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Bhiwani News: फर्जी टिकट बांटने के मामले में परिचालक पर प्राथमिकी दर्ज
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भिवानी। दिल्ली-पिलानी रूट पर चेकिंग के दौरान यात्रियों को फर्जी टिकट जारी करते पकड़े गए रोडवेज परिचालक अंकुर के खिलाफ पांच माह बाद प्राथमिकी दर्ज हुई है। 19 मार्च को निरीक्षण में रोडवेज की टीम ने परिचालक को अनधिकृत मशीन से टिकट जारी करते पकड़ा था। जांच में सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी और फर्जी टिकट छापने का दोषी पाए जाने के बाद डिपो महाप्रबंधक ने पुलिस को शिकायत दी थी।
हरियाणा राज्य परिवहन भिवानी डिपो के महाप्रबंधक दीपक कुंडू ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर परिचालक अंकुर के खिलाफ जाली टिकट बनाने और सरकारी राजस्व के गबन का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार 19 मार्च को पिलानी से दिल्ली जा रही बस में परिचालक अंकुर तैनात था। भिवानी रोडवेज डिपो महाप्रबंधक की अगुवाई में उड़नदस्ता अधिकारी और आईएसबीटी दिल्ली की चेकिंग टीम ने बस का निरीक्षण किया।
इस दौरान परिचालक द्वारा यात्रियों को जीरो बैलेंस टिकट जारी करने का मामला सामने आया। यात्रियों की टिकटों की जांच करने पर पता चला कि परिचालक विभागीय ई-टिकटिंग मशीन के बजाय अन्य अनधिकृत प्रिंटिंग मशीन से टिकट जारी कर रहा था।
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24 मार्च को परिचालक को पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया गया। उसने अनधिकृत प्रिंटिंग मशीन कार्यालय में जमा करवाई जिसे जांच के लिए राज्य परिवहन हरियाणा के निदेशक के पास भेजा गया। जांच में परिचालक को सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी और फर्जी टिकट छापने का दोषी पाया गया। इसके बाद महाप्रबंधक दीपक कुंडू ने पुलिस अधीक्षक को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। औद्योगिक पुलिस थाने के देवेंद्र ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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हरियाणा राज्य परिवहन भिवानी डिपो के महाप्रबंधक दीपक कुंडू ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर परिचालक अंकुर के खिलाफ जाली टिकट बनाने और सरकारी राजस्व के गबन का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार 19 मार्च को पिलानी से दिल्ली जा रही बस में परिचालक अंकुर तैनात था। भिवानी रोडवेज डिपो महाप्रबंधक की अगुवाई में उड़नदस्ता अधिकारी और आईएसबीटी दिल्ली की चेकिंग टीम ने बस का निरीक्षण किया।
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इस दौरान परिचालक द्वारा यात्रियों को जीरो बैलेंस टिकट जारी करने का मामला सामने आया। यात्रियों की टिकटों की जांच करने पर पता चला कि परिचालक विभागीय ई-टिकटिंग मशीन के बजाय अन्य अनधिकृत प्रिंटिंग मशीन से टिकट जारी कर रहा था।
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24 मार्च को परिचालक को पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया गया। उसने अनधिकृत प्रिंटिंग मशीन कार्यालय में जमा करवाई जिसे जांच के लिए राज्य परिवहन हरियाणा के निदेशक के पास भेजा गया। जांच में परिचालक को सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी और फर्जी टिकट छापने का दोषी पाया गया। इसके बाद महाप्रबंधक दीपक कुंडू ने पुलिस अधीक्षक को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। औद्योगिक पुलिस थाने के देवेंद्र ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।