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बारिश खोल देगी सफाई की पोल
अंबाला /अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2015 01:22 AM IST
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मानसून से पहले ट्विन सिटी के नाले साफ करने के अफसरों के दावों पर पानी फिर जाएगा। अभी भी कई नाले जहां सफाई को तरस रहे हैं, वहीं प्रशासनिक दावों पर भी यह सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। इसी को लेकर तीन बार प्रशासनिक व एमसीए अधिकारी दौरा कर चुके हैं, लेकिन हालात नहीं बदले हैं। अब झमाझम मानसून में लोगों को वही हालात झेलने होंगे, जो सालों से झेलते आ रहे हैं।
यह था प्रशासन का दावा
प्रशासन ने एमसीए अफसरों को निर्देश दिए थे कि वे ट्विन सिटी के नालों की सफाई मानसून से पहले कर लें। इसके लिए दो बार अंतिम तिथिया निर्धारित की गईं। इस बार एमसीए को यह सफाई पूरी तरह से 20 जून तक करने थे। इसी दौरान एमसीए मेयर रमेश मल ने दो बार दौरा किया, लेकिन दोनों बार ही अभियान में जबरदस्त खामियां मिलीं। इसी को लेकर वीडियो भी बनाई गई, लेकिन इसके बाद भी हालात जस के तस हैं और इन में खास सुधार नहीं आया।
कालोनियों के छोटे नाले हैं बाधित
अंबाला कैंट की कालोनियों के छोटे नालों की स्थिति खराब है। हर कालोनी में नाले नालियां बाधित हैं या फिर उनमें घास अथवा पॉलीथिन फंसे हुए हैं। यह स्थिति हर कालोनी में ही बनी हुई है, जिसकी ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कालोनियों में डस्टबिन न होने के कारण ही पालीथिन व अन्य कूड़ा कर्कट सड़कों अथवा नालियों में फैंक देे हैं। कई घरों में तो कूड़ा उठाने के लिए प्राइवेट कर्मी मकान मालिकों ने लगा रखे है, लेकिन अधिकतर घर अथवा दुकानें ऐसी हैं, जो कूड़ा सीधे नालों या नालियों में फैंकते हैं।
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यह स्थिति है नालों की
कैंट के दयाल बाग चौक के पास से होकर निकलने वाले नाले में घास जमी हुई है। यही स्थित गुडग़ुडिय़ा नाले की भी है, जहां पर सिर्फ ऊपरी सतह को ही साफ किया गया है। इसके अलावा महेश नगर, बीडी फ्लोर मिल के पीछे से निकले वाला नाला भी ऊपरी सतह से ही साफ किया गया है। कैंट बस स्टैंड के पास बना नाला बाधित है। बब्याल में भी एक छोटा नाला गंदगी से अटा है, जबकि जंगली पौधे तक आसपास उगे हैं और इस नाले के फ्लो को बाधित कर रहे हैं।
सफाई अभियान तो साल भर चलना चाहिए, क्यों मानसून से पहले ही इसे शुरु किया जाता है। सफाई भी पूरी तरह से नहीं की जाती, बस सिर्फ ऊपरी सतह को ही साफ कर देते हैं, जबकि नीचे तक इन नालों की सफाई होनी चाहिए। दूसरा भीतरी कालोनियों में छाोटे नालों पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे समस्या ज्यादा होती है।
-आनंद मोहन शुक्ला, कैंट।
जब तक पॉलीथिन पर रोक नहीं लगती, नाले या नालियां जाम होंगी। प्रशासन खुद सख्ती नहीं कर रहा, जिससे नालों के चोक होने की स्थिति बनती है। गुड़गुड़िया नाले को ही देख लें, लगता नहीं है कि यह कभी नीचे तक साफ भी हो पाएगा।
-कुमार प्रशांत, कैंट।
