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Bhiwani News: पीड़ित किशोरी ने दिया स्वस्थ लड़के को जन्म
Sun, 04 Feb 2024 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 04 Feb 2024 11:50 PM IST
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भिवानी। भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल में रविवार को 15 साल की एक किशोरी ने स्वस्थ लड़के को जन्म दिया है। चरखी दादरी की इस लड़की के साथ एक युवक ने दुष्कर्म किया था। जिसके खिलाफ चरखी दादरी पुलिस में केस दर्ज है। वहीं पिछले एक माह से ये लड़की भिवानी के बाल सेवा आश्रम में रह रही थी।
जब लड़की को प्रसव पीड़ा होने लगी तो आश्रम की महिला वार्डन व अन्य कर्मचारी उसे लेकर जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति ठीक बताई जा रही है। वहीं अस्पताल में दोनों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
वहीं बाल सेवा आश्रम के अधीक्षक कृष्ण कुमार ने महिला पुलिस थाना में जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के लिए अस्पताल में दो महिला सुरक्षा कर्मचारियों के लिए भी गुजारिश की है। फिलहाल मामले की जांच दादरी पुलिस कर रही है।इस संबंध में चरखी दादरी बाल कल्याण समिति को भी अवगत करा दिया है। आगे की कार्रवाई सीडब्ल्यूसी दादरी ही करेगी।
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किसी भी नाबालिग लड़की द्वारा बच्चे को जन्म देने के बाद उससे रखने के संबंध में निर्णय लेने का हक उसे व उसके अभिभावकों को है। अगर वे बच्चा नहीं रखना चाहते हैं तो फिर उसे गोद देने की प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है। जिसकी प्रक्रिया मुख्यालय से ही होती है। इस संबंध में चरखी दादरी बाल कल्याण समिति को भी सूचित किया जाएगा। बाल कल्याण समिति ही बच्चे के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लेगी। -संदीप कुमार बाल संरक्षण अधिकारी भिवानी।
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जब लड़की को प्रसव पीड़ा होने लगी तो आश्रम की महिला वार्डन व अन्य कर्मचारी उसे लेकर जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति ठीक बताई जा रही है। वहीं अस्पताल में दोनों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
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वहीं बाल सेवा आश्रम के अधीक्षक कृष्ण कुमार ने महिला पुलिस थाना में जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के लिए अस्पताल में दो महिला सुरक्षा कर्मचारियों के लिए भी गुजारिश की है। फिलहाल मामले की जांच दादरी पुलिस कर रही है।इस संबंध में चरखी दादरी बाल कल्याण समिति को भी अवगत करा दिया है। आगे की कार्रवाई सीडब्ल्यूसी दादरी ही करेगी।
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किसी भी नाबालिग लड़की द्वारा बच्चे को जन्म देने के बाद उससे रखने के संबंध में निर्णय लेने का हक उसे व उसके अभिभावकों को है। अगर वे बच्चा नहीं रखना चाहते हैं तो फिर उसे गोद देने की प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है। जिसकी प्रक्रिया मुख्यालय से ही होती है। इस संबंध में चरखी दादरी बाल कल्याण समिति को भी सूचित किया जाएगा। बाल कल्याण समिति ही बच्चे के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लेगी। -संदीप कुमार बाल संरक्षण अधिकारी भिवानी।