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गोसेवकों ने नारेबाजी कर जताया रोष, विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। गो सेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के बीच चल रहा विवाद बुधवार को और गर्मा गया। एक युवक ने गाय के बीमार होने की डॉक्टर को सूचना दी तो उसे डीसी आवास बुलाया गया। युवक का आरोप है कि उसे घंटों थाने में बैठाए रखा। वहीं डीसी ने आदेश जारी किए हैं कि पशुओं के घायल या बीमार होने की झूठी सूचना देने वालों पर केस दर्ज करवाया जाएगा। गोसेवकों ने लगातार दूसरे दिन लघु सचिवालय के बाहर धरना देकर रोष जताया। विभिन्न संगठनों ने भी उनका समर्थन किया। वीएलडीए ने बैठक कर चिकित्सकों को अपना समर्थन दिया।
कुछ दिन पूर्व मोर की मौत के बाद से छिड़ा पशु चिकित्सकों और गोसेवकों का विवाद अब जिला प्रशासन के लिए भी परेशानी बन गया है। चिकित्सकों पर लावारिस घायल व बीमार पशुओं का इलाज नहीं करने के विरोध में गोसेवक लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। इलाज नहीं करने वाले चिकित्सकों को सस्पेंड करने, गोसेवकों से मारपीट करने वालों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं पशु चिकित्सक गोसेवकों पर झूठी सूचनाएं देकर बेवजह परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं।
बीमार गाय की सूचना चिकित्सकों को देने पर युवक पहुंचा पुलिस थाने
पीपली वाली जोहड़ी निवासी एक युवक को बीमार गाय की सूचना चिकित्सकों को देना महंगा पड़ गया और उसे कई घंटे थाने में बीताने पड़े। मामला जब मीडिया के सामने आया तो कई घंटों बाद युवक की वेरिफिकेशन करने के बाद पुलिस ने छोड़ा। उससे पहले युवक की मां और दोस्त कभी थाना तो कभी डीसी आवास के चक्कर लगाते रहे।
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जानकारी के अनुसार पीपली वाली जोहड़ी निवासी साहब कौर ने बताया कि उनके घर के पास एक बीमार गाय थी जिसकी सूचना उसके बेटे प्रदीप ने गो रक्षक दल के सदस्य को दी। फोन करने पर गो रक्षक दल के सदस्य ने उसे डॉक्टर का नंबर देते हुए उन्हें सूचना देने के लिए कहा। सूचना देने पर डॉक्टर की जगह वहां पर पुलिस और तहसीलदार पहुंचे। उन्होंने बीमार गाय को गोशाला भेज दिया। तहसीलदार नरेश उसके लड़के प्रदीप को डीसी ऑफिस ले गया। उसके बाद उसे सिविल लाइन थाने में भेज दिया गया। उसके बाद साहब कौर व युवक का दोस्त कभी डीसी आवास तो कभी थाने के चक्कर काटते रहे।
मामले को लेकर गाय को लेने के लिए गए नायाब तहसीलदार नरेश से बात की तो उन्होंने बताया कि डीसी आवास से बीमार गाय के संबंध में फोन आया था। उसने गाय को गोशाला भेज दिया और युवक को डीसी आवास पर छोड़ दिया। उसके बाद युवक को कहां भेजा गया उसे कुछ नहीं पता। सूत्रों की मानें तो मामला मीडिया में आया तो युवक को घंटो थाने में बैठाने के बाद पूछताछ कर छोड़ दिया गया।
बेसहारा गायों के बीमार होने की झूठी सूचना देने वालों पर दर्ज होगा केस
बेसहारा गायों व नंदियों के बीमार अथवा जख्मी-घायल होने की झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। उपायुक्त अंशज सिंह ने बताया कि कई बार लोग उपायुक्त कार्यालय या कैंप ऑफिस कार्यालय में बेसहारा गायों व नंदियों के बीमार होने की सूचना देते हैं। इस पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को मौके पर भेजा जाता है ताकि समय पर उनका उपचार किया जा सका। चिकित्सकों द्वारा सूचना के आधार पर गायों व नंदियों की जांच की जाती है तो सामने आता है कि वे बीमार न होकर सही हालत में होते हैं। इससे अधिकारियों का समय बर्बाद होता है और उनका कार्य प्रभावित होता है। इस प्रकार की झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवाया जाएगा।
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वीएलडीए सदस्यों ने भी पशुपालन अधिकारियों का दिया समर्थन
डिप्लोमा वैटरनरी एसोसिएशन की बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ तथाकथित गोसेवकों द्वारा अभद्र व्यवहार करने को लेकर चर्चा हुई। बैठक में वीएलडीए सदस्यों ने तथाकथित गो सेवकों द्वारा विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की हर रोज ऑडियो व विडियो वायरल करने पर कड़ा रोष जताया।
बैठक बुधवार को हांसी रोड स्थित पॉलीक्लीनिक भिवानी में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला संयोजक कृष्ण कुमार कुमार ने की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिकारियों के निर्देशानुसार वीएलडीए जब पशु का प्राथमिक उपचार करने जाते हैं तब अधिकतर बार तो पशु मौके पर मिलता ही नहीं और मिलता है तो उसे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की जरूरत नहीं होती और बेवजह वहां मौजूद गो सेवक बदतमीजी करने लगते हैं। बैठक में रामफल राहड, कृष्ण शर्मा, जय सिंह, विजेंद्र सिंह, वजीर चहल, राजकुमार, कृष्ण कुमार, अनूप कुमार, पवन शर्मा, सुनील कुमार, राजीव कुमार, राजेश, योगेश ढिकाव, अजय आदि उपस्थित रहे।
