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बैंक की मजबूरियां, कम नहीं हो रही परेशानियां
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:42 AM IST
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बैंक की मजबूरियां, कम नहीं हो रही परेशानियां
- फोटो : Amar Ujala
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नोटबंदी के 26 दिन के बाद भी लोगों को बैंक या एटीएम से कैश लेना मुश्किल ही दिख रहा है। न तो बैंक से ही पूरा कैश मिल पा रहा है और न ही एटीएम से मनचाही नकदी मिल पा रही है। हालात यह हैं कि लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है, जबकि लोगों का यह मानना भी है कि जनवरी में जाकर ही हालात सामान्य होंगे। इसके लिए लोगों को तैयार रहना होगा। आरबीआई जो राहत दे रही है, उसके तहत भी लोगों को बैंकों से राहत नहीं मिल पा रही है।
नियमित रूप से जो खर्च होना है, उसे लेकर लोग परेशान हैं। लाइन में लगने के बाद जब कैश खत्म हो गया बताया जाता है, तो लोग इस नोटबंदी को कोसने लगे हैं। बैंकों में जो कैश आ रहा है, वह दोपहर तक या फिर इससे पहले ही खत्म हो रहा है। इसी तरह एटीएम खाली पड़े हैं या फिर कुछ ही घंटों में इनमें कैश खत्म हो रहा है। अब जनता के लिए परेशानी यह है कि वह काम पर जाए या फिर एटीएम या बैंक में लाइन लगाकर कैश हासिल करें। इस पर भी हालात यह हैं कि एक बार में पूरा कैश नहीं मिल रहा, जबकि काम से छुट्टी लेकर या फिर परिवार के किसी अन्य सदस्य की ड्यूटी लगाकर बैंक की लाइनों में खड़े हो रहे हैं और कैश लेते हैं।
यह कहते हैं लोग
नोटबंदी ने आम जनता को परेशान किया है, जबकि अब तो पूरा कैश भी बैंक से नहीं मिलता। घर के खर्च के अलावा अन्य खर्चे भी हैं, लेकिन अब बार-बार तो बैंक या एटीएम की लाइन में लग नहीं सकते। आरबीआई कहती है कि चौबीस हजार निकलवा सकते हैं, बैंक कहते हैं कैश नहीं है चार हजार ले लो।
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- निर्मला शुक्ला, गृहणी अंबाला कैंट
पति प्राइवेट जॉब करते हैं, जबकि रविवार के दिन एटीएम की लाइन में लगे तो तीन घंटे के बाद नंबर आया और वह भी मात्र दो हजार रुपये ही निकल पाए। इसी में पूरा हफ्ता तो चल नहीं सकता, जबकि घर में थोड़ी जमा पूंजी थी, तो थोड़ी राहत रही, लेकिन लगातार दूसरे महीने तक में एडजस्ट कैसे करें? अब तो कुछ करे ताकि एक बार बैंक जाएं और महीने भर के खर्च जितना कैश तो निकलवा सकें।
- सोनिया गुप्ता, गृहणी अंबाला सिटी
दुकान पर तीन वर्कर काम करते हैं, उनको वेतन देना है, बच्चों की फीस है, अन्य रूटीन खर्च हैं, तो क्या करें। नवंबर में नोटबंदी के बाद एकाएक करंसी का संकट आ गया, तो काम भी मंद पड़ गया, धीरे-धीरे नई करंसी लोगों के हाथ में आई, तो दिसंबर आ गया, जिसमें महीने भर का खर्च तो चाहिए। अब बैंक से पूरा कैश नहीं मिलता, एटीएम पर लाइनें लंबी है या फिर कईंयों में कैश नहीं है। लगता नहीं कि जनवरी में भी राहत मिलेगी।
- अजय कुमार, कारोबारी अंबाला कैंट
दिहाड़ी करने के लिए जाएं या फिर बैंक से कैश निकलवाएं। रोज तो लाइनों में लग नहीं सकते, जबकि काम का नुकसान भी हो रहा है। परिवार बड़ा है, तो खर्च भी ज्यादा है, जिसके कारण काफी परेशानी है। दो हजार की करंसी लेकर चार पांच सौ रुपये का सामान खरीदना ही मुश्किल है। समझ नहीं आता कि क्या करें, जबकि बैंक से भी कोई राहत नहीं है।
- अमित कुमार, मजदूर अंबाला सिटी
बैंक कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे सवाल
बैंकों से जिस तरह से पूरा कैश नहीं मिल रहा है, उससे बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। इनका कहना है कि सरकार के दावों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है और यही सब बैंकों की कार्यप्रणाली पर शंका पैदा कर रहे हैं। कैंट के आंनद मोहन शुक्ला, स्नेहपाल, चंद्र अरोड़ा, लक्ष्यवीर, सुनील ठाकुर, युवराज, जसविंदर सिंह का कहना है कि सरकार से कैश निकासी की जो लिमिट दी गई है वह बैंक से पूरी क्यों नहीं मिल रही। यदि सरकार द्वारा यह राहत दी जा रही है, तो बैंकों को भी इसी तरह से कैश दिया जा रहा होगा। इसके अलावा आरबीआई ने कुछ बैंक अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है, जिससे लगता है कि कैश देने के मामले में कहीं न कहीं गड़बड़ी तो है। ऐसा क्या कारण है कि 26 दिन बाद भी पूरी मात्रा में बैंक कैश नहीं दे पा रहे हैं, जबकि यह जल्द ही खत्म हो रहा है।
जनवरी से मिलेगा नोटबंदी का फायदा : कटारिया
सांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि नोटंबदी के बाद जनवरी माह से लोगों को इसका फायदा देखने को मिलेगा। विपक्ष बिना वजह सरकार पर आरोप लगा रहा है, जबकि देश की जनता सरकार के साथ है। पूर्व की यूपीए सरकार में देश में करोड़ों रुपये के कई बड़े घोटाले हुए हैं। प्रधानमंत्री का यह कदम सराहनीय और देश के विकास में महत्वपूर्ण रहेगा।
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नियमित रूप से जो खर्च होना है, उसे लेकर लोग परेशान हैं। लाइन में लगने के बाद जब कैश खत्म हो गया बताया जाता है, तो लोग इस नोटबंदी को कोसने लगे हैं। बैंकों में जो कैश आ रहा है, वह दोपहर तक या फिर इससे पहले ही खत्म हो रहा है। इसी तरह एटीएम खाली पड़े हैं या फिर कुछ ही घंटों में इनमें कैश खत्म हो रहा है। अब जनता के लिए परेशानी यह है कि वह काम पर जाए या फिर एटीएम या बैंक में लाइन लगाकर कैश हासिल करें। इस पर भी हालात यह हैं कि एक बार में पूरा कैश नहीं मिल रहा, जबकि काम से छुट्टी लेकर या फिर परिवार के किसी अन्य सदस्य की ड्यूटी लगाकर बैंक की लाइनों में खड़े हो रहे हैं और कैश लेते हैं।
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यह कहते हैं लोग
नोटबंदी ने आम जनता को परेशान किया है, जबकि अब तो पूरा कैश भी बैंक से नहीं मिलता। घर के खर्च के अलावा अन्य खर्चे भी हैं, लेकिन अब बार-बार तो बैंक या एटीएम की लाइन में लग नहीं सकते। आरबीआई कहती है कि चौबीस हजार निकलवा सकते हैं, बैंक कहते हैं कैश नहीं है चार हजार ले लो।
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- निर्मला शुक्ला, गृहणी अंबाला कैंट
पति प्राइवेट जॉब करते हैं, जबकि रविवार के दिन एटीएम की लाइन में लगे तो तीन घंटे के बाद नंबर आया और वह भी मात्र दो हजार रुपये ही निकल पाए। इसी में पूरा हफ्ता तो चल नहीं सकता, जबकि घर में थोड़ी जमा पूंजी थी, तो थोड़ी राहत रही, लेकिन लगातार दूसरे महीने तक में एडजस्ट कैसे करें? अब तो कुछ करे ताकि एक बार बैंक जाएं और महीने भर के खर्च जितना कैश तो निकलवा सकें।
- सोनिया गुप्ता, गृहणी अंबाला सिटी
दुकान पर तीन वर्कर काम करते हैं, उनको वेतन देना है, बच्चों की फीस है, अन्य रूटीन खर्च हैं, तो क्या करें। नवंबर में नोटबंदी के बाद एकाएक करंसी का संकट आ गया, तो काम भी मंद पड़ गया, धीरे-धीरे नई करंसी लोगों के हाथ में आई, तो दिसंबर आ गया, जिसमें महीने भर का खर्च तो चाहिए। अब बैंक से पूरा कैश नहीं मिलता, एटीएम पर लाइनें लंबी है या फिर कईंयों में कैश नहीं है। लगता नहीं कि जनवरी में भी राहत मिलेगी।
- अजय कुमार, कारोबारी अंबाला कैंट
दिहाड़ी करने के लिए जाएं या फिर बैंक से कैश निकलवाएं। रोज तो लाइनों में लग नहीं सकते, जबकि काम का नुकसान भी हो रहा है। परिवार बड़ा है, तो खर्च भी ज्यादा है, जिसके कारण काफी परेशानी है। दो हजार की करंसी लेकर चार पांच सौ रुपये का सामान खरीदना ही मुश्किल है। समझ नहीं आता कि क्या करें, जबकि बैंक से भी कोई राहत नहीं है।
- अमित कुमार, मजदूर अंबाला सिटी
बैंक कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे सवाल
बैंकों से जिस तरह से पूरा कैश नहीं मिल रहा है, उससे बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। इनका कहना है कि सरकार के दावों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है और यही सब बैंकों की कार्यप्रणाली पर शंका पैदा कर रहे हैं। कैंट के आंनद मोहन शुक्ला, स्नेहपाल, चंद्र अरोड़ा, लक्ष्यवीर, सुनील ठाकुर, युवराज, जसविंदर सिंह का कहना है कि सरकार से कैश निकासी की जो लिमिट दी गई है वह बैंक से पूरी क्यों नहीं मिल रही। यदि सरकार द्वारा यह राहत दी जा रही है, तो बैंकों को भी इसी तरह से कैश दिया जा रहा होगा। इसके अलावा आरबीआई ने कुछ बैंक अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है, जिससे लगता है कि कैश देने के मामले में कहीं न कहीं गड़बड़ी तो है। ऐसा क्या कारण है कि 26 दिन बाद भी पूरी मात्रा में बैंक कैश नहीं दे पा रहे हैं, जबकि यह जल्द ही खत्म हो रहा है।
जनवरी से मिलेगा नोटबंदी का फायदा : कटारिया
सांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि नोटंबदी के बाद जनवरी माह से लोगों को इसका फायदा देखने को मिलेगा। विपक्ष बिना वजह सरकार पर आरोप लगा रहा है, जबकि देश की जनता सरकार के साथ है। पूर्व की यूपीए सरकार में देश में करोड़ों रुपये के कई बड़े घोटाले हुए हैं। प्रधानमंत्री का यह कदम सराहनीय और देश के विकास में महत्वपूर्ण रहेगा।