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अकाउंटेंट संजय बंसल से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही टीम
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नगर सुधार मंडल मार्केट कार्यालय में विडियोग्राफी करवाकर पुराने रिकार्ड को अपने कब्जे में लेती न
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। नगर परिषद के करोड़ों के घोटाले में फंसें अकाउंटेंट संजय बंसल से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को नगर परिषद की टीम ने शनिवार को नगर सुधार मंडल कार्यालय में पहुंचकर अपने कब्जे में ले लिया। रिकॉर्ड को कब्जे में लेने के लिए नगर परिषद तकनीकी शाखा के जेई आबिद हुसैन की टीम मौके पर पहुंची। टीम दोपहर 12 बजे ही नगर सुधार मंडल कार्यालय में पहुंच गई थी और देर शाम तक रिकॉर्ड खंगालने में जुटी रही। टीम रविवार को भी रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।
नगर सुधार मंडल के बंद पड़े रेस्टहाउस में रखी अलमारियों में पुराने रिकॉर्ड की फाइलों को बाहर निकाला गया और वीडियोग्राफी की निगरानी में एक-एक फाइल को नप टीम ने अपने कब्जे में लिया। दरअसल नप घोटाले में शामिल संजय बंसल इससे पहले नगर सुधार मंडल में बतौर सहायक नियुक्त था। उसके यहां रहते हुए भी कई तरह के घालमेल की आशंका बनी हुई है। लोग भी अपनी दुकानों व जमीनों से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर काफी परेशान हो रहे थे। इसी के चलते शनिवार दोपहर बाद नप की तकनीकी शाखा की टीम ने एसडीएम के आदेश पर नगर सुधार मंडल के रिकॉर्ड को कब्जे में लिया है। ज्ञात होगा कि नगर सुधार मंडल को भिवानी नगर परिषद में मर्ज किया जा चुका है। इसी वजह से नगर सुधार मंडल से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड बंद पड़े रेस्टहाउस की अलमारियों में रखा हुआ था। नगर सुधार मंडल की बंद पड़ी अलमारियों में रखे पुराने रिकॉर्ड को नप के अकाउंटेंट संजय बंसल ही देखरेख करते थे, वे इससे पहले नगर सुधार मंडल में थे, तब भी यह रिकॉर्ड उन्हीं के पास था। ऐसे में अब इस अहम पुराने रिकॉर्ड को प्रशासन ने अपने कब्जे में लेना जरूरी समझा। इसी को लेकर शनिवार को नप की टीम ने इस पूरे रिकॉर्ड को वीडियोग्राफी की निगरानी में अपने कब्जे में ले लिया।
नगर सुधार मंडल के रिकॉर्ड में भी निकल सकता है घपले का जिन्न
नगर परिषद घोटाले में अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद अब नगर सुधार मंडल के पुराने रिकॉर्ड से भी घपले का जिन्न निकल सकता है, क्योंकि दबी जुबान बताया जा रहा है कि नगर सुधार मंडल की संपत्ति में भी संजय बंसल काफी घालमेल किया करता था। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट मार्केट की दुकानों के रिकॉर्ड में भी काफी हेराफेरी की आशंका बनी हुई है। अगर इस रिकॉर्ड की विस्तृत या निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए तो करोड़ों की दुकानों के बंदरबांट का मामला भी सामने आ जाएगा और नगर सुधार मंडल की शहर में कई जगह करोड़ों की संपत्ति का भी पता चल जाएगा, क्योंकि काफी संपत्ति को अंदर खाते बेचे जाने की चर्चाएं भी हैं।
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रिकॉर्ड का सुरक्षित होना जरूरी
एसडीएम के आदेश पर नगर सुधार मंडल से जुड़े रिकॉर्ड को वीडियोग्राफी कराकर कब्जे में लिया गया है। यह रिकार्ड नगर सुधार मंडल का है, लेकिन अब यह नगर परिषद में मर्ज हो चुका है। इस रिकॉर्ड को लेकर काफी लोग परेशान हो रहे हैं, इसलिए इसका सुरक्षित होना बहुत जरूरी है।
- आबिद हुसैन, जेई नगर परषिद भिवानी।
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नगर सुधार मंडल के बंद पड़े रेस्टहाउस में रखी अलमारियों में पुराने रिकॉर्ड की फाइलों को बाहर निकाला गया और वीडियोग्राफी की निगरानी में एक-एक फाइल को नप टीम ने अपने कब्जे में लिया। दरअसल नप घोटाले में शामिल संजय बंसल इससे पहले नगर सुधार मंडल में बतौर सहायक नियुक्त था। उसके यहां रहते हुए भी कई तरह के घालमेल की आशंका बनी हुई है। लोग भी अपनी दुकानों व जमीनों से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर काफी परेशान हो रहे थे। इसी के चलते शनिवार दोपहर बाद नप की तकनीकी शाखा की टीम ने एसडीएम के आदेश पर नगर सुधार मंडल के रिकॉर्ड को कब्जे में लिया है। ज्ञात होगा कि नगर सुधार मंडल को भिवानी नगर परिषद में मर्ज किया जा चुका है। इसी वजह से नगर सुधार मंडल से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड बंद पड़े रेस्टहाउस की अलमारियों में रखा हुआ था। नगर सुधार मंडल की बंद पड़ी अलमारियों में रखे पुराने रिकॉर्ड को नप के अकाउंटेंट संजय बंसल ही देखरेख करते थे, वे इससे पहले नगर सुधार मंडल में थे, तब भी यह रिकॉर्ड उन्हीं के पास था। ऐसे में अब इस अहम पुराने रिकॉर्ड को प्रशासन ने अपने कब्जे में लेना जरूरी समझा। इसी को लेकर शनिवार को नप की टीम ने इस पूरे रिकॉर्ड को वीडियोग्राफी की निगरानी में अपने कब्जे में ले लिया।
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नगर सुधार मंडल के रिकॉर्ड में भी निकल सकता है घपले का जिन्न
नगर परिषद घोटाले में अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद अब नगर सुधार मंडल के पुराने रिकॉर्ड से भी घपले का जिन्न निकल सकता है, क्योंकि दबी जुबान बताया जा रहा है कि नगर सुधार मंडल की संपत्ति में भी संजय बंसल काफी घालमेल किया करता था। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट मार्केट की दुकानों के रिकॉर्ड में भी काफी हेराफेरी की आशंका बनी हुई है। अगर इस रिकॉर्ड की विस्तृत या निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए तो करोड़ों की दुकानों के बंदरबांट का मामला भी सामने आ जाएगा और नगर सुधार मंडल की शहर में कई जगह करोड़ों की संपत्ति का भी पता चल जाएगा, क्योंकि काफी संपत्ति को अंदर खाते बेचे जाने की चर्चाएं भी हैं।
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रिकॉर्ड का सुरक्षित होना जरूरी
एसडीएम के आदेश पर नगर सुधार मंडल से जुड़े रिकॉर्ड को वीडियोग्राफी कराकर कब्जे में लिया गया है। यह रिकार्ड नगर सुधार मंडल का है, लेकिन अब यह नगर परिषद में मर्ज हो चुका है। इस रिकॉर्ड को लेकर काफी लोग परेशान हो रहे हैं, इसलिए इसका सुरक्षित होना बहुत जरूरी है।
- आबिद हुसैन, जेई नगर परषिद भिवानी।