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Bhiwani News: अमृत सरोवर योजना में सरकार ने पीछे खींचे हाथ, अब नए एस्टीमेट लेने बंद
Fri, 29 Sep 2023 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 29 Sep 2023 11:04 PM IST
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अधूरा पड़ा गांव चांग के तालाब का कार्य।
भिवानी। अमृत सरोवर योजना में हरियाणा सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं, जिसके बाद पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों से नए एस्टीमेट लेने बंद कर दिए हैं। भिवानी जिले में 50 करोड़ के बजट से 61 तालाबों का अमृत सरोवर योजना के तहत जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।
इससे इन तालाबों की चाहरदीवारी का निर्माण, स्वच्छ पानी की व्यवस्था, चारों तरफ पार्क विकसित करना और पौधे लगाकर वातावरण को हराभरा किया जाना है। वहीं लोगों के सैर सपाटे के लिए पगडंडी भी बनाई जा रही है। कुछ दशक पहले गांव के ये प्राचीन तालाब आसपास के गंदे पानी की वजह से नकारा बन चुके थे।
भिवानी जिले में अमृत सरोवर योजना में करीब सौ से अधिक गांवों के प्राचीन जोहड़ों का जीर्णोद्धार किया जाना है। लेकिन जिले में फिलहाल 61 जोहड़ों का अमृत सरोवर योजना के तहत काम चल रहा है। इन जोहड़ों पर जीर्णोद्धार के लिए जिलेभर में 30 हजार से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड भी बनाए गए हैं। इनमें मनरेगा के मजदूरों से ही काम कराया जाना है। इसमें जोहड़ में मिट्टी की छंटाई और अन्य कार्य कराए जाने हैं।
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भिवानी जिले में जीतवानवास गांव के जोहड़ सहित कई जोहड़ों का काम पूरा भी हो चुका है। जबकि कई जोहड़ों का जीर्णोद्धार का काम इसलिए भी अधर में लटक रहा है, क्योंकि उनका दायरा बढ़ने के साथ एस्टीमेट भी बढ़ गया है। हरियाणा सरकार ने नए जोहड़ के जीर्णोद्धार के एस्टीमेट बंद कर दिए हैं। अधिकारियों को भी स्पष्ट हिदायतें हैं कि पहले चल रहे जोहड़ों का काम पूरा कराया जाए। ऐसे में अधिकारी अब किसी भी गांव के नए जोहड़ को अमृत सरोवर योजना मेंं शामिल नहीं कर रहे हैं, जबकि जिन गांवों में पहले से जो जोहड़ शामिल हैं, उनका कार्य ही जल्द से जल्द पूरा कराने में जुटे हैं। हालांकि इनका बजट भी किस्तों में पहुंच रहा है। इसकी वजह से कार्य में देरी हो रही है।
जीर्णोद्धार के बाद नहीं सुधारी गई गांवों में प्राचीन जोहड़ों की हालत
अमृत सरोवर योजना के तहत कई गांवों में जीर्णोंद्धार के काम कराए जाने के बावजूद भी प्राचीन जोहड़ों के हालात नहीं सुधरे हैं। गांव चांग में अमृत सरोवर योजना के तहत जोहड़ का जीर्णोद्धार नहीं हुआ है। वहीं कई ऐसे गांव हैं जहां लाखों का बजट खर्च किए जाने के बावजूद भी नतीजे नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह ग्राम पंचायतों द्वारा जोहड़ का उचित रखरखाव नहीं किया जा रहा है। ऐसे में फिर से ये जोहड़ अपनी बदहाली की ओर धकेले जा रहे हैं। हालांकि एक जोहड़ पर करीब 40 से 60 लाख तो किसी पर एक करोड़ रुपये तक का भी बजट खर्च किया जा रहा है।
