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- प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट की मौत
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:41 PM IST
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प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट रजनी बाली ने मध्य रात्रि शिशु को जन्म देने के उपरांत दम तोड़ दिया। डिलीवरी के बाद 32 वर्षीय रजनी बाली की तबीयत खराब हुई और दुनिया को अलविदा कह दिया। अंबाला की होनहार बेटी रजनी बाली हरियाणा से पहली लोको पायलट थी। रात्रि प्रसव पीड़ा के दौरान परिवार ने अस्पताल स्टाफ को सिजेरियन डिलीवरी करने को कहा, मगर अस्पताल स्टाफ नार्मल डिलीवरी पर अड़ा रहा। इसके उपरांत करीब डेढ़ बजे बच्ची को जन्म देते ही रजनी ने दम तोड़ दिया। मामला स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के संज्ञान में आते ही उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं। उधर, बच्ची अभी अस्पताल में भी डॉक्टरों की निगरानी में है।
अंबाला में अस्सिटेंट रेलवे लोको पायलट के पद पर तैनात रजनी बाली को 29 दिसंबर को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। उनके पति शिव शक्ति का कहना है कि इससे पहले रेलवे अस्पताल से सिजेरियन केस कराने को कहा गया था मगर सिटी सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने नार्मल डिलीवरी पर जोर दिया। उन्होंने कहा था कि डिलीवरी नार्मल होगी। एक जनवरी की रात रजनी को प्रसव पीड़ा हुई जो उसके लिए असहनीय हो गई। रात को रजनी ने बेटी को जन्म दिया जिसके कुछ ही क्षणों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई जिससे उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से आहत शिव शक्ति ने भरी आंखों से बताया कि महिला डॉक्टर और वार्ड के स्टाफ ने पूरा सहयोग किया और रजनी को बचाने के लिए जी जान लगा दी। उन्होंने किसी के खिलाफ कार्रवाई से इंकार भी किया।
मौत से लड़ रही पत्नी को बचाने के लिए खुद ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर दौड़ पड़ा पति
महिला लोको पायलट के पति शिव शक्ति ने बताया कि डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत में उसकी पत्नी रजनी को स्ट्रेचर पर इमरजेंसी वार्ड में ले जाया जा रहा था तो स्ट्रेचर और ऑक्सिजन सिलिंडर संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं था। बार-बार उसकी नाक में डाला गया ऑक्सिजन पाइप बाहर निकल रहा था जिसे पकड़ने वाला तक कोई नहीं था। इस हाल में पत्नी को सहारा देने के लिए वह खुद स्टाफ की मदद के लिए दौड़ पड़े। शिव शक्ति ने बताया कि उसकी पत्नी ने उसके हाथ मे हाथ डालकर दम तोड़ दिया। पैदा होते ही मां को खो देने वाली नवजात बच्ची अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले रजनी की एक साढ़े 8 साल की एक बेटी भी है जो मां के निधन के बाद से काफी आहत है।
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सीएमओ ने बैठाई जांच
अस्पताल प्रबंधन ने रजनी की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सीएमओ डा. विनोद गुप्ता ने बताया कि डिलीवरी के दौरान महिला को कुछ हेल्थ कंप्लीकेशन्स हो गई थी जिन्हें गायनेकोलॉजिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञ ने संभालने का प्रयास किया परंतु दुख है महिला को बचाया नहीं जा सका। इस बारे में जांच शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने लिया संज्ञान
डिलीवरी के दौरान महिला लोको पायलट की मौत की खबर जब स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तक पहुंची तो उन्होंने इस मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत की। विज ने कहा कि इस मामले में जांच करवाई जाएगी कि आखिर महिला की मौत की असल वजह क्या है।
ट्रेनिंग में टॉप किया था रजनी ने
वर्ष 2013 में रजनी बाली रेलवे में भर्ती हुई थी। अंबाला सिटी स्थित कल्पना चावला पोलीटेक्निक से डिप्लोमा के बाद उसने लोको पायलट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। ट्रेनिंग के दौरान रजनी ने टॉप किया था। वर्ष 2013 में महिला दिवस के दिन ही रजनी ने लोको पायलट की परीक्षा पास की थी। वह तब हरियाणा की पहली महिला लोको पायलट बनी थी। रजनी के पिता भी लोको पायलट थे और उन्हीं को देख उसने रेलवे में भर्ती होने का संकल्प लिया था जिसे उसने बखूबी पूरा भी किया। रजनी ने पहली बार चंडीगढ़ से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन तक पैसेंजर ट्रेन लेकर आई थी और अब वह मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी थी। रजनी की मौत के बाद उनके पिता कमल कुमार अवाक थे। होनहार बेटी को खोने का गम उनकी आंखों में स्पष्ट झलक रहा था।