक करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशालय की ओर से जारी पत्र के तहत प्रशासन के साथ मिलकर गोवंश की एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवाजाही रोकने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बीमारी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
विज्ञापन
पशुपालन विभाग की ओर से जारी हिदायत के अनुसार लंपी त्वचा रोग मुख्य रूप से मक्खी और मच्छरों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। ऐसे में पशुपालकों को पशुओं को मक्खी-मच्छरों से बचाने के लिए जाली का उपयोग करने की हिदायत दी गई है। गोशालाओं और डेयरियों में नियमित फॉगिंग करवाने तथा पशुओं के बैठने के स्थान पर एक प्रतिशत फॉर्मेलिन का छिड़काव करने को कहा गया है। प्रभावित पशुओं को तालाब या अन्य सार्वजनिक जल स्रोतों के पास न ले जाने की हिदायत दी गई है।
विज्ञापन
किसी नए पशु को लाने पर उसे कम से कम 15 दिनों तक अन्य पशुओं से अलग रखने की हिदायत दी गई है। किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग करें और उसका खाना-पीना भी अलग रखें। बीमार पशु का तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से इलाज कराने के निर्देश दिए गए हैं। बीमारी के कारण किसी पशु की मौत होने पर संक्रमण फैलने से रोकने के लिए उसे गहरा गड्ढा खोदकर ही दबाने की हिदायत दी गई है।
विभाग लंपी बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क : डॉ. रविंद्र सहरावत
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने बताया कि विभाग लंपी बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जिले के सभी पशु चिकित्सालयों से प्रतिदिन रिपोर्ट मांगी जा रही है और इसे सीधे निदेशालय को भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में 247 गोवंश इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 108 पशु पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। वहीं केवल एक गाय की मृत्यु दर्ज हुई है।
उन्होंने बताया कि यह एक वायरल बीमारी है जिसमें पशु की अपनी प्रतिरोधक क्षमता ही उसे ठीक करने में मदद करती है। जिन पशुओं को यह बीमारी हुई है, वे कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो रहे हैं।
राजस्थान सीमा से सटा है जिला, गोवंश की बढ़ाई निगरानी
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने कहा कि भिवानी जिला राजस्थान सीमा से सटा हुआ है। इसलिए बाहर से आने वाले गोवंश पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोगों को दूसरे क्षेत्रों से गाय नहीं लाने की हिदायत दी गई है। बाहर से लाए गए पशु पहले से संक्रमित हो सकते हैं और बीमारी के लक्षण दिखाई देने में समय लगता है। जिले में इस बीमारी का टीकाकरण भी किया जा चुका है।
तिगड़ाना मोड का आइसोलेशन अवैध, होगी कार्रवाई
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि शहर के तिगड़ाना मोड पर कुछ गायों को गैरकानूनी तरीके से अन्य जिलों से लाया गया है। ये गायें लंपी बीमारी से प्रभावित हैं तथा वहां लंपी से मरने वाले पशुओं की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। प्रशासन इस मामले में कार्रवाई कर रहा है। संबंधित लोगों को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।