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Bhiwani News: हर कष्ट सहकर, कड़ी मेहनत करके बच्चों को बनाया लायक, अब माता-पिता खुद हो रहे हैं अनाथ
Sat, 15 Jun 2024 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 15 Jun 2024 12:50 AM IST
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अपनाघर आश्रम का गेट।
भिवानी। जिन मां-बाप ने कड़ी मेहनत और हर कष्ट को सहकर खुद भूखे-प्यासे रहकर अपने बच्चों को इतना लायक और कामयाब बना दिया कि वह अपनी जिंदगी अपने दम पर जी सके। परंतु अफसोस की बात यह है कि आज वही बच्चे माता-पिता को देखकर खुश नहीं है। अकेले भिवानी में ही करीब 34 से 35 बुजुर्गों को प्रताड़ित करने के केस दर्ज है। महीने में एक या दो ऐसे केस एसडीएम भिवानी के पास आ रहे हैं।
अगर 10 साल पहले देखा जाए तो साल में मुश्किल से ऐसा एक केस ही आता था। परंतु अब इसकी गिनती बढ़ने लगी है। जो पढ़े-लिखे और अच्छी शिक्षा प्राप्त बच्चे हैं वह भी अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करने लग गए हैं। इन बुजुर्गों के लिए ऐसा कोई ठोस कानून भी नहीं बना है, जिसका उपयोग करके वह अपने साथ हो रहा दुर्व्यवहार को रोक सके।
केस स्टडी नंबर एक
शहर में रहने वाले रामपाल सिंह (काल्पनिक नाम) ने अपने साथ हुई आप बीती बताई है। उन्होंने बैंक में करीब 25 साल नौकरी की है। उनकी खुद की अच्छी संपत्ति थी। उनके दो बेटे वरुण और अरुण है जो की अच्छे से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पहले तो सब कुछ सही चल रहा था लेकिन जैसे वह रिटायर हुए और अपनी संपत्ति बेटों के नाम कर दी तब से वे उन्हें अनदेखा करने लग गए। पिता ने बताया कि उन्होंने मेहनत करके अपने दोनों बच्चों को लायक बना दिया। परंतु आज वही बच्चे उन्हें न खाने के लिए दे रहे हैं और न ही खर्चा पानी दे रहे हैं। इनकी सारी संपत्ति उन्होंने अपने नाम करवा ली। अब वह रामपाल सिंह को इतना परेशान कर रहे हैं कि वह खुद ही घर छोड़ कर चले जाएं। इन्होंने अपने बच्चों के खिलाफ शिकायत की दर्ज करवाई है।
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केस स्टडी नंबर दो
प्रोमिला (काल्पनिक नाम) जिनकी उम्र 65 वर्ष है। वह किसी समय में कॉलेज में प्रोफेसर हुआ करती थीं। उनके चार बच्चे हैं, जिसमें दो बेटा और दो बेटी। जब वह प्रोफेसर की पद से रिटायर हुई तब से उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब कर दी गई कि वह घर छोड़कर चली गई। उनके पास इतना पैसा इतनी दौलत है। जिस पर उनके बच्चों ने कब्जा कर रखा है। उनके बेटे ही नहीं बल्कि उनकी बेटियां भी उन्हें पूछती नहीं थी। कई कई दिन तक उन्हें गेट के बाहर रहना पड़ता था। उनके बच्चे उनके साथ इतना दुर्व्यवहार करने लगे थे कि वह मानसिक तौर पर बीमार हो गई थी। घर के बाहर सड़क पर बीमार हालत में देखा तो वह अपना आश्रम ले गए और उनके अच्छे से इलाज करवाया। अब वह पूर्ण रूप से ठीक हो चुकी है और उन्होंने अपने बच्चों के खिलाफ केस दर्ज करवाया है।
जिला समाज और कल्याण कार्यालय में होते हैं समझौते
मौजूदा समय में शहर के उप प्रभागीय न्यायाधीश के पास 33 केस आए हैं। जिला समाज और कल्याण कार्यालय में जिस पक्ष की तरफ से केस दर्ज करवाया गया है और जिस पक्ष के खिलाफ करवाया गया है। दोनों पक्षों को बुलाकर पहले समझाया जाता है। उनकी यही कोशिश रहती है कि दोनों के बीच समझौता हो जाए परिवार न बिखरे। बुजुर्गों को उनका सहारा मिल जाए। अगर पक्षों में रजामंदी नहीं होती है तो केस कई साल तक लंबे चलते हैं। इस विभाग में अधिकतर बुजुर्ग अपना गुजारा भत्ता के लिए पंजीकरण करवाने आते हैं। मां-बाप को बच्चों द्वारा परेशान किया जाने वाला केस आता है तो उसमें पीड़ित मां-बाप को बच्चे से मासिक भत्ता दिलाया जाता है। अगर पीड़ित माता-पिता के दो बच्चे हैं तो दोनों से बराबर 5000 हर महीने दिलाए जाते हैं।
नई पीढ़ी को अपने सामर्थ्य के अनुसार बुजुर्गों की देखभाल करनी चाहिए। जिन मां-बाप ने उन्हें पढ़ा लिखा कर लायक बनाया है उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। बुजुर्गों को भी उनके लिए मददगार कानून के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। कोर्ट के रास्ते पर चलने से पहले कोशिश करें कि पारिवारिक तौर पर ही समझौता कर ले। कोर्ट में आने से एक दूसरे के प्रति सम्मान व्यवहार खत्म हो जाता है और रंजिश बढ़ जाती है। इसलिए पहले पारिवारिक तौर पर बैठकर मसला सुलझाने की कोशिश करें।
