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Ambala News: निकाली प्रभात फेरी, कथा कीर्तन सुन संगत निहाल
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नारायणगढ़ में निकाली गई प्रभातफेरी में शामिल हुए श्रद्धालु। संस्थ
नारायणगढ़। नारायणगढ़ के गुरुद्वारा श्री सिंह सभा की ओर से श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित प्रभातफेरी निकाली। गुरुद्वारा साहिब से प्रभातफेरी शुरू होकर कई स्थानों से संगत की ओर से शबद कीर्तन करती अग्रवाल धर्मशाला के नजदीक स्थित अनिल ग्रोवर के घर पहुंची।
गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी मलकीत सिंह, रणजीत सिंह ने कथा कीर्तन सुनाकर निहाल किया। सभा के सचिव फरिंद्र पाल गुलियानी ने बताया कि जब बाबर ने सैदपुर में रह रहे लोगों पर अत्याचार किए और बेकसूर लोगो को बंदी बना लिया और फिर उनसे अनाज पीसने की चक्की चलवाने का कार्य शुरू किया। इस पर गुरु नानक देव जी ने भी भाई मरदाना को कहा कि रबाब बजा नाम दी ठंड डालनी है और कीर्तन शुरू कर दिया।
बाबर के सिपाहियों ने गुरु साहिब को भी बंदी बनाने का कार्य किया तो गुरु साहिब ने जैसे ही वहां कीर्तन शुरू किया तो अनाज पीसने की चक्कियां अपने आप ही चलने लगी। इस बात का बाबर को पता चला तो वह गुरु साहिब के पास पहुंचा और गुरु साहिब के नूर को देखकर हैरान हो गया।
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बाबर ने कहा कि मुझसे गलती हुई है मैं आपको रिहा करता हूं, परंतु गुरु नानक साहिब ने बाबर को जाबर और जालम कहकर उसे समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि बादशाह का फर्ज गरीब लोगों की भलाई करना है न कि गरीबों पर अत्याचार करना। जिस पर बाबर ने भी गुरु साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर आगे से ऐसा न करने की बात कहकर सभी बंदी लोगो को रिहा कर दिया। इस अवसर पर सुरजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, गगनदीप सिंह, महिंदर सिंह, मनोहर लाल चानना और जसबीर खुराना मौजूद रहे।
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गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी मलकीत सिंह, रणजीत सिंह ने कथा कीर्तन सुनाकर निहाल किया। सभा के सचिव फरिंद्र पाल गुलियानी ने बताया कि जब बाबर ने सैदपुर में रह रहे लोगों पर अत्याचार किए और बेकसूर लोगो को बंदी बना लिया और फिर उनसे अनाज पीसने की चक्की चलवाने का कार्य शुरू किया। इस पर गुरु नानक देव जी ने भी भाई मरदाना को कहा कि रबाब बजा नाम दी ठंड डालनी है और कीर्तन शुरू कर दिया।
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बाबर के सिपाहियों ने गुरु साहिब को भी बंदी बनाने का कार्य किया तो गुरु साहिब ने जैसे ही वहां कीर्तन शुरू किया तो अनाज पीसने की चक्कियां अपने आप ही चलने लगी। इस बात का बाबर को पता चला तो वह गुरु साहिब के पास पहुंचा और गुरु साहिब के नूर को देखकर हैरान हो गया।
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बाबर ने कहा कि मुझसे गलती हुई है मैं आपको रिहा करता हूं, परंतु गुरु नानक साहिब ने बाबर को जाबर और जालम कहकर उसे समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि बादशाह का फर्ज गरीब लोगों की भलाई करना है न कि गरीबों पर अत्याचार करना। जिस पर बाबर ने भी गुरु साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर आगे से ऐसा न करने की बात कहकर सभी बंदी लोगो को रिहा कर दिया। इस अवसर पर सुरजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, गगनदीप सिंह, महिंदर सिंह, मनोहर लाल चानना और जसबीर खुराना मौजूद रहे।