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सेना दिवस पर विशेष: हर युद्ध में बापोड़ा के जवानों ने लिया सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 11:18 PM IST
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In every war, the soldiers of Bapoda took iron from the enemies on the borders
भिवानी। गांव बापोड़ा की मिट्टी ने भारत माता की रक्षा के लिए कई ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने न केवल अपने अदम्य साहस से दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए, बल्कि देश के हर युद्ध में अपनी दमदार उपस्थिति भी दर्ज कराई। जो आज भी इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से लिखी है। बापोड़ा के सेना के सर्वोच्च सम्मान से मरणोपरांत नवाजे गए वीर चक्र माथन सिंह भी गांव बापोड़ा के वीर सपूत थे, जिनके नाम पर भिवानी में रेलवे जंक्शन बना हुआ है।
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गांव बापोड़ा में स्थापित किया 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाला टी-55 टैंक भी गांव के वीरों की गाथा को बयां कर रहा है। टैंक का अनावरण भी पूर्व जनरल वीके सिंह ने अपने हाथों से किया था। भिवानी से मात्र साढ़े छह किलोमीटर दूर गांव बापोड़ा सैनिकों का गांव है। इसमें हर दूसरे घर से सैनिक देश की सेवा कर रहा है या फिर अपनी सेवा देकर वीरता के किस्से लेकर गांव लौटा है।
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बापोड़ा से ही अमर शहीद प्रताप सिंह रहे हैं। जबकि बीएसएफ के पहले डीआईजी एसपीएस तंवर भी बापोड़ा से हैं। वीर चक्र कर्नल बृजपाल सिंह, वीर चक्र माथन सिंह का अदम्य साहस भी गांव की हर गली कूचे में गूंज रहा है। भारतीय थल सेना अध्यक्ष के पद पर रहे जनरल वीके सिंह का नाता भी बापोड़ा से है। इसके अलावा नेवी और एयर फोर्स में भी गांव के काफी युवा देश सेवा में लगे हैं। गांव बापोड़ा वीरों के गांव के नाम से भी जाना जाता है। जहां गांव की आबादी महज करीब 13 हजार हैं, लेकिन यहां सैनिकों और पूर्व सैनिकों की संख्या भी ढाई से तीन हजार है। इसमें कई बड़े सैन्य अधिकारी भी रह चुके हैं। देश की आजादी के बाद जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें इस गांव के शहीदों का नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में भी दर्ज हुआ है। वहीं कई वीरों की छाती पर वीरता के तगमे भी लगे हैं।
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गांव के नवीन जयहिंद और सुरेश शर्मा का कहना है कि बापोड़ा गांव सैनिकों का गांव है। इसी वजह से गांव की मुख्य गेट पर ही 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध में इस्तेमाल टी-50 टैंक गांव में स्थापित किया गया है। ये गांव के वीरों के प्रति बड़ा सम्मान है।
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