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तारामीरा की मिलावट के साथ गेहूं और सरसों की भी नहीं कराई झराई और सफाई

Thu, 24 Sep 2020 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 12:27 AM IST
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scam in mustured purchasing in market
खुले में किया गया गेहूं का भंडारण। संवाद न्यूज एजेंसी। - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। अप्रैल माह में लॉकडाउन के दौरान भिवानी और चरखी दादरी की मंडियों में खरीद हुए गेहूं और सरसों में तारामीरा के साथ रेत और सूखे कचरे की मिलावट का मामला भी सामने आया है। मंडियों से खरीद हुए सरकारी अनाज को गोदामों तक पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टरों ने अब नया खुलासा किया है।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि हैफेड और हरियाणा वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की मिलीभगत से सरसों और गेहूं की झराई और सफाई कराए बगैर ही मिट्टी की मिलावट की गई है। जबकि सरसों में 25 फीसदी तक तारामीरा मिलावट में करीब 250 करोड़ का घोटाले की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है। ट्रांसपोर्टरों ने मामले में हैफेड और वेयर हाउस मुख्यालय के अधिकारियों को भी इस मिलावट के घोटाले से अवगत कराया है। वहीं ट्रांसपोर्टरों की शिकायत पर सीएम फ्लाइंग ने भी मामले में संज्ञान लेते हुए रोहतक मुख्यालय द्वारा जांच पड़ताल आरंभ कर दी है।
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ट्रांसपोर्टरों ने मंडियों में गेहूं और सरसों खरीद में रेत और सूख कचरा मिलावट कर सरकार को करीब पांच करोड़ का चूना लगाने की बात कही है। व्यापारी नेता विजय बंसल टैनी, ट्रांसपोर्टर कालु व अन्य ने बताया कि हैफेड और एचडब्ल्यूसी खरीद एजेंसी द्वारा भिवानी और चरखी दादरी जिले में 32 लाख सरसों के कट्टों और करीब 50 लाख गेहूं के कट्टों की खरीद की गई थी। सरकारी खरीद में आढ़तियों को फसल की झराई और साफ सफाई के लिए प्रति कट्टा छह रुपये का भुगतान हुआ था। मगर आढ़तियों और खरीद एजेंसी के अधिकारियों की मिलीभगत से फसल की बिना झराई और सफाई कराए ही भराई कराई गई। जिसमें अधिकांश कच्ची मंडियों (गांव में खरीद केंद्र) में फसल के साथ रेत की भी भारी मात्रा में भराई कर सरकार को मोटा चूना लगाया है। खरीद के बाद लगभग सभी भंडारण केंद्रों पर रेत और सूखा कचरा मिलावट की पोल जांच में खुल जाएगी।
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60 फीसदी हैफेड और 40 एचडब्ल्यूसी ने की थी फसल खरीद
सीजन के दौरान अप्रैल माह से हैफेड ने किसानों की 60 फीसदी सरसों और गेहूं फसल की खरीद की थी। जबकि 40 फीसदी फसल की खरीद एचडब्ल्यूसी द्वारा की गई थी। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार दोनों ही खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की मिलीभगत से मिलावटखोरी का काला धंधा चलाया गया और फिर सभी गोदामों में सरसों और खुले में गेहूं का भंडारण करा दिया। रेत और सूखा कचरा मिलावट के अगर सैंपल जांच निर्धारित लैब से कराए जाएंगे तो पूरा गोलमाल और गड़बड़झाले का खुलासा हो जाएगा।
खरीद के दौरान नहीं थे अधिकांश आढ़तियों के पास झराई के प्रबंध
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि जिस समय सरकार द्वारा आढ़तियों के माध्यम से किसानों की सरसों और गेहूं फसल खरीद कराई गई, उस समय अधिकांश आढ़तियों के पास झराई के लिए पंखे की व्यवस्था तक नहीं थी, लेबर से नाममात्र सफाई कराई गई, लेकिन तुलाई के दौरान झार लगाया गया सूख कचरा भी मिलावट करा दिया गया।
सीएम फ्लाइंग ने भी शुरू कर दी पड़ताल
सीएम फ्लाइंग रोहतक मुख्यालय के डीएसपी ने भी ढुलाई ट्रांसपोर्टरों की सरसों में मिलावटखोरी की पड़ताल शुरू कर दी है। ट्रांसपोर्टरों से भी इस संबंध में काफी तथ्य जुटाए जा रहे हैं और संभावित गोदामों के ठिकानों की भी सटीक जानकारी जुटाई गई है।

वर्जन-
भंडारण में मौजूद सरसों और गेहूं में मिलावटखोरी की शिकायत दी गई है। इसकी व्यापक स्तर पर जांच कराएंगे। जांच के बाद ही इस संबंध में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- डी.के बेहरा, मैनेजिंग डायरेक्टर हैफेड चंडीगढ़ मुख्यालय।
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