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राजीव कॉलोनी में पालतु दुधारु पशुओं में मुंह- खुर का प्रकोप, पशु पालन विभाग ने पिछले दिनों चलाया था अभियान
Updated Mon, 22 Oct 2018 12:22 AM IST
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भिवानी। पशुपालन विभाग ने एक महीने अभियान चलाकर पशुओं को मुंह खुर की बीमारी से बचाव के लिए करीब तीन लाख 75 हजार पशुओं को इंजेक्शन लगाए। इसके बावजूद शहर की राजीव कॉलोनी में अनेक पशु मुंह खुर से परेशान है। पशुओं ने चारा खाना तक छोड़ दिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियान के बाद संभव नहीं कि पशुओं में मुंह-खुर की बीमारी हो। यह फुट लॉट बीमारी हो सकती है। फिर भी सोमवार को टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी।
पशुओं में मुंह-खुर गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में पशुओं के खुर और मुंह में तकलीफ हो जाती है। पशुओं से खड़ा नहीं हुआ जाता और पशु चारा भी नहीं खाते। कई दफा यह बीमारी जानलेवा भी साबित होती है। विभाग ने एक से 30 सितंबर तक अभियान चलाकर पशुओं को ये इंजेक्शन लगाए गए। विभाग के विशेष अभियान के बाद भी अब संदिग्ध मुंह खुर बीमारी के पीड़ित पशु सामने आए है। राजीव कॉलोनी में अनेक पशु ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिनके खुरों और मुंह में समस्या है। जिससे पशुपालक परेशान हैं।
दो सप्ताह में अब खड़े होने लगी है कट्डी
रेखा ने बताया कि इस बार उनके यहां पशुओं को मुंह खुर के इंजेक्शन लगाने कोई नहीं आया। दो सप्ताह से उनकी कटड़ी मुंह खुर की बीमारी से परेशान है। उठा भी नहीं जा रहा था। अब डाक्टर की बताई दवाइयां और स्प्रे प्रयोग किया तो उठने लायक हुई है। चारा भी नहीं खा रही थी। कॉलोनी में अनेक पशुओं को यह बीमारी है।
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पशुपालक जगदीश और उनकी पत्नी नन्ही देवी ने बताया कि तीन में से दो भैंसें मुंह खुर की बीमारी से पीड़ित है। उन्होंने डाक्टर बुलाया था। जिसने दवाइयां और स्प्रे मंगवाया। अब भी एक भैंसे से तो उठा ही नहीं जा रहा। डाक्टर ने बताया मुंह खुर की बीमारी है। अब तक दो भैंसों की दवाइयों पर करीब चार हजार रुपये खर्च कर चुके है। अभी भी ठीक नहीं हुई है।
महिला बीरमति ने बताया कि उनके कटड़े से उठा ही नहीं जा रहा। खुर में दिक्कत है। ना ही चारा खा रहा है। 10 दिन से ऐसे ही बैठा है। काफी इलाज करवाया। अभी भी इलाज करवा रहे है। यहां मुंह खुर के इंजेक्शन लगाने इस साल कोई नहीं आया।
हमने एक महीने तक मुंह खुर की बीमारी से बचाव के लिए पशुओं के टीकाकरण का अभियान चलाया है। तीन लाख 80 हजार डोज आई थी, जिनमें से तीन लाख 75 हजार लगाई जा चुकी है। पांच हजार डोज रिजर्व में रखी है। यह संभव नहीं कि मुंह खुर बीमारी हो। फुट लॉट की संभावना है। फिर भी वे सोमवार को ही टीम को भेजकर इसकी जांच करवाएंगे।
पशुओं में मुंह-खुर गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में पशुओं के खुर और मुंह में तकलीफ हो जाती है। पशुओं से खड़ा नहीं हुआ जाता और पशु चारा भी नहीं खाते। कई दफा यह बीमारी जानलेवा भी साबित होती है। विभाग ने एक से 30 सितंबर तक अभियान चलाकर पशुओं को ये इंजेक्शन लगाए गए। विभाग के विशेष अभियान के बाद भी अब संदिग्ध मुंह खुर बीमारी के पीड़ित पशु सामने आए है। राजीव कॉलोनी में अनेक पशु ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिनके खुरों और मुंह में समस्या है। जिससे पशुपालक परेशान हैं।
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दो सप्ताह में अब खड़े होने लगी है कट्डी
रेखा ने बताया कि इस बार उनके यहां पशुओं को मुंह खुर के इंजेक्शन लगाने कोई नहीं आया। दो सप्ताह से उनकी कटड़ी मुंह खुर की बीमारी से परेशान है। उठा भी नहीं जा रहा था। अब डाक्टर की बताई दवाइयां और स्प्रे प्रयोग किया तो उठने लायक हुई है। चारा भी नहीं खा रही थी। कॉलोनी में अनेक पशुओं को यह बीमारी है।
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पशुपालक जगदीश और उनकी पत्नी नन्ही देवी ने बताया कि तीन में से दो भैंसें मुंह खुर की बीमारी से पीड़ित है। उन्होंने डाक्टर बुलाया था। जिसने दवाइयां और स्प्रे मंगवाया। अब भी एक भैंसे से तो उठा ही नहीं जा रहा। डाक्टर ने बताया मुंह खुर की बीमारी है। अब तक दो भैंसों की दवाइयों पर करीब चार हजार रुपये खर्च कर चुके है। अभी भी ठीक नहीं हुई है।
महिला बीरमति ने बताया कि उनके कटड़े से उठा ही नहीं जा रहा। खुर में दिक्कत है। ना ही चारा खा रहा है। 10 दिन से ऐसे ही बैठा है। काफी इलाज करवाया। अभी भी इलाज करवा रहे है। यहां मुंह खुर के इंजेक्शन लगाने इस साल कोई नहीं आया।
हमने एक महीने तक मुंह खुर की बीमारी से बचाव के लिए पशुओं के टीकाकरण का अभियान चलाया है। तीन लाख 80 हजार डोज आई थी, जिनमें से तीन लाख 75 हजार लगाई जा चुकी है। पांच हजार डोज रिजर्व में रखी है। यह संभव नहीं कि मुंह खुर बीमारी हो। फुट लॉट की संभावना है। फिर भी वे सोमवार को ही टीम को भेजकर इसकी जांच करवाएंगे।