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पांच हजार दुग्ध उत्पादकों के छह करोड़ अटके
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भिवानी। हांसी रोड स्थित मिल्क प्लांट में बुधवार को दुग्ध समिति संचालकों की बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर दुग्ध उत्पादकों ने नारेबाजी कर रोष जताया। आक्रोशित बीएमसी संचालकों व दुग्ध उत्पादकों ने आरोप लगाया कि पिछले सौ दिनों से करीब पांच हजार दुग्ध समितियों का करीब छह करोड़ रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं दुग्ध उत्पादकों को मुख्यमंत्री प्रोत्साहन राशि भी नहीं मिल रही है। इस संबंध में मिल्क यूनियन रोहतक को भी अवगत करा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कोई समाधान नहीं हुआ है।
भिवानी व चरखी दादरी जिला की करीब पांच हजार दुग्ध समितियां बीएमसी के माध्यम से मिल्क प्लांट भिवानी से जुड़ी हैं। मिल्क प्लांट भिवानी के जरिए दुग्ध समितियों का बीएमसी के माध्यम से लाखों लीटर दूध रोहतक मिल्क प्लांट में भेजा जाता है। दुग्ध उत्पादकों का आरोप है कि पिछले सौ दिनों से उनका कोई भुगतान नहीं किया गया है। ये राशि भी अब छह करोड़ के बकाया तक पहुंच चुकी है। दुग्ध उत्पादकों के सामने भूखों मरने की नौबत आ रही है। वहीं पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। जबकि हर 10 दिन में दुग्ध समितियों को उनके बकाया भुगतान का प्रावधान किया हुआ है। दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि उनका इसके अलावा और कोई अन्य रोजगार भी नहीं है।
वर्जन-
दुग्ध समितियों का करीब छह करोड़ का बकाया है। मिल्क प्लांट के समक्ष इंडियन आर्मी से करीब 20 करोड़ रुपये का बजट आना है और आंगनबाड़ी व मिड डे मील से भी पैसा आना है। कोविड की वजह से हालात तंग हैं, जैसे ही राशि आएगी, प्राथमिकता के आधार पर दुग्ध समितियों का बकाया भुगतान कराया जाएगा।
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- चरण सिंह, सीईओ, मिल्क प्लांट, रोहतक।
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भिवानी व चरखी दादरी जिला की करीब पांच हजार दुग्ध समितियां बीएमसी के माध्यम से मिल्क प्लांट भिवानी से जुड़ी हैं। मिल्क प्लांट भिवानी के जरिए दुग्ध समितियों का बीएमसी के माध्यम से लाखों लीटर दूध रोहतक मिल्क प्लांट में भेजा जाता है। दुग्ध उत्पादकों का आरोप है कि पिछले सौ दिनों से उनका कोई भुगतान नहीं किया गया है। ये राशि भी अब छह करोड़ के बकाया तक पहुंच चुकी है। दुग्ध उत्पादकों के सामने भूखों मरने की नौबत आ रही है। वहीं पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। जबकि हर 10 दिन में दुग्ध समितियों को उनके बकाया भुगतान का प्रावधान किया हुआ है। दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि उनका इसके अलावा और कोई अन्य रोजगार भी नहीं है।
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दुग्ध समितियों का करीब छह करोड़ का बकाया है। मिल्क प्लांट के समक्ष इंडियन आर्मी से करीब 20 करोड़ रुपये का बजट आना है और आंगनबाड़ी व मिड डे मील से भी पैसा आना है। कोविड की वजह से हालात तंग हैं, जैसे ही राशि आएगी, प्राथमिकता के आधार पर दुग्ध समितियों का बकाया भुगतान कराया जाएगा।
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- चरण सिंह, सीईओ, मिल्क प्लांट, रोहतक।