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Ambala News: मायोपिया जागरूकता सप्ताह का समापन
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छावनी के नागरिक अस्पताल में नेत्र विभाग द्वारा आयोजित मायोपिया जागरूकता सप्ताह के समापन पर लोगो
अंबाला। छावनी के नागरिक अस्पताल में नेत्र विभाग द्वारा आयोजित मायोपिया जागरूकता सप्ताह का बुधवार को समापन हुआ। यह जागरूकता सप्ताह 14 नवंबर से 20 नवंबर तक पीएमओ व नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक रेणु बेरी पजनी की देखरेख मे आयोजित किया गया। इस दौरान नेत्र रोग विभाग से चिकित्सक सुधा बजाज, चिकित्सक पुनीत ढींगरा, रेजीडेंट चिकित्सक दर्शना सोलंकी, चिकित्सक अनु यादव चिकित्सक चित्रा शर्मा व स्टाफ मौजूद रहा।
चिकित्सक रेणु बेरी पजनी ने बताया कि मायोपिया या निकट दृष्टि दोष एक आम आंख की समस्या है। इसमें दूर की चीज़ें धुंधली दिखती हैं। मायोपिया के कारण नेत्र गोलक का बहुत लंबा होना, कॉर्निया का बहुत ज़्यादा घुमावदार होना, बढ़ी हुई ऑप्टिकल शक्ति वाला लेंस हो सकते हैं।
चिकित्सक सुधा बजाज ने बताया मायोपिया आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होता है और वयस्कता तक बढ़ता जाता है मायोपिया को चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस, या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर पुनीत के अनुसार मायोपिया होने की प्रवृत्ति ज़्यादा समय कंप्यूटर पर काम करने, वीडियो गेम खेलने से मायोपिया होने का खतरा बढ़ जाता है, स्मार्टफ़ोन पर ज़्यादा समय बिताने से मायोपिया होने का खतरा करीब 30 प्रतिशत बढ़ जाता है।
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रेजीडेंट चिकित्सक अनु यादव ने बताया कि अक्सर देखने को मिलता है कि बच्चे घर से बाहर खुले मैदान में कम खेलते है ओर मोबाइल फोन या टीवी देखने मे अधिक व्यस्त रहते है जिसकी वजह से मायोपिया के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, इसलिए अभिभावकों को भी चाहिए कि बच्चो को प्रतिदिन कम से कम 1 से 2 घंटे मैदान में खेलने के लिए अवश्य भेजे। हर 20 मिनट के बाद कम से कम 20 सेकेंड के लिए अपनी आखों को आराम देना चाहिए।
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चिकित्सक रेणु बेरी पजनी ने बताया कि मायोपिया या निकट दृष्टि दोष एक आम आंख की समस्या है। इसमें दूर की चीज़ें धुंधली दिखती हैं। मायोपिया के कारण नेत्र गोलक का बहुत लंबा होना, कॉर्निया का बहुत ज़्यादा घुमावदार होना, बढ़ी हुई ऑप्टिकल शक्ति वाला लेंस हो सकते हैं।
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चिकित्सक सुधा बजाज ने बताया मायोपिया आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होता है और वयस्कता तक बढ़ता जाता है मायोपिया को चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस, या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर पुनीत के अनुसार मायोपिया होने की प्रवृत्ति ज़्यादा समय कंप्यूटर पर काम करने, वीडियो गेम खेलने से मायोपिया होने का खतरा बढ़ जाता है, स्मार्टफ़ोन पर ज़्यादा समय बिताने से मायोपिया होने का खतरा करीब 30 प्रतिशत बढ़ जाता है।
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रेजीडेंट चिकित्सक अनु यादव ने बताया कि अक्सर देखने को मिलता है कि बच्चे घर से बाहर खुले मैदान में कम खेलते है ओर मोबाइल फोन या टीवी देखने मे अधिक व्यस्त रहते है जिसकी वजह से मायोपिया के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, इसलिए अभिभावकों को भी चाहिए कि बच्चो को प्रतिदिन कम से कम 1 से 2 घंटे मैदान में खेलने के लिए अवश्य भेजे। हर 20 मिनट के बाद कम से कम 20 सेकेंड के लिए अपनी आखों को आराम देना चाहिए।