{"_id":"66cf601c90e9c4b9af06ca07","slug":"if-players-of-the-state-get-more-facilities-then-the-number-of-medals-will-increase-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-122320-2024-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: प्रदेश के खिलाड़ियों को मिले ज्यादा सुविधा तो बढ़ेगी पदकों की संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: प्रदेश के खिलाड़ियों को मिले ज्यादा सुविधा तो बढ़ेगी पदकों की संख्या
Wed, 28 Aug 2024 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 28 Aug 2024 11:06 PM IST
विज्ञापन
मुक्केबाज सोनिया।
भिवानी। प्रदेश की सरकार खिलाड़ियों के लिए घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी करती है। परंतु धरातल पर इसकी हकीकत तो कुछ और ही है। प्रदेश के खिलाड़ियों को ज्यादा सुविधाएं दी जाए तो पदकाें संख्या भी बढ़ जाएगी। यह बात द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच जगदीश ने दी।
उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल में सरकार ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय खिलाड़ी को नौकरी नहीं दी है। यहां तक के द्रोणाचार्य अवॉर्डी भिवानी बॉक्सिंग क्लब के जगदीश कोच के 11 खिलाड़ियों को अभी तक इनामी राशि भी नहीं दी गई है। इस वजह से खिलाड़ी दर-दर की टोकरी खाने को मजबूर हो गए हैं।
दरअसल, 29 अगस्त को हर साल हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद की जयंती को खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। कोच जगदीश ने बताया कि एक समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देश में बहुत मान सम्मान दिया जाता था। मगर आज के समय में यह सब केवल दिखावा रह गया है।
विज्ञापन
मौजूदा समय में हालात यह है कि वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ियों की भी कोई पूछ नहीं हो रही है। उन्हें नौकरी के लिए डर-डर की ठोकरे खानी पड़ रही हैं। खेल में खिलाड़ियों को जो सुविधा मिलनी चाहिए। वह नहीं मिल रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन गेम के लिए सरकार विदेशी कोच पर भरोसा दिखाती हैं और उन्हें महंगी कीमत देकर खिलाड़ियों के लिए लाते हैं। फिर भी खिलाड़ी मेडल नहीं ला पाते हैं। इस बार ओलंपिक में मुक्केबाज में कोई मेडल नहीं आया इसकी जवाबदेही किसी की नहीं है।
2021 के बाद नहीं मिला भी अवॉर्ड
द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच जगदीश ने बताया कि सरकार की पॉलिसी के तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। मगर साल 2021 के बाद से अभी तक किसी भी खिलाड़ी को इस अवॉर्ड से सम्मानित नहीं किया गया है और बड़े टूर्नामेंट में मेडल नहीं आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार की एक और पॉलिसी है। जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेडल प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के लिए इनामी राशि तय की हुई है। मगर अब यह भी खिलाड़ियों को नहीं मिल रहे हैं।
पुलिस भर्ती में नहीं मिल रहा स्पोर्ट्स कोटा
कोच जगदीश ने बताया कि सरकार की तरफ से अब जो पुलिस भर्ती निकाली जा रही है। उसमें स्पोर्ट्स कोटा बहुत कम या फिर नहीं दिया जा रहा। इस बार जो पुलिस भर्ती निकली है। उसमें खिलाड़ियों के लिए ईटी टेस्ट रखा गया है। सरकार को इस पर फिर से सोचना चाहिए।
मैं खुद द्रोणाचार्य अवॉर्डी हूं और भिवानी बॉक्सिंग क्लब में खिलाड़ियों को बॉक्सिंग की बारीकियां सीखा रहा हूं। मगर सरकार द्वारा खिलाड़ियों के साथ किए जा रहे रवैया से मैं खुश नहीं हूं। मेरे 11 खिलाड़ियों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल है। मगर अभी तक जो इनामी राशि उन्हें देनी चाहिए थी वह नहीं मिली है। इसके लिए मैं अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। मुझे संसद में भी घुसने ही नहीं दे रहे। अगर मेरे साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है तो अन्य खिलाड़ियों के साथ सरकार कैसा व्यवहार करती होगी।
- कोच जगदीश सिंह, द्रोणाचार्य अवॉर्डी।