- हरवीर सिंह, उप प्रभागीय न्यायाधीश भिवानी।
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अगर 10 साल पहले देखा जाए तो साल में मुश्किल से ऐसा एक केस ही आता था। परंतु अब इसकी गिनती बढ़ने लगी है। जो पढ़े-लिखे और अच्छी शिक्षा प्राप्त बच्चे हैं वह भी अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करने लग गए हैं। इन बुजुर्गों के लिए ऐसा कोई ठोस कानून भी नहीं बना है, जिसका उपयोग करके वह अपने साथ हो रहा दुर्व्यवहार को रोक सके।
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केस स्टडी नंबर एक
शहर में रहने वाले रामपाल सिंह (काल्पनिक नाम) ने अपने साथ हुई आप बीती बताई है। उन्होंने बैंक में करीब 25 साल नौकरी की है। उनकी खुद की अच्छी संपत्ति थी। उनके दो बेटे वरुण और अरुण है जो की अच्छे से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पहले तो सब कुछ सही चल रहा था लेकिन जैसे वह रिटायर हुए और अपनी संपत्ति बेटों के नाम कर दी तब से वे उन्हें अनदेखा करने लग गए। पिता ने बताया कि उन्होंने मेहनत करके अपने दोनों बच्चों को लायक बना दिया। परंतु आज वही बच्चे उन्हें न खाने के लिए दे रहे हैं और न ही खर्चा पानी दे रहे हैं। इनकी सारी संपत्ति उन्होंने अपने नाम करवा ली। अब वह रामपाल सिंह को इतना परेशान कर रहे हैं कि वह खुद ही घर छोड़ कर चले जाएं। इन्होंने अपने बच्चों के खिलाफ शिकायत की दर्ज करवाई है।
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केस स्टडी नंबर दो
प्रोमिला (काल्पनिक नाम) जिनकी उम्र 65 वर्ष है। वह किसी समय में कॉलेज में प्रोफेसर हुआ करती थीं। उनके चार बच्चे हैं, जिसमें दो बेटा और दो बेटी। जब वह प्रोफेसर की पद से रिटायर हुई तब से उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब कर दी गई कि वह घर छोड़कर चली गई। उनके पास इतना पैसा इतनी दौलत है। जिस पर उनके बच्चों ने कब्जा कर रखा है। उनके बेटे ही नहीं बल्कि उनकी बेटियां भी उन्हें पूछती नहीं थी। कई कई दिन तक उन्हें गेट के बाहर रहना पड़ता था। उनके बच्चे उनके साथ इतना दुर्व्यवहार करने लगे थे कि वह मानसिक तौर पर बीमार हो गई थी। घर के बाहर सड़क पर बीमार हालत में देखा तो वह अपना आश्रम ले गए और उनके अच्छे से इलाज करवाया। अब वह पूर्ण रूप से ठीक हो चुकी है और उन्होंने अपने बच्चों के खिलाफ केस दर्ज करवाया है।
जिला समाज और कल्याण कार्यालय में होते हैं समझौते
मौजूदा समय में शहर के उप प्रभागीय न्यायाधीश के पास 33 केस आए हैं। जिला समाज और कल्याण कार्यालय में जिस पक्ष की तरफ से केस दर्ज करवाया गया है और जिस पक्ष के खिलाफ करवाया गया है। दोनों पक्षों को बुलाकर पहले समझाया जाता है। उनकी यही कोशिश रहती है कि दोनों के बीच समझौता हो जाए परिवार न बिखरे। बुजुर्गों को उनका सहारा मिल जाए। अगर पक्षों में रजामंदी नहीं होती है तो केस कई साल तक लंबे चलते हैं। इस विभाग में अधिकतर बुजुर्ग अपना गुजारा भत्ता के लिए पंजीकरण करवाने आते हैं। मां-बाप को बच्चों द्वारा परेशान किया जाने वाला केस आता है तो उसमें पीड़ित मां-बाप को बच्चे से मासिक भत्ता दिलाया जाता है। अगर पीड़ित माता-पिता के दो बच्चे हैं तो दोनों से बराबर 5000 हर महीने दिलाए जाते हैं।
नई पीढ़ी को अपने सामर्थ्य के अनुसार बुजुर्गों की देखभाल करनी चाहिए। जिन मां-बाप ने उन्हें पढ़ा लिखा कर लायक बनाया है उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। बुजुर्गों को भी उनके लिए मददगार कानून के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। कोर्ट के रास्ते पर चलने से पहले कोशिश करें कि पारिवारिक तौर पर ही समझौता कर ले। कोर्ट में आने से एक दूसरे के प्रति सम्मान व्यवहार खत्म हो जाता है और रंजिश बढ़ जाती है। इसलिए पहले पारिवारिक तौर पर बैठकर मसला सुलझाने की कोशिश करें।
- हरवीर सिंह, उप प्रभागीय न्यायाधीश भिवानी।