गांव जीतवानवास के जोहड़ का अमृत सरोवर योजना के तहत काम पूरा हो गया है। इसी तरह कई अन्य गांवों में भी काम पूरा हो चुका है। वहीं कुछ जोहड़ों का काम अभी चल रहा है। सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत गांवों से नए जोहड़ों के एस्टीमेट लेने पर रोक लगा दी है, इससे पहले पुराने जोहड़ों का कार्य पूरा किए जाने के निर्देश हैं।
-संभव जैन, कार्यकारी अभियंता पंचायती राज तकनीकी विंग, भिवानी।
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इससे इन तालाबों की चाहरदीवारी का निर्माण, स्वच्छ पानी की व्यवस्था, चारों तरफ पार्क विकसित करना और पौधे लगाकर वातावरण को हराभरा किया जाना है। वहीं लोगों के सैर सपाटे के लिए पगडंडी भी बनाई जा रही है। कुछ दशक पहले गांव के ये प्राचीन तालाब आसपास के गंदे पानी की वजह से नकारा बन चुके थे।
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भिवानी जिले में अमृत सरोवर योजना में करीब सौ से अधिक गांवों के प्राचीन जोहड़ों का जीर्णोद्धार किया जाना है। लेकिन जिले में फिलहाल 61 जोहड़ों का अमृत सरोवर योजना के तहत काम चल रहा है। इन जोहड़ों पर जीर्णोद्धार के लिए जिलेभर में 30 हजार से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड भी बनाए गए हैं। इनमें मनरेगा के मजदूरों से ही काम कराया जाना है। इसमें जोहड़ में मिट्टी की छंटाई और अन्य कार्य कराए जाने हैं।
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भिवानी जिले में जीतवानवास गांव के जोहड़ सहित कई जोहड़ों का काम पूरा भी हो चुका है। जबकि कई जोहड़ों का जीर्णोद्धार का काम इसलिए भी अधर में लटक रहा है, क्योंकि उनका दायरा बढ़ने के साथ एस्टीमेट भी बढ़ गया है। हरियाणा सरकार ने नए जोहड़ के जीर्णोद्धार के एस्टीमेट बंद कर दिए हैं। अधिकारियों को भी स्पष्ट हिदायतें हैं कि पहले चल रहे जोहड़ों का काम पूरा कराया जाए। ऐसे में अधिकारी अब किसी भी गांव के नए जोहड़ को अमृत सरोवर योजना मेंं शामिल नहीं कर रहे हैं, जबकि जिन गांवों में पहले से जो जोहड़ शामिल हैं, उनका कार्य ही जल्द से जल्द पूरा कराने में जुटे हैं। हालांकि इनका बजट भी किस्तों में पहुंच रहा है। इसकी वजह से कार्य में देरी हो रही है।
जीर्णोद्धार के बाद नहीं सुधारी गई गांवों में प्राचीन जोहड़ों की हालत
अमृत सरोवर योजना के तहत कई गांवों में जीर्णोंद्धार के काम कराए जाने के बावजूद भी प्राचीन जोहड़ों के हालात नहीं सुधरे हैं। गांव चांग में अमृत सरोवर योजना के तहत जोहड़ का जीर्णोद्धार नहीं हुआ है। वहीं कई ऐसे गांव हैं जहां लाखों का बजट खर्च किए जाने के बावजूद भी नतीजे नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह ग्राम पंचायतों द्वारा जोहड़ का उचित रखरखाव नहीं किया जा रहा है। ऐसे में फिर से ये जोहड़ अपनी बदहाली की ओर धकेले जा रहे हैं। हालांकि एक जोहड़ पर करीब 40 से 60 लाख तो किसी पर एक करोड़ रुपये तक का भी बजट खर्च किया जा रहा है।
गांव जीतवानवास के जोहड़ का अमृत सरोवर योजना के तहत काम पूरा हो गया है। इसी तरह कई अन्य गांवों में भी काम पूरा हो चुका है। वहीं कुछ जोहड़ों का काम अभी चल रहा है। सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत गांवों से नए जोहड़ों के एस्टीमेट लेने पर रोक लगा दी है, इससे पहले पुराने जोहड़ों का कार्य पूरा किए जाने के निर्देश हैं।
-संभव जैन, कार्यकारी अभियंता पंचायती राज तकनीकी विंग, भिवानी।