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विवेचनाओं को निपटाने के लिए ‘वादी संवाद दिवस’

Tue, 07 Sep 2021 01:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 01:06 AM IST
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vaadee sanvaad divas
विवेचनाओं को निपटाने के लिए ‘वादी संवाद दिवस’
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गोरखपुर। जिले में दर्ज मुकदमों में वादी को न्याय दिलाने के लिए एक और कोशिश की जाएगी। डीआईजी जे. रविंद्र गौड़ ने ‘वादी संवाद दिवस’ की शुरुआत की है। हर बुधवार को थाने पर इसका आयोजन किया जाएगा। वादी और विवेचक के बीच सीधा संवाद होगा, ताकि तफ्तीश जल्दी से पूरी की जा सके। इस दिवस में लड़की को बहला फुसला कर भगाने, शारीरिक अपराध और जमीन के मामलों का निपटारा कराया जाएगा। जिले में इस समय 3612 पुरानी विवेचनाएं लंबित हैं।
जानकारी के मुताबिक, जमीन या फिर कई ऐसे मामले में है, जिनका केस दर्ज होने के बाद एक साल से अधिक का समय गुजर गया,लेकिन विवेचना पूरी नहीं हो पाई है। इस विवेचनाओं को पहले भी निपटाने के लिए अफसरों ने कोशिश की थी और अलग-अलग नाम से अभियान भी चलाया था, लेकिन कोई फायदा नजर नहीं आया। जो फरियादी अफसरों के पास पहुंचे उन्हीं को इस अभियान का फायदा भी मिल पाया, नहीं तो सिर्फ आंकड़े ही दुरुस्त होते रहते है। एक अफसर के जाने के बाद फिर से अभियान पर ताला लग जाता है। खुद डीआईजी का ही मानना है कि विवेचनात्मक कार्रवाई में देरी होने से पीड़ित पक्ष को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विवेचनाओं का त्वरित निस्तारण भी नहीं हो पाता है।
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नए अभियान में यह करना होगा
वादी को न्याय दिलाने के लिए ‘वादी संवाद दिवस’ का आयोजन किया जाना। वादी पक्ष विवेचक से संवाद स्थापित कर अपनी बात बेहिचक रख सके। जिसमें सभी विवेचक, थाना-प्रभारी द्वारा अपने सभी विवेचनाओं के साथ वादी के समस्याओं सहित प्रतिभाग करेंगे, परिक्षेत्र के चारों जनपदों को निर्देशित किया गया है। प्रत्येक बुधवार को वादी संवाद दिवस का आयोजन होगा, जिसमें विशेषकर बहला फुसला कर भगाने, शरीर संबंधित अपराध, संपत्ति संबंधित अपराध की लंबित विवेचना निपटाई जाएंगी।
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वादी संवाद दिवस के लिए परिक्षेत्र के सभी जिले के एसएसपी, एसपी को आदेश दिया गया है। प्रत्येक बुधवार थाने में वादी को बुलाकर संवाद स्थापित किया जाय। समय का निर्धारण इस प्रकार किया जाय कि जब सीओ/अपर पुलिस अधीक्षक संवाद में समय से भाग ले सकें। वादी को बीट पुलिस अफसर के माध्यम से आयोजन के 02 दिन पूर्व सूचना प्राप्त कराई जाए, जिससे वादी से विवेचक, थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक संवाद स्थापित कर सकें, जिससे वादी की दुविधाओं (शंकाओं) एवं समस्याओं का समाधान हो सके। -जे. रविंद्र गौड़, डीआईजी
यह चलें अभियान, हुआ यह अंजाम
- एडीजी ने जाम से मुक्ति का अभियान चलाया (मोहद्दीपुर से शुरुआत हुई, डेढ़ महीने बाद ही व्यवस्था पहले की तरह हो गई)।
- एडीजी ने ऑपरेशन तमंचा चलाया (इसका असर भी सामने आया, जिले में कई अवैध असलहे पकड़े गए)
एडीजी ने ही ऑपरेशन दस्तक (बदमाशों की निगरानी करनी थी, अभी गगहा में ही हुई काजल की हत्या में यह फेल पाया गया)।
- बीट पुलिस अधिकारी की शुरुआत (यह भी प्रभावी नहीं हो पाया है, गगहा में एडीजी की जांच में यह फेल पाया गया)।
- ऑपरेशन शिकंजा (इसका असर हुआ और हाल ही में बहराइच के एक मामले में पैरवी कर मृत्युदंड की सजा सुनाई गई)।
- एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु का ऑपरेशन न्याय (पुरानी विवेचना को निपटाना था, पहले असर फिर जाने पर काम बंद)।
- ऑपरेशन-15 (15 साल पहले तक बड़े अपराध में शामिल बदमाशों का नया डोजियर तैयार हुआ, पुलिस के पास रिकॉर्ड आ गया, लेकिन निगरानी नहीं हो पा रही है)।
- ऑपरेशन हंट (ऑपरेशन-15 में बचे बदमाशों के लिए लिए चलाया गया था यह भी अब बंद हो चुका है)।
- नवागत एसएसपी ने वांछित गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया है जिसका असर भी हो रहा है।
- एक अपराधी अभियान (इसके तहत पुलिस वाले एक बड़े अपराधी से संपर्क कर निगरानी कर रहे है, ताकि पुलिस का खौफ बना रहे)।
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