बड़े नालों और मुख्य नालियों की सफाई के लिए भी विशेष सफाई टीमें तैनात की गई हैं। सफाई के मामले में कोई समझौता नही किया जाएगा और सफाई कर्मियों की पहचान के लिए ड्रैस कोड निर्धारित करने के साथ-साथ बायोमैट्रिक मशीने से उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। सफाई के मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
-कैप्टन शक्ति सिंह, आयुक्त, नगर निगम।
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यह था प्रशासन का दावा
प्रशासन ने एमसीए अफसरों को निर्देश दिए थे कि वे ट्विन सिटी के नालों की सफाई मानसून से पहले कर लें। इसके लिए दो बार अंतिम तिथिया निर्धारित की गईं। इस बार एमसीए को यह सफाई पूरी तरह से 20 जून तक करने थे। इसी दौरान एमसीए मेयर रमेश मल ने दो बार दौरा किया, लेकिन दोनों बार ही अभियान में जबरदस्त खामियां मिलीं। इसी को लेकर वीडियो भी बनाई गई, लेकिन इसके बाद भी हालात जस के तस हैं और इन में खास सुधार नहीं आया।
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कालोनियों के छोटे नाले हैं बाधित
अंबाला कैंट की कालोनियों के छोटे नालों की स्थिति खराब है। हर कालोनी में नाले नालियां बाधित हैं या फिर उनमें घास अथवा पॉलीथिन फंसे हुए हैं। यह स्थिति हर कालोनी में ही बनी हुई है, जिसकी ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कालोनियों में डस्टबिन न होने के कारण ही पालीथिन व अन्य कूड़ा कर्कट सड़कों अथवा नालियों में फैंक देे हैं। कई घरों में तो कूड़ा उठाने के लिए प्राइवेट कर्मी मकान मालिकों ने लगा रखे है, लेकिन अधिकतर घर अथवा दुकानें ऐसी हैं, जो कूड़ा सीधे नालों या नालियों में फैंकते हैं।
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यह स्थिति है नालों की
कैंट के दयाल बाग चौक के पास से होकर निकलने वाले नाले में घास जमी हुई है। यही स्थित गुडग़ुडिय़ा नाले की भी है, जहां पर सिर्फ ऊपरी सतह को ही साफ किया गया है। इसके अलावा महेश नगर, बीडी फ्लोर मिल के पीछे से निकले वाला नाला भी ऊपरी सतह से ही साफ किया गया है। कैंट बस स्टैंड के पास बना नाला बाधित है। बब्याल में भी एक छोटा नाला गंदगी से अटा है, जबकि जंगली पौधे तक आसपास उगे हैं और इस नाले के फ्लो को बाधित कर रहे हैं।
सफाई अभियान तो साल भर चलना चाहिए, क्यों मानसून से पहले ही इसे शुरु किया जाता है। सफाई भी पूरी तरह से नहीं की जाती, बस सिर्फ ऊपरी सतह को ही साफ कर देते हैं, जबकि नीचे तक इन नालों की सफाई होनी चाहिए। दूसरा भीतरी कालोनियों में छाोटे नालों पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे समस्या ज्यादा होती है।
-आनंद मोहन शुक्ला, कैंट।
जब तक पॉलीथिन पर रोक नहीं लगती, नाले या नालियां जाम होंगी। प्रशासन खुद सख्ती नहीं कर रहा, जिससे नालों के चोक होने की स्थिति बनती है। गुड़गुड़िया नाले को ही देख लें, लगता नहीं है कि यह कभी नीचे तक साफ भी हो पाएगा।
-कुमार प्रशांत, कैंट।
बड़े नालों और मुख्य नालियों की सफाई के लिए भी विशेष सफाई टीमें तैनात की गई हैं। सफाई के मामले में कोई समझौता नही किया जाएगा और सफाई कर्मियों की पहचान के लिए ड्रैस कोड निर्धारित करने के साथ-साथ बायोमैट्रिक मशीने से उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। सफाई के मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
-कैप्टन शक्ति सिंह, आयुक्त, नगर निगम।