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भिवानी रोडवेज के बेड़े से बाहर हो जाएंगी 15 बसें, यात्री होंगे परेशान
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बस स्टैंड स्थित बूथों पर लगी बसें। संवाद
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। पहले से ही लड़खड़ा रही परिवहन सेवाओं को अब एनसीआर का झटका लगने जा रहा है। दस साल की मियाद पूरी कर चुकीं 15 रोडवेज बसों को अब नॉन एनसीआर के दूसरे डिपो में भेजने की तैयारी चल रही है। इसके बाद पहले से चल रहे रूट प्रभावित होंगे। दरअसल भिवानी एनसीआर में आता है। इसलिए दस साल की अवधि पूरी कर चुकी बसों को दूसरे रोडवेज में भेजा जाएगा। इस वजह से यात्रियों को भी परेशानी होगी।
वहीं रोडवेज के चालक ट्रेनिंग स्कूल को चलाने पर भी संकट आ जाएगा। इतना ही नहीं रोडवेज चालकों की कमी से 12 ठीकठाक बसें भी वर्कशॉप में खड़ी हैं। पहले से ही रोडवेज की 60 बसें कंडम हो चुकी हैं। रोडवेज के 31 चालक स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे हैं, जबकि तीन रोडवेज चालकों को सेंट्रल वर्कशॉप चंडीगढ़ मुख्यालय बुलाया गया है। जिसकी वजह से कई लोकल रूटों पर यात्री सेवाएं बहाल रख पाना रोडवेज के लिए टेड़ी खीर हो गया है।
रोडवेज का भिवानी डिपो 175 बसों का है। लेकिन नॉर्म के अनुसार डिपो में शायद ही कभी बसों को शामिल किया गया हो। फिलहाल जो स्थिति है वह चिंताजनक बनती जा रही है। भिवानी को एनसीआर में शामिल किया गया है, इसे हटाने की कवायद भी चल रही है। इसी बीच भिवानी डिपो के अधिकारियों के समक्ष यह पत्र भेजा गया है कि जो रोडवेज बसें दस साल की मियाद पूरी कर चुकी हैं, उन्हें नॉन एनसीआर डिपो में भेजा जाएगा। जिसके बाद भिवानी डिपो की 15 रोडवेज बसों को दूसरे डिपो में भेजने की तैयारियां भी चल रही हैं। ये बसें फिलहाल रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल में नए चालकों को प्रशिक्षण दे रही हैं, जबकि कई बसें लोकल रूटों पर भी मुसाफिरों को सफर करा रही हैं। अगर ये बसें दूसरे डिपो में भेजी गई तो ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण जारी रख पाना मुश्किल होगा वहीं लोकल रूट भी लावारिस हो जाएंगे।
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25 कंडम बसों पर भी होना है फैसला
रोडवेज वर्कशॉप में 60 बसें कंडम खड़ी हैं, जिनमें 25 बसों पर अभी फैसला होना है। ये बसें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। जिन्हें अब रूट पर नहीं उतारा जा रहा है। रोडवेज बेड़े में फिलहाल 144 बसें ही ऑनरूट लायक हैं। जिसमें 90 बसें तो भिवानी बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं, जबकि तोशाम सब डिपो से करीब 45 बसें शामिल हैं। 12 बसें चालक नहीं होने से वर्कशॉप में खड़ी हैं। डिपो में सब मिलाकर 147 बसों का ही बेड़ा है।
ये लोकल रूट हो रहे प्रभावित
चालकों की कमी से भिवानी से हांसी, भिवानी से लोहारू, भिवानी से बवानीखेड़ा, भिवानी से बहल, भिवानी से कैरू, भिवानी से जींद, भिवानी से महम रूट के अलावा कई वाया ग्रामीण रूट भी प्रभावित हो रहे हैं, जबकि लंबी दूरी पर किलोमीटर स्कीम की बसों ने ही कमान संभाल रखी है। इसका फायदा भी प्राइवेट परिवहन समिति की बसों को मिल रहा है।
26 हजार किलोमीटर का रोजाना बसें कर रही सफर तय
भिवानी डिपो की बसें रोजाना 26 हजार किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं। हालांकि यात्री रिसीट कोरोना संक्रमण के बाद कुछ बढ़ी है। जिसके बाद औसतन 30 रुपये प्रति यात्री रिसीट आ रही है।
डिपो में 116 चालक, 82 ही चला रहे बसें
भिवानी डिपो में 116 रोडवेज चालक हैं। इसमें से 31 चालक स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल एंबुलेंस चलाने के लिए बुला रखे हैं, जबकि तीन चालक सेंट्रल वर्कशॉप चंडीगढ़ भेजे गए हैं। जिसके बाद सिर्फ 82 चालक ही रूटों पर बसों को चला रहे हैं। (संवाद)
बसों को नॉन एनसीआर में भेजने के आदेश मिले हैं
डिपो में नई बसों के आने की बात चल रही है। फिलहाल हमारे पर 15 बसें जो दस साल से अधिक पुरानी हैं, उन्हें नॉन एनसीआर क्षेत्र में भेजने के आदेश मिले हैं। चालकों की कमी भी है। हमारा प्रयास है कि सभी रूटों पर मौजूदा संसाधनों के बूते बेहतर परिवहन सेवाएं मुहैया कराएं।
