{"_id":"6148cec38ebc3e482430b20c","slug":"education-40-50-in-government-schools-and-60-percent-in-private-schools-on-the-first-day-bhiwani-news-hsr6122623115","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा: पहले दिन सरकारी स्कूलों में 40.50 तो निजी स्कूलों में 60 फीसदी बच्चे पहुंचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा: पहले दिन सरकारी स्कूलों में 40.50 तो निजी स्कूलों में 60 फीसदी बच्चे पहुंचे
विज्ञापन
01सी फोटो एसआरएस लैब स्कूल में बच्चों के हाथ सैनिटाइज करवाते हुए स्कूल स्टाफ सदस्य। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कोरोना के कहर की वजह से लंबे समय के इंतजार के बाद सोमवार को पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों ने स्कूल में कदम रखा। स्कूल में कदम रखते ही बच्चों के चेहरे खिलखिला उठे। जिले के 447 सरकारी स्कूलों के 28564 बच्चों में से 40.50 फीसदी यानी 12712 बच्चे स्कूल में पहुंचे। वहीं निजी स्कूलों में 20275 बच्चों में से 60 फीसदी यानी 12361 बच्चे स्कूल में पहुंचे हैं। पहले दिन बच्चों का शिक्षकों से परिचय हुआ और अपने दोस्तों के साथ गपशप की। वहीं कई स्कूलों में काफी कम संख्या में बच्चे आए, जिसकी वजह से तीनों कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठा कर पढ़ाई करवाई। स्कूल सुबह नौ बजे से 12 बजे तक खुले।
सेठ किरोड़ीमल राजकीय संस्कृति मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राइमरी विंग इंचार्ज हंसराज चहल ने बताया कि विभाग के आदेशानुसार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर स्कूल में प्रवेश करवाया। पहले दिन तीनों कक्षाओं के करीब 40 बच्चे स्कूलों में पहुंचे। पहला दिन होने के कारण बच्चों की संख्या कम रही है, अब आने वाले दिनों में लगातार संख्या बढ़ेगी। पहले दिन बच्चों के साथ परिचय किया और अनौपचारिक बातचीत की। कोरोना काल के कारण लागू लॉकडाउन में उनसे घर में समय बिताने के बारे में जानकारी ली। बाद में बच्चों को होमवर्क भी दिया।
नियमों की पालना कर हुआ स्कूल में प्रवेश
स्कूल शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार स्कूलों में सैनिटाइजर का छिड़काव कराया गया। अभिभावकों की अनुमति के साथ ही बच्चों का स्कूल में प्रवेश हुआ। प्रवेश द्वार पर ही बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क और ऑक्सीमीटर से जांच की गई। प्रत्येक कक्षा में महज 30 बच्चों के बैठने की व्यवस्था की, जिसमें प्रत्येक बैंच में बच्चे का चाक से नाम लिखा गया। कक्षा में प्रवेश व निकास द्वार की अलग-अलग व्यवस्था की गई। स्कूल में न ही मिड-डे-मिल की व्यवस्था रही और पीने का पानी भी बच्चे अपने साथ ही घर से लेकर आए।
विज्ञापन
वर्जन:
पहले दिन सरकारी स्कूलों में करीब 40 फीसदी बच्चे पहुंचे हैं। स्कूल में सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर की व्यवस्था करवा दी गई थी। अभिभावकों के अनुमति पत्र के बाद ही बच्चों का स्कूल में प्रवेश करवाया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में सभी पर्याप्त व्यवस्था करवाई है।
- रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
विज्ञापन
सेठ किरोड़ीमल राजकीय संस्कृति मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राइमरी विंग इंचार्ज हंसराज चहल ने बताया कि विभाग के आदेशानुसार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर स्कूल में प्रवेश करवाया। पहले दिन तीनों कक्षाओं के करीब 40 बच्चे स्कूलों में पहुंचे। पहला दिन होने के कारण बच्चों की संख्या कम रही है, अब आने वाले दिनों में लगातार संख्या बढ़ेगी। पहले दिन बच्चों के साथ परिचय किया और अनौपचारिक बातचीत की। कोरोना काल के कारण लागू लॉकडाउन में उनसे घर में समय बिताने के बारे में जानकारी ली। बाद में बच्चों को होमवर्क भी दिया।
विज्ञापन
नियमों की पालना कर हुआ स्कूल में प्रवेश
स्कूल शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार स्कूलों में सैनिटाइजर का छिड़काव कराया गया। अभिभावकों की अनुमति के साथ ही बच्चों का स्कूल में प्रवेश हुआ। प्रवेश द्वार पर ही बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क और ऑक्सीमीटर से जांच की गई। प्रत्येक कक्षा में महज 30 बच्चों के बैठने की व्यवस्था की, जिसमें प्रत्येक बैंच में बच्चे का चाक से नाम लिखा गया। कक्षा में प्रवेश व निकास द्वार की अलग-अलग व्यवस्था की गई। स्कूल में न ही मिड-डे-मिल की व्यवस्था रही और पीने का पानी भी बच्चे अपने साथ ही घर से लेकर आए।
विज्ञापन
वर्जन:
पहले दिन सरकारी स्कूलों में करीब 40 फीसदी बच्चे पहुंचे हैं। स्कूल में सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर की व्यवस्था करवा दी गई थी। अभिभावकों के अनुमति पत्र के बाद ही बच्चों का स्कूल में प्रवेश करवाया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में सभी पर्याप्त व्यवस्था करवाई है।
- रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।