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Bhiwani News: संस्कृत को दैनिक जीवन से जोड़ेंगी छात्राएं
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भिवानी। राजीव गांधी राजकीय महिला महाविद्यालय में छात्राओं में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने और दैनिक जीवन में संस्कृत संवाद की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से संस्कृत संभाषण शिविर शुरू किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. त्रिलोक चंद ने की। मुख्य अतिथि डॉ. सुमन रानी और विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र भारद्वाज रहे, जबकि संस्कृत भारती विस्तारक नीरज कुमार प्रशिक्षक की भूमिका निभाएंगे।
मुख्य अतिथि डॉ. सुमन रानी संस्कृत प्रवक्ता, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र भारद्वाज चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के भारतीय संस्कृति एवं भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।
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प्राचार्य डॉ. त्रिलोक चंद ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की समृद्ध वाहिका है। संस्कृत संभाषण के माध्यम से छात्राएं इसे सरल और सहज रूप में दैनिक जीवन से जोड़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं रही, बल्कि जनसाधारण की भाषा भी रही है। इसके माध्यम से स्वयं और समाज के नैतिक मूल्यों का संवर्धन किया जा सकता है। उन्होंने राजा भोज का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय राजा भी शुद्ध संस्कृत जानते थे।
शिविर के दौरान छात्राओं को संस्कृत में दैनिक जीवन के सामान्य वाक्य, अभिवादन, स्वयं का परिचय, प्रश्नोत्तर, संवाद और व्यावहारिक शब्दावली का अभ्यास कराया जाएगा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. त्रिलोक चंद ने की। मुख्य अतिथि डॉ. सुमन रानी और विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र भारद्वाज रहे, जबकि संस्कृत भारती विस्तारक नीरज कुमार प्रशिक्षक की भूमिका निभाएंगे।
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मुख्य अतिथि डॉ. सुमन रानी संस्कृत प्रवक्ता, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र भारद्वाज चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के भारतीय संस्कृति एवं भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।
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प्राचार्य डॉ. त्रिलोक चंद ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की समृद्ध वाहिका है। संस्कृत संभाषण के माध्यम से छात्राएं इसे सरल और सहज रूप में दैनिक जीवन से जोड़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं रही, बल्कि जनसाधारण की भाषा भी रही है। इसके माध्यम से स्वयं और समाज के नैतिक मूल्यों का संवर्धन किया जा सकता है। उन्होंने राजा भोज का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय राजा भी शुद्ध संस्कृत जानते थे।
शिविर के दौरान छात्राओं को संस्कृत में दैनिक जीवन के सामान्य वाक्य, अभिवादन, स्वयं का परिचय, प्रश्नोत्तर, संवाद और व्यावहारिक शब्दावली का अभ्यास कराया जाएगा।