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एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध: बच्चों को पटाखे ही नहीं, फुलझड़ी से भी रखें दूर

Tue, 10 Nov 2020 11:00 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 10 Nov 2020 11:00 AM IST
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war against firecrackers by Amar Ujala campaign
पटाखा - फोटो : pixabay

दिवाली पर पटाखों के लिए सबसे अधिक जिद बच्चे ही करते हैं, जबकि पटाखे उनके ही स्वास्थ्य के लिए अधिक खतरनाक होते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिवाली के मौके पर बच्चों को पटाखों से दूर रखें, नहीं तो उन्हें पूरी उम्र का दर्द मिल सकता है। पटाखों और फुलझड़ी के धुएं से बच्चों की आंखों और फेफड़े पर काफी गंभीर असर पड़ता है।

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डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिवाली दीपों का पर्व है इसलिए इस मौके पर दीप ही जलाने चाहिए। दिवाली पर बच्चे पटाखों के लिए जिद करते हैं तो लोग उन्हें फुलझड़ी लाकर दे देते हैं। ऐसा माना जाता है कि फुलझड़ी नुकसान नहीं पहुंचाती है।
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डॉक्टर कहते हैं कि फुलझड़ी और अनार से निकलने वाले धुएं से सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन डाई आक्साइड निकलती है, जोकि बच्चों की आंखों से लेकर उनके फेफड़े तक को नुकसान पहुंचाती है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को पटाखों और फुलझड़ी से दूर ही रखें।
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थोड़ी सी लापरवाही से जलने की आशंका

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि आतिशबाजी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही होने पर जलने की आशंका रहती है। पटाखों के धुएं से बच्चों की सेहत को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। धुएं के कारण पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अस्थमा होने का डर रहता है। इसलिए इक्रो फ्रेंडली दिवाली मनाते हुए लोगों को जागरूक करें।

आंखों में जलन और लालीपन की शिकायत
बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मित्तल ने कहा कि दिवाली खत्म होने के बाद बच्चों की आंखों में जलन और लालीपन की शिकायत रहती है। इसकी वजह पटाखे और फुलझड़ी के धुएं होते हैं। बच्चों को पटाखों के साथ फुलझड़ी के धुओं से बचाना चाहिए। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। इससे बच्चों की आंखों की रोशनी जाने का डर बना रहता है।

फेफड़े पर पड़ता है असर  
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों के फेफड़े कमजोर होते हैं। ऐसे में पटाखों, फुलझड़ी और अनार से निकलने वाला धुआं फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है। बच्चों को इनसे दूर रखना चाहिए। बच्चों के आसपास पटाखे तो बिल्कुल न फोड़ें, क्योंकि वह आवाज सुनकर डरते हैं। इससे उन्हें ज्यादा खतरा रहता है।

दमा का खतरा ज्यादा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने कहा कि पटाखों से निकलने वाले धुएं से बच्चों को दमा के अटैक का खतरा रहता है। सांस लेने के दौरान बच्चों के अंदर जो धुआं प्रवेश करता है, उसमें कॉर्बनमोना आक्साइड रहता है, जो फेफड़ों को कमजोर कर देता है। खासकर एलर्जी वाले बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। इसलिए इक्रो फ्रेंडली दिवाली मनाते हुए तेल के दीपक जलाएं।
 
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