{"_id":"5c69b108bdec220c1b1403ac","slug":"41550430472-bhiwani-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फाइनेंस पर ली गाड़ी को को मिलीभगत कर बेचा, दूसरे बैंक से लोन लेने के प्रयास में पकड़ा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फाइनेंस पर ली गाड़ी को को मिलीभगत कर बेचा, दूसरे बैंक से लोन लेने के प्रयास में पकड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। एक फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर वाहन खरीद करने के बाद फर्जी तरीके से आरसी पर लोन उतरवा दिया और किसी दूसरे व्यक्ति को गाड़ी बेच डाली। जब आरोपी ने किसी दूसरे बैंक से फिर से लोन लेने की तैयारी की तो मामला पकड़ में आया। इस मामले में फाइनेंस कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी सहित आरटीए के खिलाफ भी धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के शाख प्रबंधक गुलशन राय ने बताया कि उनकी कंपनी वाहनों पर लोन कराने का काम करती है। कंपनी ने 17 फरवरी 2017 को खानक निवासी ठाकुर सिंह को गाड़ी खरीद पर 6 लाख 27 हजार रुपये का लोन दिया था। जिसका ब्याज एक लाख 22 हजार 891 रुपये लगाया गया था। इस राशि को 22 किस्तों में अदा किया जाना था, मगर आरोपी ने लोन कराने के बाद कुछ किस्तों का ही भुगतान किया। फिर मिलीभगत कर फार्म नंबर 30, 35 फर्जी तैयार करके बिना लोन भरे ही गाड़ी की आरसी से लोन उतरवा लिया। जबकि फर्जी कागजात तैयार कर गाड़ी को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। इस गाड़ी को खरीदने के बाद इक्वीटास स्मोल फाइनेंस बैंक से लोन लिया। इसकी भनक पहली फाइनेंस कंपनी को लगी तो बकाया लोन भरने का अनुरोध किया गया। आरोपी ने लोन भरने से मना कर दिया। इस मामले की शिकायत पुलिस व सीएम विंडों में भी दी गई। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामले को न्यायालय में दायर किया गया। इसी मामले में न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पुलिस को खानक निवासी ठाकर सिंह, राजकुमार, नरेन्द्र व सचिव प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच आरंभ कर दी।
विज्ञापन
भिवानी। एक फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर वाहन खरीद करने के बाद फर्जी तरीके से आरसी पर लोन उतरवा दिया और किसी दूसरे व्यक्ति को गाड़ी बेच डाली। जब आरोपी ने किसी दूसरे बैंक से फिर से लोन लेने की तैयारी की तो मामला पकड़ में आया। इस मामले में फाइनेंस कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी सहित आरटीए के खिलाफ भी धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के शाख प्रबंधक गुलशन राय ने बताया कि उनकी कंपनी वाहनों पर लोन कराने का काम करती है। कंपनी ने 17 फरवरी 2017 को खानक निवासी ठाकुर सिंह को गाड़ी खरीद पर 6 लाख 27 हजार रुपये का लोन दिया था। जिसका ब्याज एक लाख 22 हजार 891 रुपये लगाया गया था। इस राशि को 22 किस्तों में अदा किया जाना था, मगर आरोपी ने लोन कराने के बाद कुछ किस्तों का ही भुगतान किया। फिर मिलीभगत कर फार्म नंबर 30, 35 फर्जी तैयार करके बिना लोन भरे ही गाड़ी की आरसी से लोन उतरवा लिया। जबकि फर्जी कागजात तैयार कर गाड़ी को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। इस गाड़ी को खरीदने के बाद इक्वीटास स्मोल फाइनेंस बैंक से लोन लिया। इसकी भनक पहली फाइनेंस कंपनी को लगी तो बकाया लोन भरने का अनुरोध किया गया। आरोपी ने लोन भरने से मना कर दिया। इस मामले की शिकायत पुलिस व सीएम विंडों में भी दी गई। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामले को न्यायालय में दायर किया गया। इसी मामले में न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पुलिस को खानक निवासी ठाकर सिंह, राजकुमार, नरेन्द्र व सचिव प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच आरंभ कर दी।
विज्ञापन