-कमलजीत सिंह चहल, महाप्रबंधक भिवानी डिपो, हरियाणा राज्य परिवहन विभाग।
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भिवानी। पहले से ही लड़खड़ा रही परिवहन सेवाओं को अब एनसीआर का झटका लगने जा रहा है। दस साल की मियाद पूरी कर चुकीं 15 रोडवेज बसों को अब नॉन एनसीआर के दूसरे डिपो में भेजने की तैयारी चल रही है। इसके बाद पहले से चल रहे रूट प्रभावित होंगे। दरअसल भिवानी एनसीआर में आता है। इसलिए दस साल की अवधि पूरी कर चुकी बसों को दूसरे रोडवेज में भेजा जाएगा। इस वजह से यात्रियों को भी परेशानी होगी।
वहीं रोडवेज के चालक ट्रेनिंग स्कूल को चलाने पर भी संकट आ जाएगा। इतना ही नहीं रोडवेज चालकों की कमी से 12 ठीकठाक बसें भी वर्कशॉप में खड़ी हैं। पहले से ही रोडवेज की 60 बसें कंडम हो चुकी हैं। रोडवेज के 31 चालक स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे हैं, जबकि तीन रोडवेज चालकों को सेंट्रल वर्कशॉप चंडीगढ़ मुख्यालय बुलाया गया है। जिसकी वजह से कई लोकल रूटों पर यात्री सेवाएं बहाल रख पाना रोडवेज के लिए टेड़ी खीर हो गया है।
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रोडवेज का भिवानी डिपो 175 बसों का है। लेकिन नॉर्म के अनुसार डिपो में शायद ही कभी बसों को शामिल किया गया हो। फिलहाल जो स्थिति है वह चिंताजनक बनती जा रही है। भिवानी को एनसीआर में शामिल किया गया है, इसे हटाने की कवायद भी चल रही है। इसी बीच भिवानी डिपो के अधिकारियों के समक्ष यह पत्र भेजा गया है कि जो रोडवेज बसें दस साल की मियाद पूरी कर चुकी हैं, उन्हें नॉन एनसीआर डिपो में भेजा जाएगा। जिसके बाद भिवानी डिपो की 15 रोडवेज बसों को दूसरे डिपो में भेजने की तैयारियां भी चल रही हैं। ये बसें फिलहाल रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल में नए चालकों को प्रशिक्षण दे रही हैं, जबकि कई बसें लोकल रूटों पर भी मुसाफिरों को सफर करा रही हैं। अगर ये बसें दूसरे डिपो में भेजी गई तो ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण जारी रख पाना मुश्किल होगा वहीं लोकल रूट भी लावारिस हो जाएंगे।
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25 कंडम बसों पर भी होना है फैसला
रोडवेज वर्कशॉप में 60 बसें कंडम खड़ी हैं, जिनमें 25 बसों पर अभी फैसला होना है। ये बसें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। जिन्हें अब रूट पर नहीं उतारा जा रहा है। रोडवेज बेड़े में फिलहाल 144 बसें ही ऑनरूट लायक हैं। जिसमें 90 बसें तो भिवानी बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं, जबकि तोशाम सब डिपो से करीब 45 बसें शामिल हैं। 12 बसें चालक नहीं होने से वर्कशॉप में खड़ी हैं। डिपो में सब मिलाकर 147 बसों का ही बेड़ा है।
ये लोकल रूट हो रहे प्रभावित
चालकों की कमी से भिवानी से हांसी, भिवानी से लोहारू, भिवानी से बवानीखेड़ा, भिवानी से बहल, भिवानी से कैरू, भिवानी से जींद, भिवानी से महम रूट के अलावा कई वाया ग्रामीण रूट भी प्रभावित हो रहे हैं, जबकि लंबी दूरी पर किलोमीटर स्कीम की बसों ने ही कमान संभाल रखी है। इसका फायदा भी प्राइवेट परिवहन समिति की बसों को मिल रहा है।
26 हजार किलोमीटर का रोजाना बसें कर रही सफर तय
भिवानी डिपो की बसें रोजाना 26 हजार किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं। हालांकि यात्री रिसीट कोरोना संक्रमण के बाद कुछ बढ़ी है। जिसके बाद औसतन 30 रुपये प्रति यात्री रिसीट आ रही है।
डिपो में 116 चालक, 82 ही चला रहे बसें
भिवानी डिपो में 116 रोडवेज चालक हैं। इसमें से 31 चालक स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल एंबुलेंस चलाने के लिए बुला रखे हैं, जबकि तीन चालक सेंट्रल वर्कशॉप चंडीगढ़ भेजे गए हैं। जिसके बाद सिर्फ 82 चालक ही रूटों पर बसों को चला रहे हैं। (संवाद)
बसों को नॉन एनसीआर में भेजने के आदेश मिले हैं
डिपो में नई बसों के आने की बात चल रही है। फिलहाल हमारे पर 15 बसें जो दस साल से अधिक पुरानी हैं, उन्हें नॉन एनसीआर क्षेत्र में भेजने के आदेश मिले हैं। चालकों की कमी भी है। हमारा प्रयास है कि सभी रूटों पर मौजूदा संसाधनों के बूते बेहतर परिवहन सेवाएं मुहैया कराएं।
-कमलजीत सिंह चहल, महाप्रबंधक भिवानी डिपो, हरियाणा राज्य परिवहन विभाग।