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कर्मचारियों ने जताया रोष, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा मांगपत्र
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अंबाला सिटी। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष मार्च निकाला। विभिन्न विभागों के सैकड़ों कच्चे व पक्के कर्मचारियों ने प्रदर्शन में भाग लिया। कर्मचारी रोष मार्च करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। वहां सरकार से उनकी मांगों को जल्द से जल्द मानने के मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा।
कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एसकेएस प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि प्रदेश में कार्यरत सभी विभागों, बोर्ड, पंचायती राज संस्थाओं निगम, नगर निगम, परिषद व पालिकाओं, सोसायटी व विश्वविद्यालयों से कच्चे कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम की आड़ में सरकार किसी न किसी बहाने से छंटनी करना चाहती है। कौशल रोजगार निगम में कई पोस्ट खत्म कर दी गई हैं।
सालों से काम करने वाले कर्मियों पर निगम ने अपनी शैक्षणिक योग्यता थोप दी है। निगम रेट निश्चित कर कर्मियों के वेतन कम कर दिए हैं। एक कर्मचारी को दो-तीन पदों का काम देकर 11 महीने के लिए ऑफर लेटर दिए जा रहे हैं। रेगुलर होने के अवसर खत्म कर दिए गए हैं। सरकार ने कोरोना काल में अपनी जान को हथेली पर रखकर जनता की सेवा करने वाले तीन हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों में रोष है।
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सार्वजनिक सुविधाएं हो जाएगी महंगी : मांगे राम
केंद्रीय कमेटी के सदस्य मांगे राम तिगरा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश में भाजपा नेतृत्व की सरकार नव उदारीकरण की नीतियों को लागू करने में अभी नहीं तो कभी नहीं का टारगेट लेकर आगे बढ़ रही है। इस जनविरोधी फैसले से जनता को मिलने वाली सार्वजनिक सुविधाएं महंगी होंगी। वहीं, रोजगार के अवसर सिकुड़ने से बेरोजगारों का शोषण होगा। ऊपर से केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार लेबर कोड मजदूरों को गुलाम बनाकर रख देंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में पिछड़ जाएगा विकास
हरियाणा राज्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राम गोपाल व रिटायर कर्मचारी संघ के जिला प्रधान धर्मवीर सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन नीति के अंतर्गत बेशकीमती संपत्तियों को देसी व विदेशी पूंजीपतियों को कौड़ियों के भाव सौंपकर छह लाख करोड़ रुपये जुटाने का एलान किया है। सरकार का यह कदम सीधे जनता की मेहनत की कमाई व टैक्स पेयर के पैसे की लूट है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्र विकास में पिछड़ जाएगा।
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कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एसकेएस प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि प्रदेश में कार्यरत सभी विभागों, बोर्ड, पंचायती राज संस्थाओं निगम, नगर निगम, परिषद व पालिकाओं, सोसायटी व विश्वविद्यालयों से कच्चे कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम की आड़ में सरकार किसी न किसी बहाने से छंटनी करना चाहती है। कौशल रोजगार निगम में कई पोस्ट खत्म कर दी गई हैं।
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सालों से काम करने वाले कर्मियों पर निगम ने अपनी शैक्षणिक योग्यता थोप दी है। निगम रेट निश्चित कर कर्मियों के वेतन कम कर दिए हैं। एक कर्मचारी को दो-तीन पदों का काम देकर 11 महीने के लिए ऑफर लेटर दिए जा रहे हैं। रेगुलर होने के अवसर खत्म कर दिए गए हैं। सरकार ने कोरोना काल में अपनी जान को हथेली पर रखकर जनता की सेवा करने वाले तीन हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों में रोष है।
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सार्वजनिक सुविधाएं हो जाएगी महंगी : मांगे राम
केंद्रीय कमेटी के सदस्य मांगे राम तिगरा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश में भाजपा नेतृत्व की सरकार नव उदारीकरण की नीतियों को लागू करने में अभी नहीं तो कभी नहीं का टारगेट लेकर आगे बढ़ रही है। इस जनविरोधी फैसले से जनता को मिलने वाली सार्वजनिक सुविधाएं महंगी होंगी। वहीं, रोजगार के अवसर सिकुड़ने से बेरोजगारों का शोषण होगा। ऊपर से केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार लेबर कोड मजदूरों को गुलाम बनाकर रख देंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में पिछड़ जाएगा विकास
हरियाणा राज्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राम गोपाल व रिटायर कर्मचारी संघ के जिला प्रधान धर्मवीर सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन नीति के अंतर्गत बेशकीमती संपत्तियों को देसी व विदेशी पूंजीपतियों को कौड़ियों के भाव सौंपकर छह लाख करोड़ रुपये जुटाने का एलान किया है। सरकार का यह कदम सीधे जनता की मेहनत की कमाई व टैक्स पेयर के पैसे की लूट है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्र विकास में पिछड़ जाएगा।