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नप का खुला दरबार : सालों पहले जमा करवाई गई फाइलें ढूंढने में छुटे रहे कर्मचारियों के पसीने ..
Updated Fri, 09 Mar 2018 12:57 AM IST
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खुले दरबार में 90 अटके नक्शों को दी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी ।
पिछले कई सालों से लंबित पड़े नक्शों की फाइल निपटाने में नगर परिषद कर्मचारियों के पसीने छूट गए। खुले दरबार में आए लोग अपनी पुरानी फाइलों का रिकार्ड ढूंढवाने में लगे रहे। चौंकाने वाली बात तो यह थी कि तीन से पांच साल पुरानी फाइलें ही गायब थीं। नप कर्मचारियों की लाख कोशिशों के बाद भी ये फाइलें नहीं मिलीं। नक्शा पास करवाने के लिए आए लोग माथापच्ची करते रहे। अलग-अलग कारण रुके 90 नक्शों पर नप ने स्वीकृति की मोहर लगाई, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों की समस्या का हल ना होने पर वह निराश होकर लौटे।
नगर परिषद परिसर में नप चेयरमैन रणसिंह यादव व सचिव आरके महता की अध्यक्षता में खुले दरबार का आयोजन किया। जिसमें नक्शों संबंधी शिकायतें सुनी गईं। पिछले करीब तीन से पांच साल से लंबित पड़े नक्शा फाइलों की मौके पर ही जेई, एमई, बीआई से जांच करवा कर निपटान किया गया। खुले दरबार में आए लोगों की शिकायत थी कि नक्शा जमा करवाने के बाद चक्कर लगा रहे हैं, कभी बीआई का तबादला होने तो कभी एमई व सचिव का स्थानांतरण होने की बात कहकर नक्शा फाइल पास नहीं की जाती है।
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पंचायत विभाग के जेई की लगाई थी विशेष ड्यूटी
नप के बीआई राकेश कुमार की सिवानी चुनाव ड्यूटी लगी हुई थी। जिसके बाद नप ने पंचायत विभाग के जेई प्रवीण बजाज को विशेष रूप से बुलाया गया। बीआई का चार्ज संभाल रहे प्रवीण बजाज ने नक्शा फाइलों की जांच पड़ताल कर उन्हें स्वीकृति के लिए प्रेषित किया।
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2014 से 2018 तक की लंबित फाइलों पर हुई सुनवाई
खुले दरबार में वर्ष 2014 से 2018 तक लंबित पड़ी नक्शे की फाइलों की रसीद देखकर छानबीन की गई। जिन फाइलों को मामूली खामी या फिर अधिकारियों की लापरवाही से अब तक रोका हुआ था।
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एक साल से लटका है मकान का काम
मानान पाना निवासी नितिन ने बताया कि एक साल पहले नक्शे की फाइल व फीस नप ऑफिस में जमा करवाई गई थी, लेकिन दर्जनों चक्कर काटने के बाद भी नक्शा पास नहीं हुआ। जिस कारण मकान बनाने का काम एक साल से लटका हुआा है। नितिन ने कहा कि अब कहीं जाकर खुलेदरबार में नक्शा पास होने पर राहत मिली है।
फोटो : 6
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फाइल ही नहीं मिली जनाब
गांव उमरावत निवासी वीरेंद्र ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उसने हनुमान ढाणी में 120 गज का प्लाट एक महिला से खरीदा था। जिसकी रजिस्ट्री व नक्शे के लिए एक साथ फाइल जमा थी। करीब दो साल से नप के चक्करर लगा रहूं।। अब खुले दरबार में आया तो यहां भी फाइल ही नहीं मिली तो संतोषजनक जवाब तक नहीं मिल पाया।
फोटो : 07
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एक साल पहले जमा की नक्शे की फाइल आज हुई पास
जैन चौक निवासी पवन ने बताया कि उसके भाई अजय के नाम से नक्शे की फाइल नप कार्यालय में एक साल पहले जमा की गई थी। एक साल तक चक्कर लगवाने के बाद आज यह फाइल पास हो पाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे खुले दरबार समय-समय पर लगाए जाने चाहिए।
फोटो : 08
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दो साल बाद मिल पाई है राहत
हनुमान गेट निवासी नरेश ने बताया कि पिछले दो साल से नक्शा पास करवाने के लिए नप के चक्कर लगा रहा था, लेकिन हर बार कोई ना कोई नई शर्त या खामी बताकर फाइल रोक दी जाती। अब दो साल बाद नक्शा पास होने पर राहत मिल पाई है।
फोटो : 09
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वर्शन......
