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पाबंदी के बावजूद पांच घंटे हुई आतिशबाजी, हवा में घुला जहर
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भिवानी। पाबंदी के बावजूद दिवाली पर करीब पांच घंटे तक शहर में खूब आतिशबाजी हुई और पटाखों के धुएं का जहर हवा में घुल गया। दिवाली पर सांझ ढलते ही प्रदूषण की धुंध छा गई और फिर सांस लेना भी मुश्किल हो गया। वहीं दिवाली के बाद शुक्रवार को एक्यूआई 437 तक पहुंच गया। पिछले दस दिनों में एक्यूआई में 320 का उछाल दर्ज किया है। यह पर्यावरण के साथ-साथ लोगों की सेहत के लिए भी काफी घातक है।
दिवाली पर भिवानी में पटाखा बिक्री और उसकी खरीद पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी थी। पटाखा बिक्री की निगरानी के लिए एसडीएम की अगुवाई में संबंधित अधिकारियों की टीमें भी लगाई गईं। इसके बावजूद शहर में खूब पटाखे बिके। शहर के सिविल लाइन पुलिस थाने से महज चंद कदम दूर पर ही क्राउन प्लाजा के पास पटाखों के स्टॉल सजे और बेचे गए। यहां पर पटाखा बिक्री करने वालों को रोकने वाला कोई नहीं था और न ही पटाखा खरीद करने वालों की कोई कमी नहीं थी।
महालक्ष्मी का हुआ पूजन
दिवाली पर महालक्ष्मी का पूजन कर त्योहार मनाया गया। शुभ मुहूर्त में लोगों ने घरों के अंदर पूरे विधि विधान से महालक्ष्मी व गणेश का पूजन किया। देर रात तक शहर के प्रतिष्ठान खुले रहे। सांझ ढलते ही महालक्ष्मी के पूजन के साथ लोगों ने अपने घरों में दीपक सजाने शुरू कर दिए। वहीं पूजन के बाद शहर मे आतिशबाजी का धुआं उठने लगा।
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117 से सीधे पहुंचा 437 एक्यूआई
दिवाली से पहले हवा में प्रदूषण काफी कम आंका गया। वजह भी साफ थी कि मौसम का मिजाज थोड़ा बदला था और कहीं कहीं पर हल्की बारिश भी हुई थी। मगर दिवाली के नजदीक आते ही एक्यूआई भी लगातार उछाल पर आने लगा। रोजाना ही एक्यूआई में बढ़ोतरी दर्ज होने लगी। दिवाली के दिन एक्यूआई 390 रहा, जबकि अगले दिन पटाखों के हवा में घुले जहर के कारण एक्यूआई 437 तक पहुंच गया। दस दिनों में ही एक्यूआई 320 तक अधिक आंका गया।
गलियों में भी बिखरा था पटाखों का कचरा
दिवाली के अगले दिन की सुबह शहर की गलियों के अंदर भी पटाखों का कचरा बिखरा हुआ था। इसे समेटकर लोगों ने आग के हवाले कर दिया। एक तो पटाखा फूटने से प्रदूषण फिर पटाखों के कचरे को खुले में आग लगाने से उठा धुआं पर्यावरण में लगातार प्रदूषण बढ़ाता चला गया। लोगों को दिवाली पर पटाखे नहीं चलाने के लिए काफी जागरूक किया गया था, मगर पटाखों के शोरगुल में ये जागरूकता भी दबकर रह गई।
11 दिनों ऐसे बढ़ा एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
26 अक्तूबर 117
27 अक्तूबर 192
28 अक्तूबर 226
29 अक्तूबर 265
30 अक्तूबर 285
31 अक्तूबर 225
01 नवंबर 184
02 नवंबर 246
03 नवंबर 278
04 नवंबर 390
05 नवंबर 437
बारिश के बाद ही कम होगा हवा में प्रदूषण का स्तर
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एमएल खिचड़ ने बताया कि हवा में प्रदूषण काफी बढ़ गया है। अगर बारिश होती है तो हवा में प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा। दिवाली में हुई आतिशबाजी और धुएं की वजह से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
सांस के मरीजों को भी हुई परेशानी