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भिवानी। गो सेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के बीच चल रहा विवाद बुधवार को और गर्मा गया। एक युवक ने गाय के बीमार होने की डॉक्टर को सूचना दी तो उसे डीसी आवास बुलाया गया। युवक का आरोप है कि उसे घंटों थाने में बैठाए रखा। वहीं डीसी ने आदेश जारी किए हैं कि पशुओं के घायल या बीमार होने की झूठी सूचना देने वालों पर केस दर्ज करवाया जाएगा। गोसेवकों ने लगातार दूसरे दिन लघु सचिवालय के बाहर धरना देकर रोष जताया। विभिन्न संगठनों ने भी उनका समर्थन किया। वीएलडीए ने बैठक कर चिकित्सकों को अपना समर्थन दिया।
कुछ दिन पूर्व मोर की मौत के बाद से छिड़ा पशु चिकित्सकों और गोसेवकों का विवाद अब जिला प्रशासन के लिए भी परेशानी बन गया है। चिकित्सकों पर लावारिस घायल व बीमार पशुओं का इलाज नहीं करने के विरोध में गोसेवक लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। इलाज नहीं करने वाले चिकित्सकों को सस्पेंड करने, गोसेवकों से मारपीट करने वालों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं पशु चिकित्सक गोसेवकों पर झूठी सूचनाएं देकर बेवजह परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं।
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बीमार गाय की सूचना चिकित्सकों को देने पर युवक पहुंचा पुलिस थाने
पीपली वाली जोहड़ी निवासी एक युवक को बीमार गाय की सूचना चिकित्सकों को देना महंगा पड़ गया और उसे कई घंटे थाने में बीताने पड़े। मामला जब मीडिया के सामने आया तो कई घंटों बाद युवक की वेरिफिकेशन करने के बाद पुलिस ने छोड़ा। उससे पहले युवक की मां और दोस्त कभी थाना तो कभी डीसी आवास के चक्कर लगाते रहे।
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जानकारी के अनुसार पीपली वाली जोहड़ी निवासी साहब कौर ने बताया कि उनके घर के पास एक बीमार गाय थी जिसकी सूचना उसके बेटे प्रदीप ने गो रक्षक दल के सदस्य को दी। फोन करने पर गो रक्षक दल के सदस्य ने उसे डॉक्टर का नंबर देते हुए उन्हें सूचना देने के लिए कहा। सूचना देने पर डॉक्टर की जगह वहां पर पुलिस और तहसीलदार पहुंचे। उन्होंने बीमार गाय को गोशाला भेज दिया। तहसीलदार नरेश उसके लड़के प्रदीप को डीसी ऑफिस ले गया। उसके बाद उसे सिविल लाइन थाने में भेज दिया गया। उसके बाद साहब कौर व युवक का दोस्त कभी डीसी आवास तो कभी थाने के चक्कर काटते रहे।
मामले को लेकर गाय को लेने के लिए गए नायाब तहसीलदार नरेश से बात की तो उन्होंने बताया कि डीसी आवास से बीमार गाय के संबंध में फोन आया था। उसने गाय को गोशाला भेज दिया और युवक को डीसी आवास पर छोड़ दिया। उसके बाद युवक को कहां भेजा गया उसे कुछ नहीं पता। सूत्रों की मानें तो मामला मीडिया में आया तो युवक को घंटो थाने में बैठाने के बाद पूछताछ कर छोड़ दिया गया।
बेसहारा गायों के बीमार होने की झूठी सूचना देने वालों पर दर्ज होगा केस
बेसहारा गायों व नंदियों के बीमार अथवा जख्मी-घायल होने की झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। उपायुक्त अंशज सिंह ने बताया कि कई बार लोग उपायुक्त कार्यालय या कैंप ऑफिस कार्यालय में बेसहारा गायों व नंदियों के बीमार होने की सूचना देते हैं। इस पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को मौके पर भेजा जाता है ताकि समय पर उनका उपचार किया जा सका। चिकित्सकों द्वारा सूचना के आधार पर गायों व नंदियों की जांच की जाती है तो सामने आता है कि वे बीमार न होकर सही हालत में होते हैं। इससे अधिकारियों का समय बर्बाद होता है और उनका कार्य प्रभावित होता है। इस प्रकार की झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवाया जाएगा।
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वीएलडीए सदस्यों ने भी पशुपालन अधिकारियों का दिया समर्थन
डिप्लोमा वैटरनरी एसोसिएशन की बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ तथाकथित गोसेवकों द्वारा अभद्र व्यवहार करने को लेकर चर्चा हुई। बैठक में वीएलडीए सदस्यों ने तथाकथित गो सेवकों द्वारा विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की हर रोज ऑडियो व विडियो वायरल करने पर कड़ा रोष जताया।
बैठक बुधवार को हांसी रोड स्थित पॉलीक्लीनिक भिवानी में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला संयोजक कृष्ण कुमार कुमार ने की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिकारियों के निर्देशानुसार वीएलडीए जब पशु का प्राथमिक उपचार करने जाते हैं तब अधिकतर बार तो पशु मौके पर मिलता ही नहीं और मिलता है तो उसे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की जरूरत नहीं होती और बेवजह वहां मौजूद गो सेवक बदतमीजी करने लगते हैं। बैठक में रामफल राहड, कृष्ण शर्मा, जय सिंह, विजेंद्र सिंह, वजीर चहल, राजकुमार, कृष्ण कुमार, अनूप कुमार, पवन शर्मा, सुनील कुमार, राजीव कुमार, राजेश, योगेश ढिकाव, अजय आदि उपस्थित रहे।