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भिवानी नगर परिषद घोटाला : सभी चेक पर फर्जी हस्ताक्षर भी अलग-अलग
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भिवानी। नगर परिषद में उठे करोड़ों रुपये के घोटाले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आया है कि सभी चेक पर जो फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं, वे भी आपस में मेल नहीं खाते। इसका मतलब साफ है कि अलग-अलग लोगों ने हस्ताक्षर करने का प्रयास किया है।
नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से भी पूछताछ के दौरान चेकों पर हुए हस्ताक्षर की ही पहचान करवाई गई। अब मंगलवार को नप चेयरमैन से फिर से पूछताछ होगी। वहीं मामले में सोमवार को नगर परिषद के तत्कालीन सचिव राजेश महता को जांच में शामिल होना था। मगर 20 मार्च को हिसार में उनके पिताजी का निधन हो गया, जिस कारण वे जांच में शामिल नहीं हो सके। पुलिस ने मामले में आरोपी व्यापारी से भी पूछताछ की।
नगर परिषद में पूर्व पार्षद सुदर्शन की शिकायत के बाद उठा घोटाले का भूचाल लगातार गहराता जा रहा है। नए-नए खुलासे हो रहे हैं और घोटाला की राशि भी बढ़ती जा रही है। शुरूआत में दो करोड़ा का घोटाला बताया जा रहा थे, लेकिन अब संख्या बढ़ती जा रही है। नगर परिषद के अलग-अलग अनेक खातों से फर्जी फर्मों के खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। नगर परिषद के तीन खातों से ही 12 से 15 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं। प्रावधान नहीं होने के बावजूद अमरूत योजना के सिक्योरिटी खाते से भी करोड़ों रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है।
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पुलिस ने पूर्व पार्षद सुदर्शन की शिकायत पर एक्सिस बैंक के मैनेजर नितेश, व्यापारी विनोद व एक अन्य और नप कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में अब तक पुलिस बैंक मैनेजर को गिरफ्तार कर चुकी है, जो कि फिलहाल पांच दिन के रिमांड पर है।
रविवार को पुलिस ने नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान भी चेकों पर हस्ताक्षर के बारे में ही पूछताछ की गई। कुछ ओरिजनल चेक दिखाए गए तो कुछ फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक। नप चेयरमैन ने बताया कि जो फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक थे, उन पर किए गए फर्जी हस्ताक्षर भी अलग-अलग हैं। मैने पांच-छह ऐसे चेक थे, जिन पर मेरे हस्ताक्षर थे, उन्हें पहचान लिया। वे कर्मचारियों की सैलरी से संबंधित चेक थे। वे किसी तरह के घोटाले में शामिल नहीं हैं और पूरी तरह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं, ताकि घोटाला करने वालों के चेहरे सामने आए और उन्हें सजा मिले।
निवर्तमान चेयरमैन का फोन भी जब्त
पुलिस ने रविवार को नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से पूछताछ के बाद उनका फोन भी अपने पास ही रखवा लिया, ताकि जांच प्रभावित न हो सके। फोन अभी भी पुलिस के पास ही है और स्विच ऑफ चल रहा है। चेयरमैन को मंगलवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
अकाउंटेंट का नहीं लगा सुराग
पिछले करीब सात दिन से फरार नगर परिषद के अकाउंटेंट संजय बंसल का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
जल्द करेंगे खुलासा
पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जिन फर्मों के खातों में राशि ट्रांसफर की गई है, उनका पता लगाया जा रहा है। नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह से पूछताछ की गई है। तत्कालीन सचिव को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, मगर उनके पिताजी का निधन होने के कारण वे नहीं आ सके। व्यापारी विनोद व अन्य से भी पूछताछ की गई है। हमारा प्रयास है कि जल्द ही इस पूरे मामले का खुलासा किया जाए।
-अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक।
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नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से भी पूछताछ के दौरान चेकों पर हुए हस्ताक्षर की ही पहचान करवाई गई। अब मंगलवार को नप चेयरमैन से फिर से पूछताछ होगी। वहीं मामले में सोमवार को नगर परिषद के तत्कालीन सचिव राजेश महता को जांच में शामिल होना था। मगर 20 मार्च को हिसार में उनके पिताजी का निधन हो गया, जिस कारण वे जांच में शामिल नहीं हो सके। पुलिस ने मामले में आरोपी व्यापारी से भी पूछताछ की।
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नगर परिषद में पूर्व पार्षद सुदर्शन की शिकायत के बाद उठा घोटाले का भूचाल लगातार गहराता जा रहा है। नए-नए खुलासे हो रहे हैं और घोटाला की राशि भी बढ़ती जा रही है। शुरूआत में दो करोड़ा का घोटाला बताया जा रहा थे, लेकिन अब संख्या बढ़ती जा रही है। नगर परिषद के अलग-अलग अनेक खातों से फर्जी फर्मों के खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। नगर परिषद के तीन खातों से ही 12 से 15 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं। प्रावधान नहीं होने के बावजूद अमरूत योजना के सिक्योरिटी खाते से भी करोड़ों रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है।
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पुलिस ने पूर्व पार्षद सुदर्शन की शिकायत पर एक्सिस बैंक के मैनेजर नितेश, व्यापारी विनोद व एक अन्य और नप कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में अब तक पुलिस बैंक मैनेजर को गिरफ्तार कर चुकी है, जो कि फिलहाल पांच दिन के रिमांड पर है।
रविवार को पुलिस ने नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान भी चेकों पर हस्ताक्षर के बारे में ही पूछताछ की गई। कुछ ओरिजनल चेक दिखाए गए तो कुछ फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक। नप चेयरमैन ने बताया कि जो फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक थे, उन पर किए गए फर्जी हस्ताक्षर भी अलग-अलग हैं। मैने पांच-छह ऐसे चेक थे, जिन पर मेरे हस्ताक्षर थे, उन्हें पहचान लिया। वे कर्मचारियों की सैलरी से संबंधित चेक थे। वे किसी तरह के घोटाले में शामिल नहीं हैं और पूरी तरह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं, ताकि घोटाला करने वालों के चेहरे सामने आए और उन्हें सजा मिले।
निवर्तमान चेयरमैन का फोन भी जब्त
पुलिस ने रविवार को नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव से पूछताछ के बाद उनका फोन भी अपने पास ही रखवा लिया, ताकि जांच प्रभावित न हो सके। फोन अभी भी पुलिस के पास ही है और स्विच ऑफ चल रहा है। चेयरमैन को मंगलवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
अकाउंटेंट का नहीं लगा सुराग
पिछले करीब सात दिन से फरार नगर परिषद के अकाउंटेंट संजय बंसल का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
जल्द करेंगे खुलासा
पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जिन फर्मों के खातों में राशि ट्रांसफर की गई है, उनका पता लगाया जा रहा है। नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह से पूछताछ की गई है। तत्कालीन सचिव को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, मगर उनके पिताजी का निधन होने के कारण वे नहीं आ सके। व्यापारी विनोद व अन्य से भी पूछताछ की गई है। हमारा प्रयास है कि जल्द ही इस पूरे मामले का खुलासा किया जाए।
-अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक।