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मानवता की रक्षा का अनुपम उदाहरण है गुरु तेग बहादुर साहिब का जीवन : प्रो. कुलदीप

Sat, 15 Nov 2025 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sat, 15 Nov 2025 02:28 AM IST
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The life of Guru Tegh Bahadur Sahib is a unique example of protecting humanity: Prof. Kuldeep
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबो​धित करते कुलपति प्रो. व
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें बलिदान वर्ष का आयोजन श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभागाध्यक्ष प्रो. कुलदीप सिंह और एनआईटी कुरुक्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गौरव सैनी ने बतौर मुख्य वक्ता विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की।
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मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप सिंह ने कहा कि गुरु श्री तेग बहादुर साहिब जी का चरित्र मानवता, साहस और आस्था की रक्षा का अनुपम उदाहरण है। गुरु साहिब ने केवल अपने अनुयायियों के लिए नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र और विश्व मानवता के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। उस समय इस्लामी सत्ता के अत्याचार चरम पर थे। कश्मीरी पंडितों की आस्था, अस्तित्व और स्वतंत्रता पर गहरा संकट मंडरा रहा था, ऐसे कठिन समय में वे गुरु साहिब जी की शरण में पहुंचे। गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने न किसी भय, न द्वेष और न ही किसी स्वार्थ के कारण बल्कि केवल धर्म, आस्था और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का निर्णय लिया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, कार्यक्रम संयोजक प्रो. रजनीश सिंह समेत अनेक अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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भारत ने कभी अन्याय सहन नहीं किया : प्रो. गौरव
वक्ता प्रो. गौरव सैनी ने कहा कि विश्व इतिहास में जितनी क्रूरताएं, अन्याय और असामानताएं भारत ने सहन की हैं, उतनी शायद किसी और सभ्यता ने नहीं झेलीं। समय के विभिन्न कालखंडों में भारत ने आध्यात्मिक जागरण, भक्ति आंदोलन और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से इन चुनौतियों का सामना किया। भारत की महान परंपरा यह रही है कि इस देश ने कभी भी अन्याय को स्वीकार नहीं किया।
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गुरु साहिब के संदेश को जीवन में उतारने की आवश्यकता : कुलपति
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी अध्यात्म और वीरता दोनों के अद्भुत स्वरूप के प्रतीक हैं। गुरु साहिब ने समाज में धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता के मूल्य स्थापित किए, जो आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह इतिहास का ऐसा पहला उदाहरण है, जब कोई बलिदान देने वाला, बलिदान लेने वाले के पास खुद जाता है। अगर आज सनातन धरती पर बचा है तो वह सिर्फ गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वजह से बचा है। उनके संदेश को जीवन में उतारे जाने की आवश्यकता है।
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