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450 कैमरों की निगरानी में होंगे 49 रेलवे स्टेशन
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हरिंद्रपाल सिंह
अंबाला। मंडल के अधीन आने वाले लगभग 49 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा चाक-चौबंद होगी। स्टेशनों पर हो रही प्रत्येक गतिविधि पर अब आसानी से नजर रखी जा सकेगी। रेल टेल ने लगभग 450 कैमरे 9 बड़े रेलवे स्टेशनों सहित 40 रेलवे स्टेशनों पर स्थापित कर दिए हैं। जल्द ही कैमरों पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीकृत सर्वर रूम बनाया जाएगा, ताकि रेल प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी कभी भी किसी भी समय स्टेशन का मुआयना कर सकें।
रेल टेल यात्री सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी कर रही है, पहले जहां रेल टेल द्वारा स्टेशनों पर निशुल्क वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है, अब इसी कड़ी में स्टेशनों की सुरक्षा को लेकर भी अत्याधुनिक कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है। रेल टेल ने पहले ही छावनी जंक्शन के विभिन्न हिस्सों में लगभग 47 कैमरे लगा दिए हैं। इसी प्रकार मंडल के बठिंडा रेलवे स्टेशन, जगाधरी-यमुनानगर, कालका, पटियाला, राजपुरा, सरहिंद, मोहाली, सहारनपुर और जाखल रेलवे स्टेशन पर 30 से 40 कैमरे लगाए हैं। इसी प्रकार बीच रास्ते आने वाले लगभग 40 से अधिक मुख्य स्टेशनों के आवागमन द्वार पर 4-4 बुलेट कैमरे लगाए गए हैं। सभी कैमरों ने कार्य शुरू कर दिया है। संवाद
सेंट्रलाइजिड मॉनिटरिंग
पहली बार अंबाला मंडल के अधीन रेलवे स्टेशनों पर लगे कैमरे की एक साथ मॉनिटरिंग की जा सकेगी। पहले जहां सभी स्टेशनों के लिए अलग-अलग कंट्रोल रूम बनते थे, वहीं अब मंडल कार्यालय में तैयार होने वाले कंट्रोल रूम के जरिए रेल प्रबंधक अपने कार्यालय और घर पर बैठे-बैठे ही किसी भी स्टेशन पर नजर रख सकेंगे।
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नहीं हैंडओवर हुआ कंट्रोल रूम
अगर छावनी जंक्शन की बात करें तो यहां कंट्रोल रूम स्थापित हुए लगभग 10 दिन से अधिक का समय हो गया है। लेकिन अभी तक कंट्रोल रूम आरपीएफ के हवाले नहीं किया। इस कारण स्टेशन की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। इस कारण स्टेशन पर संदिग्धों की आवाजाही बढ़ती जा रही है। वहीं रेलवे परिसर से वाहन भी चोरी हो रहे हैं।
1 जुलाई 1987 को बना था मंडल
उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल का गठन 1 जुलाई 1987 को हुआ था। इसमें 639 किमी का रास्ता दिल्ली मंडल और 348 किमी का रास्ता फिरोजपुर मंडल से लिया गया। मंडल का कार्य 15 अगस्त 1988 को शुरू हुआ। मंडल का 62 प्रतिशत हिस्सा पंजाब से और बाकी का 39 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान व चंडीगढ़ से जुड़ा है। पूरे मंडल में 141 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन हैं। इसमें वर्ल्ड हैरिटेज सेक्शन कालका-शिमला नैरोगेज सेक्शन भी शामिल है।
15 दिन में कार्य होगा पूरा
कार्यालय में बैठे ही मंडल के सभी रेलवे स्टेशनों पर निगरानी रखी जा सकेगी। केंद्रीकृत कंट्रोल रूम में 55 इंच की 2 एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी। सर्वर रूम के साथ अन्य हाईटेक मशीनें भी स्थापित की जाएंगी, ताकि स्टेशन की प्रत्येक गतिविधि साफ व दुरुस्त नजर आए।
