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Bhiwani News: 40 साल बाद सहपाठियों को साथ मिलाने वाला खुद हो गया दुनिया से रुखसत
Sat, 12 Sep 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:29 AM IST
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गोगानवमी पर अपने दोस्तों के संग विष्णु पच्चीसिया। स्रोत: स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
बहल। 40 साल बाद बहल में गोगा मेले में पांच सितंबर को पुरानी याद ताजा हो गईं। मौका था 1977 के सहपाठियों का एक साथ, एक जगह एकजुट होना। वर्ष 1977 के सहपाठियों को बहल में बुलाकर उनका मेल-मिलाप कराने में बहल निवासी व्यवसायी विष्णु पच्चीसिया की अहम भूमिका रही।
वह सहपाठियों के साथ सुनहरे क्षण बिताने के बाद घर नहीं लौट पाए। उनकी हृदयाघात से मौत हो गई। बहल के राजकीय विद्यालय में 10वीं परीक्षा में सहपाठी रहे व्यवसाय को लेकर देश के दूसरे शहरों में रहने लग गए थे। इनमें एक विष्णु पच्चीसिया (63) भी थे जो परिवार सहित बैंगलूरू चले गए थे। वह चाहते थे कि सभी सहपाठी एक दिन किसी खास आयोजन पर एकत्रित हों और बहल में बिताए पलों को याद करें।
इसके लिए उन्होंने गोगा नवमी का दिन चुना और एक-एक सहपाठी को आने का न्योता दिया। विष्णु के प्रयास से गुवाहाटी से विष्णुकांत साबू, दिल्ली से संतलाल गुगलवा, हिसार से चेतराम सैनी, बहल से डॉ. सुनील चावला, अतर सिंह मेचु, हिसार से डॉ. सुबेसिंह, बैंगलोर से सत्यवीर बांगड़वा, पवन सोनी सहित अन्य दोस्त एकत्रित हुए।
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सबने गोगा पर्व पर साथ रहकर अपनी कामयाबी की कहानी सुनाई और शाम को कुश्ती दंगल देखा। रात को सबने अपने-अपने शहरों में जाने के लिए विदाई ली। सबको मिलाने वाले सहपाठी विष्णु पच्चीसिया अपने घर नहीं जा सके।
वह बहल से नोहर ससुराल गए और वहां से 8 सितंबर को बहन के घर दिल्ली में रुके, वहीं उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। जब सूचना उनके दोस्तों को मिली तो सबने शोक जताते हुए कहा कि 40 साल बाद सबको मिलाने वाला खुद चुपचाप दुनिया से रुखसत हो गया।
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बहल। 40 साल बाद बहल में गोगा मेले में पांच सितंबर को पुरानी याद ताजा हो गईं। मौका था 1977 के सहपाठियों का एक साथ, एक जगह एकजुट होना। वर्ष 1977 के सहपाठियों को बहल में बुलाकर उनका मेल-मिलाप कराने में बहल निवासी व्यवसायी विष्णु पच्चीसिया की अहम भूमिका रही।
वह सहपाठियों के साथ सुनहरे क्षण बिताने के बाद घर नहीं लौट पाए। उनकी हृदयाघात से मौत हो गई। बहल के राजकीय विद्यालय में 10वीं परीक्षा में सहपाठी रहे व्यवसाय को लेकर देश के दूसरे शहरों में रहने लग गए थे। इनमें एक विष्णु पच्चीसिया (63) भी थे जो परिवार सहित बैंगलूरू चले गए थे। वह चाहते थे कि सभी सहपाठी एक दिन किसी खास आयोजन पर एकत्रित हों और बहल में बिताए पलों को याद करें।
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इसके लिए उन्होंने गोगा नवमी का दिन चुना और एक-एक सहपाठी को आने का न्योता दिया। विष्णु के प्रयास से गुवाहाटी से विष्णुकांत साबू, दिल्ली से संतलाल गुगलवा, हिसार से चेतराम सैनी, बहल से डॉ. सुनील चावला, अतर सिंह मेचु, हिसार से डॉ. सुबेसिंह, बैंगलोर से सत्यवीर बांगड़वा, पवन सोनी सहित अन्य दोस्त एकत्रित हुए।
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सबने गोगा पर्व पर साथ रहकर अपनी कामयाबी की कहानी सुनाई और शाम को कुश्ती दंगल देखा। रात को सबने अपने-अपने शहरों में जाने के लिए विदाई ली। सबको मिलाने वाले सहपाठी विष्णु पच्चीसिया अपने घर नहीं जा सके।
वह बहल से नोहर ससुराल गए और वहां से 8 सितंबर को बहन के घर दिल्ली में रुके, वहीं उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। जब सूचना उनके दोस्तों को मिली तो सबने शोक जताते हुए कहा कि 40 साल बाद सबको मिलाने वाला खुद चुपचाप दुनिया से रुखसत हो गया।