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अपंगता को हराकर दूसरों को जगाने चले जांबाज
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:12 AM IST
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अंबाला सिटी। आतंकियों से लड़ते अपने अंग खो चुके बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीटी के जवानों ने कभी अपंगता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। कई महीनों तक अस्पताल में इलाज चला, लेकिन उसके बावजूद इन जवानों ने फिर से अपने आप को खड़ा किया और अपनी जिंदगी से फिर एक वायदा करते हुए देश सेवा में जुट गए। अपने अंग खो चुके ये तमाम जवान आज भी विभिन्न सिक्योरिटी फोर्स में तैनात होकर देशसेवा में लगे हुए हैं। इन्हीं जवानों ने अब देशवासियों को देशप्रेम का पाठ पढ़ाने की ठानी है। जिसके चलते आदित्य मेहता फाउंडेशन से जुड़कर ये जवान बीएसएफ गैलेंट्स राइड और इनफिनिटी राइड का आयोजन कर रहे हैं। इसके तहत अपने अंग खो चुके हैं ये जवान वाघा बार्डर अमृतसर से दिल्ली तक साइकिल चला रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर का ये सफर कई दिनों तक पूरा किया जाना है। रविवार को ये तमाम 26 जवानों की टोली अंबाला सिटी किंगफिशर में पहुंची। जहां उनका अंबाला पुलिस अधीक्षक अभिषेक जोरवाल ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। उनके साथ बीएसएफ के जवान और अफसर भी मौजूद रहे। अपने अंग खो चुके हैं इन जवानों में ऐसे जवान है, जो अपना एक पांव, एक हाथ खो चुके हैं। नीचे के धड़ का काफी हिस्सा खो चुके हैं। जांघ का हिस्सा काफी खराब हो चुका है और अन्य अंग भंग हो चुका है। लेकिन उसके बावजूद ये सभी जवान साइकलिंग कर लोगों खासकर युवाओं से देशप्रेम का संदेश दे रहे हैं। इस दौरान साइकिलिंग के लिए पहुंचे शौर्य चक्र विजेता सीआरपीएफ के उप कमांडेंट रविंद्र कुमार, हवलदार सुनील कुमार यादव, सतीश कुमार, अजय देवड़ेकर, हरिंद्र सिंह, इंद्रजीत पांडे, वीरभद्र सिंह, अभय कामख्या, कायेगाव लाल इत्यादि ने बताया कि वे उन लोगों को भी जागरूक करते हैं, जो लोग विभिन्न हादसों में अपने अंग खोकर जिंदगी से हा जाते हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग अपने अंग खोने के बावजूद अपने हर काम अच्छे से करते हैं, जिसमें वे ड्राइविंग, साइकलिंग, स्वीमिंग व कार्यालय का सारा काम भी निपटाते हैं। लेकिन कभी हौसला नहीं हारते। फाउंडेशन के संचालक आदित्य मेहता ने बताया कि जल्द ही फाउंडेशन अपने अगले बड़े आयोजन इनफिटी राइड 2017 की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के तहत पहला आयोजन इसी माह आयोजित किया जाएगा। ये संगठन बीएसएफ, सीआरपीएफ और इंडो तिब्बत सीमा पुलिस के समर्थन से दिव्यांग खिलाड़ियों की मदद के लिए लगातार जागरूकता अभियान संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन की शुरूआत 2013 में की गई, ताकि डिसेबिलिटज से प्रभावित खिलाड़ियों की मदद की जा सके और लोगों को जागरूक किया जाए। उन्होंने बताया कि वे खुद पैैरा साइकिलिस्ट है, इसलिए उन्होंने इस अभियान को सेना के दिव्यांग जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए शुरू किया है। उनके अनुसार सोमवार को पैरा साइकिलिस्ट की ये टीम पानीपत के लिए रवाना होगी और वहां से दिल्ली पहुंचेगी। जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
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