-आलोक कुमार, सह प्रबंधक रेल टेल।
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अंबाला। मंडल के अधीन आने वाले लगभग 49 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा चाक-चौबंद होगी। स्टेशनों पर हो रही प्रत्येक गतिविधि पर अब आसानी से नजर रखी जा सकेगी। रेल टेल ने लगभग 450 कैमरे 9 बड़े रेलवे स्टेशनों सहित 40 रेलवे स्टेशनों पर स्थापित कर दिए हैं। जल्द ही कैमरों पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीकृत सर्वर रूम बनाया जाएगा, ताकि रेल प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी कभी भी किसी भी समय स्टेशन का मुआयना कर सकें।
रेल टेल यात्री सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी कर रही है, पहले जहां रेल टेल द्वारा स्टेशनों पर निशुल्क वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है, अब इसी कड़ी में स्टेशनों की सुरक्षा को लेकर भी अत्याधुनिक कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है। रेल टेल ने पहले ही छावनी जंक्शन के विभिन्न हिस्सों में लगभग 47 कैमरे लगा दिए हैं। इसी प्रकार मंडल के बठिंडा रेलवे स्टेशन, जगाधरी-यमुनानगर, कालका, पटियाला, राजपुरा, सरहिंद, मोहाली, सहारनपुर और जाखल रेलवे स्टेशन पर 30 से 40 कैमरे लगाए हैं। इसी प्रकार बीच रास्ते आने वाले लगभग 40 से अधिक मुख्य स्टेशनों के आवागमन द्वार पर 4-4 बुलेट कैमरे लगाए गए हैं। सभी कैमरों ने कार्य शुरू कर दिया है। संवाद
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सेंट्रलाइजिड मॉनिटरिंग
पहली बार अंबाला मंडल के अधीन रेलवे स्टेशनों पर लगे कैमरे की एक साथ मॉनिटरिंग की जा सकेगी। पहले जहां सभी स्टेशनों के लिए अलग-अलग कंट्रोल रूम बनते थे, वहीं अब मंडल कार्यालय में तैयार होने वाले कंट्रोल रूम के जरिए रेल प्रबंधक अपने कार्यालय और घर पर बैठे-बैठे ही किसी भी स्टेशन पर नजर रख सकेंगे।
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नहीं हैंडओवर हुआ कंट्रोल रूम
अगर छावनी जंक्शन की बात करें तो यहां कंट्रोल रूम स्थापित हुए लगभग 10 दिन से अधिक का समय हो गया है। लेकिन अभी तक कंट्रोल रूम आरपीएफ के हवाले नहीं किया। इस कारण स्टेशन की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। इस कारण स्टेशन पर संदिग्धों की आवाजाही बढ़ती जा रही है। वहीं रेलवे परिसर से वाहन भी चोरी हो रहे हैं।
1 जुलाई 1987 को बना था मंडल
उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल का गठन 1 जुलाई 1987 को हुआ था। इसमें 639 किमी का रास्ता दिल्ली मंडल और 348 किमी का रास्ता फिरोजपुर मंडल से लिया गया। मंडल का कार्य 15 अगस्त 1988 को शुरू हुआ। मंडल का 62 प्रतिशत हिस्सा पंजाब से और बाकी का 39 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान व चंडीगढ़ से जुड़ा है। पूरे मंडल में 141 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन हैं। इसमें वर्ल्ड हैरिटेज सेक्शन कालका-शिमला नैरोगेज सेक्शन भी शामिल है।
15 दिन में कार्य होगा पूरा
कार्यालय में बैठे ही मंडल के सभी रेलवे स्टेशनों पर निगरानी रखी जा सकेगी। केंद्रीकृत कंट्रोल रूम में 55 इंच की 2 एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी। सर्वर रूम के साथ अन्य हाईटेक मशीनें भी स्थापित की जाएंगी, ताकि स्टेशन की प्रत्येक गतिविधि साफ व दुरुस्त नजर आए।
-आलोक कुमार, सह प्रबंधक रेल टेल।