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Bhiwani News: सुरक्षा के इंतजाम खस्ताहाल, जोखिम में बच्चों का स्कूली सफर
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तोशाम की निजी स्कूल बस का टूटा फर्श जिससे बच्ची फंसने का हादसा हुआ।
भिवानी। जिले में बच्चों का स्कूल तक पहुंचने का सफर सुरक्षित होने के बजाय जोखिम भरा बना हुआ है। निजी स्कूलों के कई वाहन सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर सड़कों पर दौड़ रहे हैं वहीं सरकारी स्कूलों में शुरू की गई मुफ्त परिवहन सुविधा का भी अधिकांश पात्र विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिल रहा है।
वीरवार को तोशाम क्षेत्र में स्कूल बस के टूटे फर्श में चार वर्षीय बच्ची के फंसने की घटना ने व्यवस्था की पोल खोल दी। भिवानी जिले में पहली से 12वीं कक्षा तक करीब ढाई लाख बच्चों के लिए 756 सरकारी स्कूल संचालित हैं। इनमें पीएमश्री और मॉडल संस्कृति विद्यालय भी शामिल हैं। बवानीखेड़ा खंड के करीब 80 सरकारी स्कूलों में इसी शैक्षणिक सत्र से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एक किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए घर से स्कूल और स्कूल से घर तक निशुल्क परिवहन सुविधा शुरू की गई है। इसके बावजूद अधिकांश बच्चे इस सुविधा से वंचित हैं।
दूसरी ओर निजी विद्यालयों के कई वाहन भी बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। वीरवार को तोशाम क्षेत्र के एक निजी स्कूल की बस के टूटे फर्श में चार वर्षीय मौसम का गला फंस गया और वह पिछले टायर तक पहुंच गई। उसकी जान मुश्किल से बची। जिले में कई अन्य स्कूली वाहनों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आ रही है।
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जिले में पहले भी स्कूली वाहनों से जुड़े हादसों में मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसी घटनाओं के बावजूद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके लिए जिला स्तर पर कमेटी भी गठित है जिसमें पांच से छह विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
इसके बावजूद कई वाहनों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं और वाहनों की तलहटी तक सुरक्षित नहीं है। तलहटी टूटने से बच्चों की जान को सीधा खतरा बना रहता है।
योजना का भी नहीं मिल रहा लाभ
हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान सरकारी स्कूलों के पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मुफ्त यात्रा सुविधा दी जा रही है। एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए घर से स्कूल और स्कूल से घर तक परिवहन की व्यवस्था की गई है। भिवानी जिले में यह सुविधा बवानीखेड़ा खंड के करीब 80 सरकारी विद्यालयों में लागू की गई है।
निजी स्कूल बस के टूटे फर्श की खंड शिक्षा अधिकारी करेंगे जांच
तोशाम खंड के एक निजी विद्यालय की बस के टूटे फर्श में फंसकर पिछले टायर तक पहुंची चार वर्षीय मौसम की जान जोखिम में पड़ने के मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी, तोशाम को सौंपी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के तहत बस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और उसे सड़क पर चलाने के मामले की जांच कर रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को देंगे। इसके बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के माध्यम से बिना सुरक्षा मानकों के निजी स्कूल बस के संचालन को लेकर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार बस का फर्श टूटना गंभीर लापरवाही है। जांच में वाहन की पासिंग और अन्य सुरक्षा मानकों को भी शामिल किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बवानीखेड़ा खंड के सभी सरकारी स्कूलों में एक किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाले पात्र विद्यार्थियों को सरकार की ओर से घर से स्कूल और स्कूल से घर तक मुफ्त परिवहन सुविधा दी जा रही है। तोशाम के निजी स्कूल बस हादसे की जांच खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कराई जाएगी। इसमें सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. निर्मल दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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वीरवार को तोशाम क्षेत्र में स्कूल बस के टूटे फर्श में चार वर्षीय बच्ची के फंसने की घटना ने व्यवस्था की पोल खोल दी। भिवानी जिले में पहली से 12वीं कक्षा तक करीब ढाई लाख बच्चों के लिए 756 सरकारी स्कूल संचालित हैं। इनमें पीएमश्री और मॉडल संस्कृति विद्यालय भी शामिल हैं। बवानीखेड़ा खंड के करीब 80 सरकारी स्कूलों में इसी शैक्षणिक सत्र से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एक किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए घर से स्कूल और स्कूल से घर तक निशुल्क परिवहन सुविधा शुरू की गई है। इसके बावजूद अधिकांश बच्चे इस सुविधा से वंचित हैं।
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दूसरी ओर निजी विद्यालयों के कई वाहन भी बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। वीरवार को तोशाम क्षेत्र के एक निजी स्कूल की बस के टूटे फर्श में चार वर्षीय मौसम का गला फंस गया और वह पिछले टायर तक पहुंच गई। उसकी जान मुश्किल से बची। जिले में कई अन्य स्कूली वाहनों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आ रही है।
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जिले में पहले भी स्कूली वाहनों से जुड़े हादसों में मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसी घटनाओं के बावजूद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके लिए जिला स्तर पर कमेटी भी गठित है जिसमें पांच से छह विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
इसके बावजूद कई वाहनों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं और वाहनों की तलहटी तक सुरक्षित नहीं है। तलहटी टूटने से बच्चों की जान को सीधा खतरा बना रहता है।
योजना का भी नहीं मिल रहा लाभ
हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान सरकारी स्कूलों के पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मुफ्त यात्रा सुविधा दी जा रही है। एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए घर से स्कूल और स्कूल से घर तक परिवहन की व्यवस्था की गई है। भिवानी जिले में यह सुविधा बवानीखेड़ा खंड के करीब 80 सरकारी विद्यालयों में लागू की गई है।
निजी स्कूल बस के टूटे फर्श की खंड शिक्षा अधिकारी करेंगे जांच
तोशाम खंड के एक निजी विद्यालय की बस के टूटे फर्श में फंसकर पिछले टायर तक पहुंची चार वर्षीय मौसम की जान जोखिम में पड़ने के मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी, तोशाम को सौंपी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के तहत बस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और उसे सड़क पर चलाने के मामले की जांच कर रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को देंगे। इसके बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के माध्यम से बिना सुरक्षा मानकों के निजी स्कूल बस के संचालन को लेकर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार बस का फर्श टूटना गंभीर लापरवाही है। जांच में वाहन की पासिंग और अन्य सुरक्षा मानकों को भी शामिल किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बवानीखेड़ा खंड के सभी सरकारी स्कूलों में एक किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाले पात्र विद्यार्थियों को सरकार की ओर से घर से स्कूल और स्कूल से घर तक मुफ्त परिवहन सुविधा दी जा रही है। तोशाम के निजी स्कूल बस हादसे की जांच खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कराई जाएगी। इसमें सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. निर्मल दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।