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धनाना के समीप टूटी माइनर, 50 एकड़ धान की फसल जलमग्न
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माइनर टूटने से गांव धनाना के खेतों में जाता पानी। संवाद
- फोटो : Bhiwani
बवानीखेड़ा (भिवानी)। गांव धनाना के समीप बुधवार अल सुबह चार बजे माइनर टूट गई, जिससे किसानों की करीब 50 एकड़ भूमि में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई। यहां पर बारिश की वजह से भी पानी भरा था, जिसकी वजह से किसानों को कई दिनों तक पानी निकासी का इंतजार करना पड़ा था। इस वजह से भी किसानों को काफी नुकसान हुआ था। अब नहर टूटने से फिर से खेत पानी से लबालब हो गए।
धनाना के किसानों ने बताया कि माइनर के अंदर पिछले चार माह से लगातार पानी चल रहा है। इसकी वजह से माइनर की सफाई भी नहीं हो पाई और कई जगह से मिट्टी जमने की वजह से नहर बुधवार अल सुबह चार बजे ओवरफ्लो होकर टूट गई। जिस कारण आसपास के करीब 50 एकड़ भूमि में जलभराव हो गया। उन्होंने बताया कि किसानों को इसकी वजह से काफी नुकसान हुआ है। उनकी पकी पकाई धान की फसल भी तबाह हो चुकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जेसीबी के सहारे नहर के टूटे हुए हिस्से को दुरुस्त कराने का काम शुरू करा दिया। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पहले भी माइनर की सफाई कराए जाने की मांग की थी, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था। लेकिन माइनर की सफाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि लगातार तीन सालों से नहर टूट रही है, जिस कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने बताया कि बरसाती जलभराव की वजह से भी गांव के किसानों ने करीब तीन लाख का डीजल फूंककर पानी की निकासी कराई थी। उनकी फसल खराब होने पर भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व जिला प्रशासन से जल्द से जल्द खेतों में पानी निकासी की मांग की है।
ज्यादा नुकसान नहीं
नहर टूटने की सूचना मिलते ही पीछे से पानी बंद करवाकर टूटी हुई जगह को पाट दिया गया था। कुछ खेतों में पानी जरूर भर गया है, मगर समय रहते स्थिति को काबू कर लिया गया, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।
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रोहित, जेई, सिंचाई विभाग।
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धनाना के किसानों ने बताया कि माइनर के अंदर पिछले चार माह से लगातार पानी चल रहा है। इसकी वजह से माइनर की सफाई भी नहीं हो पाई और कई जगह से मिट्टी जमने की वजह से नहर बुधवार अल सुबह चार बजे ओवरफ्लो होकर टूट गई। जिस कारण आसपास के करीब 50 एकड़ भूमि में जलभराव हो गया। उन्होंने बताया कि किसानों को इसकी वजह से काफी नुकसान हुआ है। उनकी पकी पकाई धान की फसल भी तबाह हो चुकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जेसीबी के सहारे नहर के टूटे हुए हिस्से को दुरुस्त कराने का काम शुरू करा दिया। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पहले भी माइनर की सफाई कराए जाने की मांग की थी, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था। लेकिन माइनर की सफाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि लगातार तीन सालों से नहर टूट रही है, जिस कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने बताया कि बरसाती जलभराव की वजह से भी गांव के किसानों ने करीब तीन लाख का डीजल फूंककर पानी की निकासी कराई थी। उनकी फसल खराब होने पर भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व जिला प्रशासन से जल्द से जल्द खेतों में पानी निकासी की मांग की है।
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ज्यादा नुकसान नहीं
नहर टूटने की सूचना मिलते ही पीछे से पानी बंद करवाकर टूटी हुई जगह को पाट दिया गया था। कुछ खेतों में पानी जरूर भर गया है, मगर समय रहते स्थिति को काबू कर लिया गया, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।
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रोहित, जेई, सिंचाई विभाग।