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट रजनी बाली ने मध्य रात्रि शिशु को जन्म देने के उपरांत दम तोड़ दिया। डिलीवरी के बाद 32 वर्षीय रजनी बाली की तबीयत खराब हुई और दुनिया को अलविदा कह दिया। अंबाला की होनहार बेटी रजनी बाली हरियाणा से पहली लोको पायलट थी। रात्रि प्रसव पीड़ा के दौरान परिवार ने अस्पताल स्टाफ को सिजेरियन डिलीवरी करने को कहा, मगर अस्पताल स्टाफ नार्मल डिलीवरी पर अड़ा रहा। इसके उपरांत करीब डेढ़ बजे बच्ची को जन्म देते ही रजनी ने दम तोड़ दिया। मामला स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के संज्ञान में आते ही उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं। उधर, बच्ची अभी अस्पताल में भी डॉक्टरों की निगरानी में है।
अंबाला में अस्सिटेंट रेलवे लोको पायलट के पद पर तैनात रजनी बाली को 29 दिसंबर को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। उनके पति शिव शक्ति का कहना है कि इससे पहले रेलवे अस्पताल से सिजेरियन केस कराने को कहा गया था मगर सिटी सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने नार्मल डिलीवरी पर जोर दिया। उन्होंने कहा था कि डिलीवरी नार्मल होगी। एक जनवरी की रात रजनी को प्रसव पीड़ा हुई जो उसके लिए असहनीय हो गई। रात को रजनी ने बेटी को जन्म दिया जिसके कुछ ही क्षणों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई जिससे उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से आहत शिव शक्ति ने भरी आंखों से बताया कि महिला डॉक्टर और वार्ड के स्टाफ ने पूरा सहयोग किया और रजनी को बचाने के लिए जी जान लगा दी। उन्होंने किसी के खिलाफ कार्रवाई से इंकार भी किया।
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मौत से लड़ रही पत्नी को बचाने के लिए खुद ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर दौड़ पड़ा पति
महिला लोको पायलट के पति शिव शक्ति ने बताया कि डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत में उसकी पत्नी रजनी को स्ट्रेचर पर इमरजेंसी वार्ड में ले जाया जा रहा था तो स्ट्रेचर और ऑक्सिजन सिलिंडर संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं था। बार-बार उसकी नाक में डाला गया ऑक्सिजन पाइप बाहर निकल रहा था जिसे पकड़ने वाला तक कोई नहीं था। इस हाल में पत्नी को सहारा देने के लिए वह खुद स्टाफ की मदद के लिए दौड़ पड़े। शिव शक्ति ने बताया कि उसकी पत्नी ने उसके हाथ मे हाथ डालकर दम तोड़ दिया। पैदा होते ही मां को खो देने वाली नवजात बच्ची अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले रजनी की एक साढ़े 8 साल की एक बेटी भी है जो मां के निधन के बाद से काफी आहत है।
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सीएमओ ने बैठाई जांच
अस्पताल प्रबंधन ने रजनी की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सीएमओ डा. विनोद गुप्ता ने बताया कि डिलीवरी के दौरान महिला को कुछ हेल्थ कंप्लीकेशन्स हो गई थी जिन्हें गायनेकोलॉजिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञ ने संभालने का प्रयास किया परंतु दुख है महिला को बचाया नहीं जा सका। इस बारे में जांच शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने लिया संज्ञान
डिलीवरी के दौरान महिला लोको पायलट की मौत की खबर जब स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तक पहुंची तो उन्होंने इस मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत की। विज ने कहा कि इस मामले में जांच करवाई जाएगी कि आखिर महिला की मौत की असल वजह क्या है।
ट्रेनिंग में टॉप किया था रजनी ने
वर्ष 2013 में रजनी बाली रेलवे में भर्ती हुई थी। अंबाला सिटी स्थित कल्पना चावला पोलीटेक्निक से डिप्लोमा के बाद उसने लोको पायलट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। ट्रेनिंग के दौरान रजनी ने टॉप किया था। वर्ष 2013 में महिला दिवस के दिन ही रजनी ने लोको पायलट की परीक्षा पास की थी। वह तब हरियाणा की पहली महिला लोको पायलट बनी थी। रजनी के पिता भी लोको पायलट थे और उन्हीं को देख उसने रेलवे में भर्ती होने का संकल्प लिया था जिसे उसने बखूबी पूरा भी किया। रजनी ने पहली बार चंडीगढ़ से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन तक पैसेंजर ट्रेन लेकर आई थी और अब वह मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी थी। रजनी की मौत के बाद उनके पिता कमल कुमार अवाक थे। होनहार बेटी को खोने का गम उनकी आंखों में स्पष्ट झलक रहा था।