पहले दिन निपटाई गई नक्शे की 90 फाइलें
जब से नप चेयरमैन बना हुं तब से सबसे ज्यादा परेशानी लोगों के नक्शों काो लेकर देखने को मिली है। महिला व बुजुर्ग व्यक्ति फाइलों को लेकर चक्कर काटते थे। जिसे देखते हुए खुला दरबार लगाकर उनकी परेशानी का हल किया गया। खुलेदरबार के पहले दिन 90 नक्शों की फाइल निपटाई गई है, जो 2014 से लंबित थी।
रणसिंह यादव, चेयरमैन नप
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी ।
पिछले कई सालों से लंबित पड़े नक्शों की फाइल निपटाने में नगर परिषद कर्मचारियों के पसीने छूट गए। खुले दरबार में आए लोग अपनी पुरानी फाइलों का रिकार्ड ढूंढवाने में लगे रहे। चौंकाने वाली बात तो यह थी कि तीन से पांच साल पुरानी फाइलें ही गायब थीं। नप कर्मचारियों की लाख कोशिशों के बाद भी ये फाइलें नहीं मिलीं। नक्शा पास करवाने के लिए आए लोग माथापच्ची करते रहे। अलग-अलग कारण रुके 90 नक्शों पर नप ने स्वीकृति की मोहर लगाई, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों की समस्या का हल ना होने पर वह निराश होकर लौटे।
नगर परिषद परिसर में नप चेयरमैन रणसिंह यादव व सचिव आरके महता की अध्यक्षता में खुले दरबार का आयोजन किया। जिसमें नक्शों संबंधी शिकायतें सुनी गईं। पिछले करीब तीन से पांच साल से लंबित पड़े नक्शा फाइलों की मौके पर ही जेई, एमई, बीआई से जांच करवा कर निपटान किया गया। खुले दरबार में आए लोगों की शिकायत थी कि नक्शा जमा करवाने के बाद चक्कर लगा रहे हैं, कभी बीआई का तबादला होने तो कभी एमई व सचिव का स्थानांतरण होने की बात कहकर नक्शा फाइल पास नहीं की जाती है।
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पंचायत विभाग के जेई की लगाई थी विशेष ड्यूटी
नप के बीआई राकेश कुमार की सिवानी चुनाव ड्यूटी लगी हुई थी। जिसके बाद नप ने पंचायत विभाग के जेई प्रवीण बजाज को विशेष रूप से बुलाया गया। बीआई का चार्ज संभाल रहे प्रवीण बजाज ने नक्शा फाइलों की जांच पड़ताल कर उन्हें स्वीकृति के लिए प्रेषित किया।
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2014 से 2018 तक की लंबित फाइलों पर हुई सुनवाई
खुले दरबार में वर्ष 2014 से 2018 तक लंबित पड़ी नक्शे की फाइलों की रसीद देखकर छानबीन की गई। जिन फाइलों को मामूली खामी या फिर अधिकारियों की लापरवाही से अब तक रोका हुआ था।
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एक साल से लटका है मकान का काम
मानान पाना निवासी नितिन ने बताया कि एक साल पहले नक्शे की फाइल व फीस नप ऑफिस में जमा करवाई गई थी, लेकिन दर्जनों चक्कर काटने के बाद भी नक्शा पास नहीं हुआ। जिस कारण मकान बनाने का काम एक साल से लटका हुआा है। नितिन ने कहा कि अब कहीं जाकर खुलेदरबार में नक्शा पास होने पर राहत मिली है।
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फाइल ही नहीं मिली जनाब
गांव उमरावत निवासी वीरेंद्र ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उसने हनुमान ढाणी में 120 गज का प्लाट एक महिला से खरीदा था। जिसकी रजिस्ट्री व नक्शे के लिए एक साथ फाइल जमा थी। करीब दो साल से नप के चक्करर लगा रहूं।। अब खुले दरबार में आया तो यहां भी फाइल ही नहीं मिली तो संतोषजनक जवाब तक नहीं मिल पाया।
फोटो : 07
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एक साल पहले जमा की नक्शे की फाइल आज हुई पास
जैन चौक निवासी पवन ने बताया कि उसके भाई अजय के नाम से नक्शे की फाइल नप कार्यालय में एक साल पहले जमा की गई थी। एक साल तक चक्कर लगवाने के बाद आज यह फाइल पास हो पाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे खुले दरबार समय-समय पर लगाए जाने चाहिए।
फोटो : 08
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दो साल बाद मिल पाई है राहत
हनुमान गेट निवासी नरेश ने बताया कि पिछले दो साल से नक्शा पास करवाने के लिए नप के चक्कर लगा रहा था, लेकिन हर बार कोई ना कोई नई शर्त या खामी बताकर फाइल रोक दी जाती। अब दो साल बाद नक्शा पास होने पर राहत मिल पाई है।
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पहले दिन निपटाई गई नक्शे की 90 फाइलें
जब से नप चेयरमैन बना हुं तब से सबसे ज्यादा परेशानी लोगों के नक्शों काो लेकर देखने को मिली है। महिला व बुजुर्ग व्यक्ति फाइलों को लेकर चक्कर काटते थे। जिसे देखते हुए खुला दरबार लगाकर उनकी परेशानी का हल किया गया। खुलेदरबार के पहले दिन 90 नक्शों की फाइल निपटाई गई है, जो 2014 से लंबित थी।
रणसिंह यादव, चेयरमैन नप