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जांच में गड़बड़ी: सीएमओ आवास का लोड जांचने पहुंची बिजली निगम की जांच पर उठे सवाल
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:46 AM IST
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भिवानी। एक पूर्व सिविल सर्जन पर लगे बिजली बिल में गड़बड़ी के आरोपों के मामले में अब बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए है। सोमवार को हुई लॉजिस्टिक सेंटर में बिजली लोड की जांच में गड़बड़ी के आरोप लगे है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पूरा लोड नहीं जांचा। वहीं शिकायतकर्ता ने भी प्रथम तल, बाहर के एक कक्ष और बाहर लगी लाइटों का लोड नहीं जांचने के आरोप लगाए है। इसकी शिकायत भी बिजली निगम के एमडी, सीएम विंडो, डीसी को दी गई है।
उल्लेखनीय है कि चरखी दादरी वासी एक लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, बिजली निगम के एमडी, डीसी और सीएमओ को शिकायत कर एक पूर्व सिविल सर्जन पर लॉजिस्टिक सेंटर को आवास के रूप में प्रयोग करने और पांच एसी, 20 पंखें, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स होने के बावजूद महज छह सौ रुपये मासिक का बिजली बिल भरने के आरोप लगाए थे। जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है। इसका पहले लोड चेक करवाया गया तो महज ढाई किलोवाट दिखाया गया। इसी मामले में विजिलेंस की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर बिजली लोड की जांच की मांग की गई। जिस पर बिजली निगम की टीम से लोड की जांच करवाई गई। सोमवार को एसडीओ कुलदीप के नेतृत्व में बिजली निगम की टीम ने लॉजिस्टिक सेंटर का बिजली लोड जांचा। जांच में करीब 13 किलोवाट लोड मिला है। सेंटर में किसी मीटर की व्यवस्था भी नहीं थी कि जो यह बता सके कि अस्पताल के हिस्से की कितनी बिजली लॉजिस्टिक सेंटर में रहने वाले अधिकारियों ने प्रयोग की है।
अब बिजली निगम की टीम पर भी सवाल खड़े हो गए है। आरोप है कि विभाग की टीम ने सिर्फ भू तल को ही ए और बी हिस्सों में बांटकर लोड जांचा है जबकि पूरे लॉजिस्टिक सेंटर का लोड जांचने के लिए कहां गया था। प्रथम तल, भू तल पर ही बने एक कमरे और बाहर लगी बड़ी लाइटों का लोड नहीं जांचा गया। अगर पूरे सेंटर की जांच की जाती तो बिजली लोड और भी अधिक निकलता।
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विजिलेंस जांच के तहत उनके पास पत्र आया था कि लॉजिस्टिक सेंटर जिसे सीएमओ आवास के तौर पर प्रयेाग किया गया उसका लोड चेक करवाया जाए। बिजली निगम की टीम आई थी। मगर उसने पूरी जांच नहीं की। जिस बारे में बिजली निगम के एसई को पत्र लिखा जाएगा। फिलहाल 13.46 किलोवाट लोड की रिपोर्ट विजिलेंस के पास भेजी गई है।
आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
लोड जांच में भी भेदभाव किया गया है। प्रथम तल के अलावा बाहर का कमरा जिसमें कुत्ता रखा जाता था। वहां कूलर आदि सुविधाएं थी। वहां का लोड नहीं जांचा गया। बाहर बड़ी लाइटें लगी है उनका लोड शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा प्रथम तल पर एसी, चार कूलर, काफी लाइट, बड़ी लाइट लगी थी, जिनका लोड सहीं नहीं लिया गया। इसकी शिकायत बिजली निगम के एमडी, सीएम विंडो, डीसी कार्यालय में की है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जितेंद्र कुमार, शिकायतकर्ता
उल्लेखनीय है कि चरखी दादरी वासी एक लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, बिजली निगम के एमडी, डीसी और सीएमओ को शिकायत कर एक पूर्व सिविल सर्जन पर लॉजिस्टिक सेंटर को आवास के रूप में प्रयोग करने और पांच एसी, 20 पंखें, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स होने के बावजूद महज छह सौ रुपये मासिक का बिजली बिल भरने के आरोप लगाए थे। जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है। इसका पहले लोड चेक करवाया गया तो महज ढाई किलोवाट दिखाया गया। इसी मामले में विजिलेंस की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर बिजली लोड की जांच की मांग की गई। जिस पर बिजली निगम की टीम से लोड की जांच करवाई गई। सोमवार को एसडीओ कुलदीप के नेतृत्व में बिजली निगम की टीम ने लॉजिस्टिक सेंटर का बिजली लोड जांचा। जांच में करीब 13 किलोवाट लोड मिला है। सेंटर में किसी मीटर की व्यवस्था भी नहीं थी कि जो यह बता सके कि अस्पताल के हिस्से की कितनी बिजली लॉजिस्टिक सेंटर में रहने वाले अधिकारियों ने प्रयोग की है।
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अब बिजली निगम की टीम पर भी सवाल खड़े हो गए है। आरोप है कि विभाग की टीम ने सिर्फ भू तल को ही ए और बी हिस्सों में बांटकर लोड जांचा है जबकि पूरे लॉजिस्टिक सेंटर का लोड जांचने के लिए कहां गया था। प्रथम तल, भू तल पर ही बने एक कमरे और बाहर लगी बड़ी लाइटों का लोड नहीं जांचा गया। अगर पूरे सेंटर की जांच की जाती तो बिजली लोड और भी अधिक निकलता।
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विजिलेंस जांच के तहत उनके पास पत्र आया था कि लॉजिस्टिक सेंटर जिसे सीएमओ आवास के तौर पर प्रयेाग किया गया उसका लोड चेक करवाया जाए। बिजली निगम की टीम आई थी। मगर उसने पूरी जांच नहीं की। जिस बारे में बिजली निगम के एसई को पत्र लिखा जाएगा। फिलहाल 13.46 किलोवाट लोड की रिपोर्ट विजिलेंस के पास भेजी गई है।
आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
लोड जांच में भी भेदभाव किया गया है। प्रथम तल के अलावा बाहर का कमरा जिसमें कुत्ता रखा जाता था। वहां कूलर आदि सुविधाएं थी। वहां का लोड नहीं जांचा गया। बाहर बड़ी लाइटें लगी है उनका लोड शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा प्रथम तल पर एसी, चार कूलर, काफी लाइट, बड़ी लाइट लगी थी, जिनका लोड सहीं नहीं लिया गया। इसकी शिकायत बिजली निगम के एमडी, सीएम विंडो, डीसी कार्यालय में की है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जितेंद्र कुमार, शिकायतकर्ता