मैं 2018 वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर पदक विजेता हूं। सरकार की उसे दौरान की पॉलिसी के हिसाब से मुझे भी ग्रुप बी में नौकरी मिलनी चाहिए थी। परंतु 2021 में जब पॉलिसी बदली तो उसके हिसाब से वह मुझे ग्रुप सी की नौकरी दे रहे हैं। सरकार ने मेरे साथ नाइंसाफी की है। इंसाफ के लिए मैं हाई कोर्ट तक अर्जी लगा चुकी हूं पर मेरी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
- मुक्केबाज सोनिया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल में सरकार ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय खिलाड़ी को नौकरी नहीं दी है। यहां तक के द्रोणाचार्य अवॉर्डी भिवानी बॉक्सिंग क्लब के जगदीश कोच के 11 खिलाड़ियों को अभी तक इनामी राशि भी नहीं दी गई है। इस वजह से खिलाड़ी दर-दर की टोकरी खाने को मजबूर हो गए हैं।
विज्ञापन
दरअसल, 29 अगस्त को हर साल हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद की जयंती को खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। कोच जगदीश ने बताया कि एक समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देश में बहुत मान सम्मान दिया जाता था। मगर आज के समय में यह सब केवल दिखावा रह गया है।
विज्ञापन
मौजूदा समय में हालात यह है कि वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ियों की भी कोई पूछ नहीं हो रही है। उन्हें नौकरी के लिए डर-डर की ठोकरे खानी पड़ रही हैं। खेल में खिलाड़ियों को जो सुविधा मिलनी चाहिए। वह नहीं मिल रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन गेम के लिए सरकार विदेशी कोच पर भरोसा दिखाती हैं और उन्हें महंगी कीमत देकर खिलाड़ियों के लिए लाते हैं। फिर भी खिलाड़ी मेडल नहीं ला पाते हैं। इस बार ओलंपिक में मुक्केबाज में कोई मेडल नहीं आया इसकी जवाबदेही किसी की नहीं है।
2021 के बाद नहीं मिला भी अवॉर्ड
द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच जगदीश ने बताया कि सरकार की पॉलिसी के तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। मगर साल 2021 के बाद से अभी तक किसी भी खिलाड़ी को इस अवॉर्ड से सम्मानित नहीं किया गया है और बड़े टूर्नामेंट में मेडल नहीं आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार की एक और पॉलिसी है। जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेडल प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के लिए इनामी राशि तय की हुई है। मगर अब यह भी खिलाड़ियों को नहीं मिल रहे हैं।
पुलिस भर्ती में नहीं मिल रहा स्पोर्ट्स कोटा
कोच जगदीश ने बताया कि सरकार की तरफ से अब जो पुलिस भर्ती निकाली जा रही है। उसमें स्पोर्ट्स कोटा बहुत कम या फिर नहीं दिया जा रहा। इस बार जो पुलिस भर्ती निकली है। उसमें खिलाड़ियों के लिए ईटी टेस्ट रखा गया है। सरकार को इस पर फिर से सोचना चाहिए।
मैं खुद द्रोणाचार्य अवॉर्डी हूं और भिवानी बॉक्सिंग क्लब में खिलाड़ियों को बॉक्सिंग की बारीकियां सीखा रहा हूं। मगर सरकार द्वारा खिलाड़ियों के साथ किए जा रहे रवैया से मैं खुश नहीं हूं। मेरे 11 खिलाड़ियों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल है। मगर अभी तक जो इनामी राशि उन्हें देनी चाहिए थी वह नहीं मिली है। इसके लिए मैं अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। मुझे संसद में भी घुसने ही नहीं दे रहे। अगर मेरे साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है तो अन्य खिलाड़ियों के साथ सरकार कैसा व्यवहार करती होगी।
- कोच जगदीश सिंह, द्रोणाचार्य अवॉर्डी।
मैं 2018 वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर पदक विजेता हूं। सरकार की उसे दौरान की पॉलिसी के हिसाब से मुझे भी ग्रुप बी में नौकरी मिलनी चाहिए थी। परंतु 2021 में जब पॉलिसी बदली तो उसके हिसाब से वह मुझे ग्रुप सी की नौकरी दे रहे हैं। सरकार ने मेरे साथ नाइंसाफी की है। इंसाफ के लिए मैं हाई कोर्ट तक अर्जी लगा चुकी हूं पर मेरी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
- मुक्केबाज सोनिया।