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Ambala News: गृह विज्ञान की वैज्ञानिक तैयार कर रहीं गेहूं के बीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 09:00 AM IST
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Home science scientist preparing wheat seeds
अंबाला शहर के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में खेत में उगी गेंहू की फसल। - फोटो : Ambala
अक्सर देखने में आया है कि वैज्ञानिक जिस विषय में पीएचडी या शोध करता है, उसका पूरा जीवन उसी की प्रैक्टिस में निकल जाता है। इसी विषय पर वह प्रशिक्षण भी देता है। मगर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंबाला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में डॉ. सुनीता आहुजा इनसे अलग है। वे गृह विज्ञान की विशेषज्ञ हैं और कार्य फसलों और बागानों पर कर रही हैं।
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यहां खास बात यह है कि वह ऐसी फसलों के बीज तैयार कर ही हैं, जिसमें कम पानी और कम रसायन की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र के पास शहर के बीचों-बीच कई एकड़ जमीन है। इसमें बागवानी और नई किस्मों का परीक्षण किया जाता है। इस बार 25 एकड़ जमीन पर गेहूं की नई किस्म के बीज तैयार किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये जल्द तक पहुंचेंगे।
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विशेषज्ञों से मोबाइल पर मिल जाती है सलाह
आमतौर पर कृषि विज्ञान केंद्रों का निर्माण विश्वविद्यालय की ओर से किए कार्यों को किसानों तक पहुंचाने का है। किसानों को प्रशिक्षण देकर नई तकनीक और फसल बोने की अच्छी प्रैक्टिस और किसानों की फसल संबंधी समस्या को वैज्ञानिकों के माध्यम से हल निकालने का काम जिनमें मुख्य तौर पर किया जाता है। मगर वैज्ञानिकों को कई बार अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से बीज का परीक्षण करना होता है। तभी यह बताया जाता है कि यह फसल इन क्षेत्रों में बोने के लिए उपयुक्त है।
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यहां से बीच जाते हैं यमुनानगर
अब गृह विज्ञान की पृष्ठभूमि होने के बावजूद डॉ. सुनीता को अंबाला में कृषि क्षेत्र में हाथ आजमाने में चुनौतियां तो कई आईं, मगर विज्ञानियों की सलाह पर काम करते हुए लंबे समय से विभिन्न फसलों के उत्तम किस्म के बीज तैयार कर रही हैं। अगर फसल में कोई दिक्कत आए तो मोबाइल से विशेषज्ञों को समस्या से अवगत कराया जाता है तो फोन पर ही उपचार हो जाता है। डॉ. सुनीता खुद भी खेती किसानी के विषयों के पढ़कर हाथ आजमाती हैं। इससे अंबाला केविके से उत्तम गुणवत्ता के बीज तैयार होते हैं जो हरियाणा सीड कार्पोरेशन यमुनानगर को सप्लाई किए जाते हैं। इसके बाद हरियाणा सीड कार्पोरशन इन बीजों को आगे किसानों को बिक्री करने का काम करती है।

पहली बार बोया कम पानी में होने वाला गेहूं
डॉ. सुनीता बताती हैं कि कृषि विज्ञान केंद्र की कोआर्डिनेटर होने के चलते सबसे पहली जिम्मेदारी है कि किसानों को विस्तार शिक्षा की सभी जानकारी मुहैया कराई जाए। इसके बाद यहां खेतों में फसलों पर इस्तेमाल होते हैं। केविके के 25 एकड़ फार्म पर इस बार गेहूं की नई किस्म डीबीडब्ल्यूू-222 को बोया है। गेहूं की बेहतरीन किस्मों में शामिल होने वाले इस किस्म को आईसीएआर करनाल की ओर से विकसित किया है। इसकी खासियत यह है कि इसमें पानी की कम जरूरत होती है। इसके साथ ही इसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक है। यह किस्म कम से कम 20 प्रतिशत पानी की बचत करती है। इसके साथ ही 140 से 145 दिनों में तैयार होती है। प्रति हेक्टेयर 65 से 80 क्विंटल तक पैदावार भी दे देती।

डा.सुनीता आहूजा।

डा.सुनीता आहूजा।- फोटो : Ambala

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