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Bhiwani News: साक्षी का जीत के साथ आगाज, पिता बोले- पूरी उम्मीद है पदक लेकर आएगी
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मुक्केबाज साक्षी।
भिवानी। जापान में चल रहे एशियाई खेलों में मंगलवार सुबह गांव धनाना की बेटी साक्षी ढांडा ने जीत के साथ आगाज करते हुए परिजनों और खेल प्रेमियों को खुशी की सौगात दी। साक्षी ने 51 किलो भारवर्ग में फिलीपींस की मुक्केबाज को हराया। साक्षी के पिता मनोज कुमार ने कहा कि बेटी ने जीत से आगाज कर पदक की उम्मीद जगा दी है। उन्होंने बताया कि साक्षी इस मुकाबले में शुरू से ही जोश में दिखी और विपक्षी खिलाड़ी पर हावी रही। राष्ट्रमंडल खेलों में भी बेटी ने गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया था। उम्मीद है कि एशियाई खेलों में भी बेटी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन बरकरार रखते हुए देश को मेडल दिलाएगी। साक्षी का मैच न केवल परिवार के लोगों ने ग्रामीणों ने भी उत्सुकता के साथ देखा। जीत के साथ ही एक-दूसरे को बधाई देने का दौर शुरू हो गया। परिजनों को रिश्तेदार व पड़ोसियों की तरफ से बधाई मिलने लगी। द्रोणाचार्य अवार्डी कोच जगदीश सिंह ने कहा कि बड़ी खुशी है कि साक्षी ने पहले ही मुकाबले में पेरिस ओलिंपिक की कांस्य पदक विजेता को हरा कर राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से अपनी लय को बरकरार रखा है।
2012 में शुरू किया था मुक्केबाजी का सफर
साक्षी ने वर्ष 2012 में मुक्केबाजी शुरू की थी। भिवानी में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच जगदीश सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं। मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहचान बनाई। 2015 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2017 में युवा विश्व चैंपियन बनीं। वह तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन भी रह चुकी हैं। वर्ष 2022 में भारतीय सेना की मिशन ओलंपिक योजना के तहत हवलदार के रूप में सेना में प्रवेश किया।
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2012 में शुरू किया था मुक्केबाजी का सफर
साक्षी ने वर्ष 2012 में मुक्केबाजी शुरू की थी। भिवानी में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच जगदीश सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं। मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहचान बनाई। 2015 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2017 में युवा विश्व चैंपियन बनीं। वह तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन भी रह चुकी हैं। वर्ष 2022 में भारतीय सेना की मिशन ओलंपिक योजना के तहत हवलदार के रूप में सेना में प्रवेश किया।
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