हवा में अचानक बढ़े प्रदूषण से सांस के मरीजों को भी काफी दिक्कतें हुईं। प्रदूषण की वजह से सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य का कहना है कि प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियों में मरीजों को दिक्कतें होती हैं। ऐसे मरीज विशेष सावधानी रखें और लोग भी प्रदूषण की बजाय स्वच्छ हवा में सांस तभी ले सकेंगे, जब वे अपनी सेहत के साथ-साथ पर्यावरण की सेहत के प्रति भी जागरूक रहेंगे।
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दिवाली पर भिवानी में पटाखा बिक्री और उसकी खरीद पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी थी। पटाखा बिक्री की निगरानी के लिए एसडीएम की अगुवाई में संबंधित अधिकारियों की टीमें भी लगाई गईं। इसके बावजूद शहर में खूब पटाखे बिके। शहर के सिविल लाइन पुलिस थाने से महज चंद कदम दूर पर ही क्राउन प्लाजा के पास पटाखों के स्टॉल सजे और बेचे गए। यहां पर पटाखा बिक्री करने वालों को रोकने वाला कोई नहीं था और न ही पटाखा खरीद करने वालों की कोई कमी नहीं थी।
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महालक्ष्मी का हुआ पूजन
दिवाली पर महालक्ष्मी का पूजन कर त्योहार मनाया गया। शुभ मुहूर्त में लोगों ने घरों के अंदर पूरे विधि विधान से महालक्ष्मी व गणेश का पूजन किया। देर रात तक शहर के प्रतिष्ठान खुले रहे। सांझ ढलते ही महालक्ष्मी के पूजन के साथ लोगों ने अपने घरों में दीपक सजाने शुरू कर दिए। वहीं पूजन के बाद शहर मे आतिशबाजी का धुआं उठने लगा।
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117 से सीधे पहुंचा 437 एक्यूआई
दिवाली से पहले हवा में प्रदूषण काफी कम आंका गया। वजह भी साफ थी कि मौसम का मिजाज थोड़ा बदला था और कहीं कहीं पर हल्की बारिश भी हुई थी। मगर दिवाली के नजदीक आते ही एक्यूआई भी लगातार उछाल पर आने लगा। रोजाना ही एक्यूआई में बढ़ोतरी दर्ज होने लगी। दिवाली के दिन एक्यूआई 390 रहा, जबकि अगले दिन पटाखों के हवा में घुले जहर के कारण एक्यूआई 437 तक पहुंच गया। दस दिनों में ही एक्यूआई 320 तक अधिक आंका गया।
गलियों में भी बिखरा था पटाखों का कचरा
दिवाली के अगले दिन की सुबह शहर की गलियों के अंदर भी पटाखों का कचरा बिखरा हुआ था। इसे समेटकर लोगों ने आग के हवाले कर दिया। एक तो पटाखा फूटने से प्रदूषण फिर पटाखों के कचरे को खुले में आग लगाने से उठा धुआं पर्यावरण में लगातार प्रदूषण बढ़ाता चला गया। लोगों को दिवाली पर पटाखे नहीं चलाने के लिए काफी जागरूक किया गया था, मगर पटाखों के शोरगुल में ये जागरूकता भी दबकर रह गई।
11 दिनों ऐसे बढ़ा एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
26 अक्तूबर 117
27 अक्तूबर 192
28 अक्तूबर 226
29 अक्तूबर 265
30 अक्तूबर 285
31 अक्तूबर 225
01 नवंबर 184
02 नवंबर 246
03 नवंबर 278
04 नवंबर 390
05 नवंबर 437
बारिश के बाद ही कम होगा हवा में प्रदूषण का स्तर
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एमएल खिचड़ ने बताया कि हवा में प्रदूषण काफी बढ़ गया है। अगर बारिश होती है तो हवा में प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा। दिवाली में हुई आतिशबाजी और धुएं की वजह से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
सांस के मरीजों को भी हुई परेशानी
हवा में अचानक बढ़े प्रदूषण से सांस के मरीजों को भी काफी दिक्कतें हुईं। प्रदूषण की वजह से सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य का कहना है कि प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियों में मरीजों को दिक्कतें होती हैं। ऐसे मरीज विशेष सावधानी रखें और लोग भी प्रदूषण की बजाय स्वच्छ हवा में सांस तभी ले सकेंगे, जब वे अपनी सेहत के साथ-साथ पर्यावरण की सेहत के प्रति भी जागरूक रहेंगे।